पाँच सौ कलाकारों के स्क्रीन टेस्ट के बाद मेरा चयन हुआ..’’ बाॅबी वत्स

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पुलिस विभाग के परिवार से जुड़े होने के बावजूद बॉलीवुड में कदम रखने वाले कलाकारों में से एक हैं बॉबी वत्स, जो कि इन दिनों पूर्व आई पी एस वाय पी सिंह निर्देशित तथा पुलिस विभाग की कलई खोलती फिल्म ‘क्या यही सच है’ को लेकर काफी चर्चा में है। इस फिल्म में उन्होंने मुख्य भूमिका निभायी है, जिसकी हर कोई बड़ी तारीफ कर रहा है।
॰ सबसे पहले तो अपनी अब तक की यात्रा के बारे में बताएं?
– मैं मूलतः उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का रहने वाला हूँ। मेरे पिता पुलिस विभाग के कर्मठ और इमानदार अफसर थे। वह चाहते थे कि मैं पुलिस विभाग या सेना से जुड़ूँ। पर बचपन से ही मेरी रूचि अभिनय में रही है। इसलिए मैं 18 साल की उम्र में मुंबई चला आया। यहाँ पर मैंने स्व.पंडित सत्यदेव दुबे के साथ रंगमंच पर पूरे एक माह का वर्कशॉप किया। उसके बाद मैंने प.सत्यदेव दुबे, अतुल तिवारी, मकरंद देशपांडे, सलीम घोष सहित कई दिग्गज रंगकर्मियों के साथ काम किया। मैंने हेमा मालिनी के साथ नाटक ‘द्रौपदी’ में युधिष्ठिर की भूमिका निभायी। मैंने हेमा मालिनी के साथ अमरीका में इस नाटक के 35 शो किए। इसके अलावा हेलमेट, कोमल गांधार, सुबह हुई शाम हुई, आधे अधूरे सहित कई नाटकों में अभिनय किया। टीवी पर ‘हीना’, ‘कश्ती’, ‘आम्रपाली’, ‘बंघन’, ‘आहट’, ‘सीआईडी’, ‘दहशत’, ‘रात होने को है’, ‘रावण’ जैसे सीरियलों में अभिनय किया। जबकि मेरे कैरियर की पहली फिल्म ‘जोरू का गुलाम’ थी। उसके बाद मैंने ‘जेम्स’, ‘ब्लफ मास्टर, ‘डिटेक्टिव नानी’, ‘चितकबरे’ सहित ग्यारह फिल्में की। अब मेरी अति महत्वपूर्ण फिल्म ‘क्या यही सच है’ प्रदर्शित हुई है जो कि पूर्व आई पी एस ऑफिसर वाय पी सिंह के उपन्यास पर आधारित है, जिसका निर्माण, लेखन व निर्देशन वाय पी सिंह ने ही किया है। यह एक यथार्थपरक फिल्म है।
॰फिल्म ‘क्या यही सच है’ के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगे?
– यह फिल्म पुलिस विभाग पर बनी एक यथार्थ फिल्म है। अब तक पुलिस विभाग पर इतनी बरीकी से किसी फिल्म में भी काम नहीं किया गया। पुलिस विभाग व सरकार का जो गठजोड़ होता है, उसका भी इसमें चित्रण है। मैंने इस फिल्म में ज्वाइंट पुलिस कमिष्नर रोहित तिवारी का किरदार निभाया है। यूं तो लोग इसे नगेटिव किरदार कहेंगे, पर मैं इसे नगेटिव नहीं मानता। रोहित बहुत ही व्यावहारिक अफसर है। वह आज के पुलिस अफसर जैसा ही है। रोहित तिवारी बहुत ही ज्यादा शार्प, दिमाग वाला है। औरतें उसकी कमजोरी है। उसका दिमाग इतना तेज चलता है कि कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। सबसे ज़्यादा भ्रष्ट है।

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॰ इस किरदार के लिए आपका चयन कैसे हुआ ?
– कठिन तपस्या रही। मेरे थिएटर की मेहनत काम आयी। वायपी सिंह ने रोहित तिवारी के किरदार के लिए पाँच सौ कलाकारों का स्क्रीन टेस्ट लिया, पर बात नहीं बनी। अचानक मेरे एक मित्र ने उनसे मुझे मिलवाया। स्क्रीन व ऑडीशन टेस्ट के बाद बात बन गयी।
॰ इस किरदार के लिए कोई खास तैयारी भी करनी पड़ी?
– बहुत तैयारी की। मैंने वाय पी सिंह लिखित उपन्यास ‘कारनेज बाय एंजेल्स’ को दो बार पढ़ा। इसके अलावा पूरे दो माह तक हमें रोज सुबह उठ कर पुलिस परेड की ट्रेनिंग के लिए जाना होता था। हमने एक ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर किस तरह से चलता है, किस तरह से बिहेव करता है, उसके मैनेरिजम को अपनाने की कोशिश की। इस किरदार के लिए मैंने काफी कठिन मेहनत की है।
॰ अब आप टीवी नहीं कर रहे हैं?
– मैंने अपने कैरियर की शुरूआत टीवी से ही की थी। लेकिन पिछले चार पाँच वर्षों से मैं टीवी नहीं कर रहा हूँ और इसकी मूल वजह यह है कि टीवी पर सब कुछ मोनोटोनस हो गया है। कुछ भी नया नहीं हो रहा है यदि कुछ खास और उत्साहित करने वाला काम आएगा, तो मैं जरूर करना चाहूँगा।
॰ इसके अलावा कोई फिल्म कर रहे हैं?
-हां! मेरी एक फिल्म ‘इट्स मैन्स वल्र्ड’ तैयार हैं। इसमें मैंने एक टीवी जर्नलिस्ट का किरदार निभाया है। तो दूसरी तरफ संजय खंडूरी की फिल्म ‘किस्मत लव पैसा दिल्ली’ में बहुत ही महत्वपूर्ण किरदार निभा रहा हूँ। अब तक इस तरह का किरदार फिल्मों में आया नहीं है। यह बहुत ही अलग तरह का किरदार होगा।
॰ किस तरह के किरदार करने की इच्छा है?
– मुझे अभिनय करना है। ऐसे चरित्र निभाने हैं, जो कि मेरे अंदर की प्रतिभा को निखार सके। मुझे हीरो या विलेन के रूप में अपने आपको ढालने की कोई तमन्ना नहीं है। क्योंकि मेरा मानना है कि परदे पर सभी को अभिनय करना होता है। यदि आप अपनी अभिनय क्षमता से प्रभाव नहीं डाल सकते, तो फिर आप हीरो हो या विलेन या कैरेक्टर आर्टिस्ट कोई फर्क नहीं पड़ता।

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Mayapuri