INTERVIEW!! ‘‘मैंने मार्शल आर्ट के अलावा तलवार चलाने की भी ट्रेनिंग ली..’’ – तमन्ना भाटिया

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‘हिम्मतवाला’ और ‘हमशकल्स’ जैसी असफल हिंदी फिल्मों की अदाकारा तमन्ना भाटिया दक्षिण भारत की तमिल, तेलगू और मलयालम भाषायी फिल्मों की सुपर स्टार हैं। उनका मानना है कि बाॅलीवुड की असफल फिल्मों से उनके करियर पर असर नहीं पड़ा। इन दिनों वह तमिल, तेलगू और हिंदी भाषा में एक साथ बनी फिल्म ‘बाहुबली’ को लेकर चर्चा में हैं। जिसका लेखन व निर्देशन दक्षिण भारत के सर्वाधिक सफल व लोकप्रिय निर्देशक एस एस राजामौली ने किया है।

आप दक्षिण भारत के सुपर स्टार हैं। लेकिन बाॅलीवुड में आप अभी तक सफलता नहीं पा सकीं?

माना कि मेरी हिंदी भाषा की फिल्में सफल नहीं हुई हैं, मगर इससे मेरे करियर पर खास असर नहीं हुआ। हिंदी फिल्मों की असफलता के बावजूद एक अदाकारा के रूप में मुझे लगातार अच्छा काम करने के अवसर मिल रहे हैं। सच यह है कि हिंदी फिल्में असफल हुई, मगर मेरे अभिनय को सराहा गया। हर फिल्म की सफलता व असफलता की कई वजहें होती हैं। इसलिए सिर्फ कलाकार को दोषी नहीं माना जा सकता। मेरी राय में तो फिल्म की असफलता से कलाकार बहुत कुछ सीखता है। मैं फिल्मों का चयन फिल्म के कंटेंट और अपने किरदार के आधार पर करती हूं ना कि भाषा के आधार पर। इन दिनों मैं ‘बाहुबली’ जैसी फिल्म करके अति उत्साहित हूं।

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फिल्म ‘बाहुबली’को लेकर उत्साहित होने की कोई खास वजह?

मशहूर निर्देशक एस एस राजामौली की ‘बाहुबली’ एक पीरियड और युद्ध फिल्म है। इसमें बहुत अजीबो गरीब हथियारों से युद्ध लड़ा गया है। मेरे लिए तो आश्चर्य की बात थी कि ऐसी फिल्म के साथ जुड़ने का आॅफर मुझे दिया गया। इस फिल्म में अनुष्का शेट्टी पहले से काम कर रही थी।तो मुझे लगा कि मेरा किरदार स्पेशल अपियरेंस का होगा। पर जब मैंने फिल्म की स्क्रिप्ट और अपना किरदार सुना, तो मैं फिल्म को करने के लिए उत्साहित हो गयी। वैसे भी एस एस राजामौली ऐसे निर्देशक हैं, जिनकी फिल्में भाषा की मोहताज नहीं हैं।

‘बाहुबली’ में काम करने के अनुभवों को लेकर क्या कहेंगी?

‘बाहुबली’ में काम करने के मेरे अनुभव बहुत अमेजिंग रहे। मुझे उंचाई से बहुत डर लगता है और इस फिल्म के ज्यादातर स्टंट सीन की शूटिंग मुझे काफी ऊंचाई पर जाकर करनी पड़ी। कई स्टंट सीन में मुझे ऊंचाई पर से काफी नीचे कूदना पड़ा। इससे मेरे अंदर जो ऊंचाई को लेकर डर था, वह खत्म हो गया। मैंने पहली बार तलवारबाजी की। तीरंदाजी की। यह फिल्म उस काल की है, जब बंदूक और बारूद का आविष्कार नहीं हुआ था।

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फिल्म ‘बाहुबली’ और अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगी?

यह कहानी 400 साल पहले राज सिंहासन के लिए लड़ने वाले दो भाइयों की है। यह लड़ाई प्रभाश और राणा डग्गूबाती के बीच हैं। मैंने इस फिल्म में अवंतिका का किरदार निभाया है, जो कि प्रभाश की प्रेमिका है। और उनके लिए युद्ध लड़ती हैं। मैंने सबसे पहले प्रभाश से ही तलवार पकड़ना सीखा। अब तक इस तरह की फिल्म नहीं बनी।

फिल्म ‘बाहुबली’ के किरदार को निभाने के लिए आपने क्या तैयारी की?

इस तरह की फिल्म में काम करने का मेरा यह पहला मौका था। युद्ध के दृश्य को फिल्माने के लिए तीन हजार से अधिक लोगों की भीड़ थी। जिसमें कलाकारों के अलावा जूनियर आर्टिस्ट भी थे। इसलिए किसी भी सीन को फिल्माने से पहले हम काफी रिहर्सल करते थे। फिल्म में काफी एक्शन सीन हैं, जिन्हें करना मेरे लिए शारीरिक रूप से चुनौती थी। इस फिल्म के लिए हमने कई दिन लगातार 18 घंटे शूटिंग की। मैंने मार्शल आर्ट के अलावा तलवार चलाने की भी ट्रेनिंग ली। इस फिल्म के मेरे सारे एक्शन सीन बहुत कठिन रहे। हर सीन के लिए मुझे काफी तैयारी करनी पड़ी। विदेशी स्टंट मैन पीटर हेन ने मेरी काफी मदद की। सेट पर निर्देशक एस एस राजामौली का भी सहयोग मिला। हाॅलीवुड में तो महिला कलाकार जमकर एक्शन सीन करती हैं। पर भारत में हम महिला कलाकारों को ऐसी आदत नहीं हैं।

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‘बाहुबली’ में अनुष्का शेट्टी के साथ काम करने के अनुभव क्या रहे?

अच्छे अनुभव रहे। वह अच्छी अदाकारा और अच्छी इंसान हैं। वह एक प्रोफेशनल कलाकार हैं। जब मैं इस फिल्म के साथ जुड़ी उस वक्त मेरा अपना कोई कास्टयूम डिजाइनर नहीं था। मैंने इस बारे में अनुष्का शेट्टी से बात की,उन्होेंने अपने कास्ट्यूम डिजायनर का नंबर मुझे दिया। फिल्म में अनुष्का शेट्टी के साथ मेरे ज्यादा सीन नहीं है। मेेरे ज्यादातर सीन प्रभाष के साथ हैं।

प्रभाश के साथ काम करने के अनुभव कैसे रहे?

प्रभाश के साथ यह मेरी दूसरी फिल्म है। वह मेहनती कलाकार है। अपने सह कलाकार की मदद करते हैं।

दो दो हिंदी भाषी फिल्मों की असफलता ने आपको कितन बदला?

मैंने संकुचित विचार धारा के साथ जीना छोड़ दिया है। फिल्मों के चयन को लेकर अब मैं ज्यादा सजग हो गयी हूं। हिंदी फिल्में करते हुए मेरे अंदर फैशन का सेंस आ गया। हिंदी फिल्मों से जुड़ने से पहले मुझे उस वक्त बड़ा अजीब सा लगता था कि जब कोई कलाकार किसी खास ब्रांड के जूते या कपड़े पहनने पर जोर देता था। पर अब मुझे फैशन की इतनी समझ आ गयी है कि मैंने अपना खुद का ‘व्हाइट एंड गोल्ड’ नामक आॅन लाइन ज्वेलरी शॉप शुरू की है। इसके अलावा अब फिल्मों के चयन का मेरा तरीका और अंदाज भी बदल गया है। अब मैं उन्ही ऑफरों पर गौर करती हूं, जिस तरह की फिल्में मैं करना चाहती हूं।

‘हिम्मतवाला’ की असफलताओं के बावजूद जब मैंने साजिद खान के निर्देशन में ‘हमशकल्स’ की थी, तो सभी ने आश्चर्य व्यक्त किया था। तमाम कलाकारों ने साजिद खान के खिलाफ बहुत कुछ कहा। पर यदि मेरे पास वह किसी अच्छी फिल्म का आॅफर लेकर आएंगे, तो मैं उस पर विचार कर सकती हूं। मैं यह कभी नहीं भूल सकती कि साजिद खान ने ही मुझे हिंदी फिल्मों में ब्रेक दिया था। साजिद खान के प्रति मेरे मन में हमेशा सम्मान रहेगा। फिर मैंने पहले ही कहा कि किसी भी फिल्म की असफलता के लिए सिर्फ निर्देशक या कलाकार ही जिम्मेदार नहीं होते हैं।

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दूसरी कौन सी फिल्में कर रही हैं?

नागार्जुन और कार्थी के साथ तमिल व तेलगू दोनों भाषाओं में बन रही फिल्म कर रही हूं। जो कि फ्रेंच फिल्म ‘द इन टचेबलस’ पर आधारित है। जबकि रवि तेजा के साथ एक तेलगू फिल्म कर रही हूँ।

कोई दूसरी हिंदी फिल्म नहीं कर रही हूँ?

पिछली असफलताओं से सबक लेकर अब काफी सोच समझकर हिंदी फिल्मों का चयन कर रही हूं। फिलहाल दो तीन स्क्रिप्ट पढ़ रही हूं। कुछ ठोस होने पर जरुर बताऊंगी।


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Mayapuri

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