INTERVIEW: मैं बहुत ही साधारण व्यक्तित्व की लड़की हूँ – अनेरी वजानी

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लिपिका वर्मा

अनेरी वजानी  मुंबई में पली बड़ी हुई है।  बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक रहा है। अभिनय का शौक  सर चढ़ कर बोलता रहा जब वो अपने स्कूल भी जाया करती। अनेरी की टीचर्स भी उन्हें ड्रामा और नाच गाने में बराबर से हिंसा लेने देती थी।  सही मायनों में अनेरी स्कूल भी नाचने और ड्रामा वगैरह में भाग  लेने की मंशा से ही जाया करती। पढ़ने लिखने का कोई अधिक शौक नहीं था अनेरी को।  जब कभी उन्हें मौका मिलता तो ऑडिशन देने के लिए भी स्कूल बंक कर लिया करती। 10वीं या 12वीं की कक्षा में अनेरी को केवल 35ः मार्क्स मिले तब उनकी माताश्री ने नाराज हो कर घर से निकल दिया और कुछ महीने मामा के  घर रह कर ही अपनी दसवीं कक्षा के पढ़ाई पूरी करनी पड़ी। जब अनेरी को 88ः मार्क्स मिले तो उनकी माँ उन्हें खुशी -खुशी घर ले आयी।

पेश है अनेरी की लिपिका वर्मा से बातचीत के कुछ अंश

सुना है आपको पढाई-लिखाई में कोई रूचि नहीं थी ?

जी हाँ मुझे शुरू से ही एक्टिंग का कीड़ा था। यहाँ तक की जब मैं 12 कक्षा में बंगलूरु गयी और मुझे मेरा पहला साउथ एशिया हॉर्लिक्स बिस्कुट का असाइनमेंट मिला तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। और हाँ मुझे स्ट्रगल करने का कतई शौक नहीं था। बस उसके बाद जब मैं मुंबई पहुंची तो स्टार प्लस का एक शो मिल गया और अब सोनी एंटरटेनमेंट चैनल पर ‘बेहद’ शो में सांझ का किरदार निभा  रही हूँ। बहुत खुश हूँ -जिन्दगी में जो मैंने चाहा था वैसा  ही पाया है।

‘बेहद’ शो सोनी पर बहुत अच्छी टी आर पी  ला रहा है कितनी खुश है?

देखिये, हर किसी का काम जब सराहा जाता है तो खुशी  मिलना लाजमी है। यह एक रोमांटिक शो है। इस में मेरी जर्नी दिखाई गयी है।

सांझ के किरदार की तरह आप भी बहुत स्वार्थी (सेल्फिश) है क्या?

जी नहीं !! मैं बिल्कुल भी स्वार्थी नहीं हूँ। मैं बहुत ही साधारण व्यक्तित्व की लड़की हूँ। मैं अपना काम करती हूँ और दूसरों को भी अपना काम करने देती हूँ।

सांझ एक रोमांटिक लड़की है। आप भी रोमांटिक है क्या? बचपन में थोड़ा बहुत रोमांस तो किया ही होगा आपने?

देखिए कौन  रोमांटिक नहीं होता है। बिल्कुल सही पूछा अपने-स्कूल में मेरे कई  क्रश रह चुके  हैं। और कॉलेज में भी क्रश रह चुके है। कभी मै आगे बढ़ गयी तो कभी वह। उस रोमांस में टोटल बचपना टाइप  रोमांस होता है। हमें कोई ज्यादा ज्ञान नहीं  होता है दोस्ती के बारे में।

 तो अब हो गया होगा ? अभी आप किसी से फ्रेंडली  है ?

जी नहीं इस समय तो मैं बहुत ही फोकस्ड हूँ।  काम को लेकर  भी बहुत व्यस्त रहती हूँ । और तो और मेरे पास जितना समय है वह सारा समय काम के लिए ही दे पाती  हूँ।  तो मुझे फालतू की झंझटों में अभी नहीं पड़ना है। अभी मैं केवल 24 वर्ष की हूँ। मन लगा कर काम कर लूँ और जब सही समय आएगा तो ब्याह शादी करके घर भी बसा लूंगी। उस समय सही व्यक्ति का चयन करने की क्षमता भी होगी मुझ में। बाद में  यह खेद भी नहीं रह जायेगा कि  मैंने अपने सपने नहीं संजोय -एक्टिंग के।

और किस तरह का व्यक्ति पुरुष, पसंद करेंगी अपनी जिन्दगी में?

मुझे एक पुरुष में सबसे पहले यही पसंद होता है- कि वो महिलाओ की इज्जत करे। मेरे परिवार की इज्जत भी करे और स्पष्टवादी  एवं मन का सच्चा व्यक्ति हो। मैं उसे अपना सब कुछ न्यौछावर कर दूंगी। अभी मैं सिंगल ही रहना पसंद  करती  हूँ। सबसे बड़ी बात है  मैं शूटिंग के पश्चात इतनी थक जाती हूँ और यदि किसी रिश्ते में बंध  जाऊं तो बार बार उसे फोन भी नहीं कर पाऊँगी। और ज्यादा समय भी नहीं दे पाऊँगी उसे। इसलिए अभी फिलहाल ‘नो रिश्ते ’।

सारा समय काम ही काम आप बोर नहीं हो जाती ?

जी नहीं मुझे काम करना बेहद पसंद है। बस शूटिंग खत्म होने के बाद में केवल आधा घंटा अपने लिए रखती हूँ। इस दौरान मैं अपने घर के करीब एक कॉफी शॉप में जा कर बस अकेले ही कॉफी पीने का आनंद  लेती हूँ। उसके बाद घर चली जाती हूँ।

आपके लिए परिवार का सपोर्ट कितना अनिवार्य है ?

– बिना परिवार के हर व्यक्ति का जीवन  अधूरा ही होता है। मुझे अपने माता पिता और यहाँ तक कि मेरे दादा जो अब इस दुनिया में नहीं रहे, उनसे इतना लगाव है कि  मैं इन लोगों के बिना  जी नहीं सकती हूँ।

दादा की कुछ यादें हमसे शेयर करना चाहेंगी  आप?

मुझे आज भी याद है जब मुझे पहली तनख्वाह मिली तो उनके लिए मैंने एक फोन खरीदा  था और उन्हें वाइट शर्ट बहुत पसंद थी वो भी लेकर आयी थी। वह बहुत ही अच्छा व्यक्तित्व रखते थे। जब भी मेरा काम उन्हें पसंद नहीं आता तो जैसे ही मैं घर पर पहुंचती तो मुझे सीधे-सीधे बोल दिया करते वो -आज कैसा बुरा काम किया तूने। हर शनिवार, रविवार मेरे साथ घूमने और फिल्में भी देखना पसंद किया करते। जब कोई मेरे साथ फोटो खींचवाने आता तो खुश हो कर कहते -‘‘यही  है जो टी  वी पर दिखलाई देती है आप इसके साथ फोटो खींचे।’’

और माता पिता को क्या उपहार दिया आपने?

जब मैं छोटी  थी तो मुझे ‘हौंडा  सिटी’ कार बेहद  पसंद थी वही मैंने पापा और मम्मी को भेंट की अपनी पहली पगार से। किन्तु अभी मुझे , ‘जेगुआर’ गाडी पसंद है कभी न कभी खरीद ही लूंगी।

 


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Mayapuri

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