INTERVIEW!! 1990 में घटी घटना पर आधारित है फिल्म ‘एयरलिफ्ट’ – अक्षय कुमार

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अक्षय की बात की जाये तो वो एक ऐसे स्टार हैं जो पिछले कई साल से हर तरह की फिल्में करते आ रहे हैं। जैसे अगर वे ‘राउडी राठौर’, ‘सिंह इज किंग’ या ‘सिंह इज ब्लिंग’ करते हैं तो दूसरी तरफ संदेशात्मक फिल्म भी करते हैं। यहीं नहीं उनके द्वारा अभिनीत कमर्शियल फिल्में हैं तो स्पेशल छब्बीस, गब्बर, बेबी जैसी संदेशात्मक फिल्में भी हैं। ऐसी ही एक फिल्म टी सीरीज तथा निखिल आडवानी द्वारा निर्मित ‘एयर लिफ्ट’ है। इस फिल्म के तहत कोई महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिये अक्षय ने प्रेस से बात की, जो कुछ इस प्रकार रही।

अक्षय कहते हैं कि आपको इस फिल्म की थोड़ी जानकारी देने के लिये बुलाया गया है। दरअसल ये देश और देश के कुछ नागरिकों को लेकर एक सच्ची घटना पर आधारित ऐसी फिल्म है जिसकी उन दिनों न तो मीडिया और न ही किसी और को भनक तक लगने दी थी यानि सरकार ने इस घटना को रिवील ही नहीं किया। उसकी वजह ये थी क्योंकि इस घटना से पॉलीटिकल स्तर पर भारत सरकार के रिश्ते खराब हो सकते थे। वैसे इस ऑपरेशन में चार लोग थे, लेकिन स्क्रिप्ट में उन चारों को मिलाकर एक शख्स कर दिया गया उस किरदार का मैंने निभाया है।

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जैसा कि आप जानते हैं 1990 में सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला कर दिया था। उसके हमला करने के कुछ रीजंस थे। ये युद्ध काफी लंबा चला लेकिन इस युद्ध के दौरान पूरे वर्ल्ड से जो लोग इराक या कुवैत में नोकरी करते थे वहां बरी तरह फंसे हुये थे बाद में जब अमेरिका ने इराक पर हमला किया तो खासकर इंडियंस जिनकी तादाद करीब 1,70,000 थी उन्हें एक आदमी 59 दिनों में 488 बार हवाई जहाजों द्वारा इंडिया पहुंचाया, दूसरे उन विमानों को उड़ाने वाले एयरफोर्स के पायलेट नहीं बल्कि कमर्शियल पायलेट थे, ऐसे में कुछ भी हो सकता था।

इस फिल्म के द्वारा हमने किसी को जवाब नहीं देना। बस हमने उस घटना को दिखाना भर है। वैसे ये घटना पहले ही गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। सबसे बड़ी बात कि ये बात उन दिनों सरकार ने छुपाकर रखी थी क्योंकि उसे छिपाने के लिये एक पॉलिटिकल रीजन था और रीजन अमेरिका था। उस समय ये घटना किसी पेपर की हैड लाइन नहीं बनी थी। बस एक पेपर में इसको लेकर एक छोटा सा लेख छपा था।

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अक्षय का कहना है कि एक आदमी ने उस समय इतने लोगों की जान बचाई थी लेकिन उसे कोई नहीं जानता कि वो कौन था। मेरा तो कहना है कि ये घटना हमारे बच्चों की बुक में होनी चाहिये जिस प्रकार उन्हें राणा प्रताप की कहानी बताई जाती, अकबर, पृथ्वीराज चौहान की वीरता की कथा उनकी बुक में होती है उसी तरह इस घटना को भी बुक रखा जाना चाहिये जिससे हमारे बच्चे अपने हिन्दुस्तानी होने पर गर्व महसूस कर सके।

फिल्म में अमेरिकी एजेंडे के बारे में बस इशारा किया गया है क्योंकि ये कोई वॉर फिल्म नही है। हमने बस उस घटना को फिल्माया है ।
अक्षय से जब हाल ही में आमिर खान द्वारा देश छोड़ने की बात कही गई तो यहां अक्षय का कहना था कि कोई क्या कहता है मुझे नहीं पता लेकिन अपने आप पर गर्व करता हूं कि मैं भारतीय हूं। मैं जब भी कनाडा लंदन या और कहीं शूटिंग के लिये जाता हूं तो वहां इंडियंस को देखता हूं वे खुद वहां ऐसी हिन्दी या पंजाबी बोलते हैं जो हमें भी नहीं आती। मैं कह सकता हूं कि वे हमसे ज्यादा भारतीय हैं।

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टी सीरिज के लिये अक्षय का कहना है कि मैं लकी हूं कि इस फिल्म के निर्माता भूषण कुमार हैं। उनके साथ पहले भी मैं ‘बेबी’ जैसी फिल्म कर चुका हूं। फिल्म के बारे मैं कहना चाहता हूं कि ये कोई डाक्यूमेन्ट्री या पॉलीटिकल फिल्म नहीं हैं ये पूरी तरह से कमर्शियल फिल्म है। जिस तरह बेबी, हॉलीडे, गब्बर और रूस्तम आदि फिल्में थी। मैं ऐसी फिल्में करना पंसद करता हूं। बेशक ये सौ करोड़ नहीं कर पाती लेकिन साठ सत्तर तक ये भी पहुंच ही जाती है। सबसे बड़ी बात ये है कि मैं वो सारी फिल्में करना चाहता हूं जिन्हें करते हुये मुझे मजा आना चहिये।
अक्षय समय के पाबंद हैं। उनसे जब बॉलीवुड में अपने जैसे वक्त की इज्जत करने वाले शख्स के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अमिताभ बच्चन का नाम लेते हुये कहा कि मुझे यकीन नहीं होता कि मैं उनके साथ अभी तक आठ फिल्में कर चुका हूं। इतना काम उनके साथ शायद ही किसी ने किया हो।


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Mayapuri

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