INTERVIEW!! बेशक कहानी राजस्थान की है, लेकिन पूरी तरह काल्पनिक है – लेखक निर्देशक- जीतेन्द्र सिंह नरूका

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निर्देशक जीतेंद्र सिंह नरूका इससे पहले दो राजस्थानी फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं। ‘धारा 302’ उनकी पहली हिन्दी फिल्म है। इस फिल्म को लेकर उनसे एक छोटी सी बातचीत।

इस फिल्म के बारे में आपका क्या कहना है?

इस फिल्म से मेरा सोचना था कि अभी तक राजस्थानी गैंगस्टर को बेस बनाकर कोई फिल्म नहीं बनी है। इसके बाद जब मैंने वहां के बारे में रिसर्च की तो पता लगा कि सिर्फ वहां राजस्थान में बिजनिसमैन मारवाड़ी ही नहीं और भी बहुत सारी चीजें हैं, उन्हीं में गैंगस्टर्स भी हैं। फिल्म में एक ऐसा किरदार है जिसे माहौल ने गैंगस्टर बनाया। ये कहानी मैंने जब फिल्म के प्रोड्यूसर भवानी शंकर योगी जी को सुनाई तो वे फौरन इस पर फिल्म बनाने के लिये तैयार हो गये। इस तरह ‘धारा 302’ का जन्म हुआ।

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फिल्म की वन लाइन क्या होगी?

यहां मैं उन मां-बाप की गलती बता रहा हूं जो अपने बच्चों पर ध्यान नहीं देते और अगर उनका बच्चा गलती कर रहा है तो सामने लाने की बजाय उस पर पर्दा डाल देते हैं। यहां भी एक ऐसा किशोर शख्स जो अपने यार दोस्तों के साथ मौज मस्ती यहां तक कुछ गलत भी कर रहा है। अचानक उसकी किसी से इतनी अनबन हो जाती है कि बाद में वो अपने दोस्तों के साथ उसका मर्डर कर देता है। इसके बाद जुर्म दर जुर्म करते हुये वो एक दिन राजस्थान का सबसे बड़ा गैंगस्टर बन जाता है।

सुना है कि ये राजस्थान के किसी गैंगस्टर की सच्ची कहानी है?

ऐसा कुछ नहीं हैं दरअसल ऐसे बहुत सारे किरदार आपके आसपास से गुजरते हैं या आपको उनके बारे में पता चलता है तो उनसे प्रेरित हो आप एक कहानी का ताना बाना बुनते हैं। मुझे भी ये कन्टेन्ट बहुत अच्छा लगा इसलिये मुझे इस कन्टेंट पर फिल्म बनाने का आइडिया जो मेरे प्रोड्यूसर को भी पसंद था। लेकिन ये पूरी तरह से एक काल्पनिक कथा है ।

लेकिन जैसा कि आपने कहा कि ये कन्टेन्ट आपको राजस्थान में मिला?

मुझे राजस्थान से मिला लेकिन बाद में ऐसी ही एक कहानी यूपी में भी दिखाई दी, एम पी में पता लगा। दरअसल अंडरवर्ल्ड का स्वरूप एक ही होता हैं बस भाषा बदलती है वरना हर जगह का गैंगस्टर वही करता है जो दूसरे करते हैं। मेरी फिल्म का बैकग्राउंड राजस्थान है।

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फिल्म का टाइटल ‘धारा 302’ रखने की कोई खास वजह ?

दरअसल ये शीर्षक हमारी फिल्म की कहानी को बहुत ज्यादा सूट कर रहा था। हालांकि पहले मुझे ये किसी भोजपुरी फिल्म का टाइटल लग रहा था। बाद में मैने काफी सोचा लेकिन जब लगा कि कहानी पर यही टाइटल फिट बैठता है। तो मैंने इसे ही रखा।

फिल्म के मुख्य कलाकार कौन हैं ?

फिल्म के हीरो वीर सिंह के किरदार में रूफी खान हैं उसने बेहतरीन काम किया है। रूफी बहुत अच्छा फाइटर है। फिल्म में उनके फाइटिंग सीन कमाल के हैं। दीप्ती धोत्रे इससे पहले भी मेरे साथ काम कर चुकी हैं। उसने फिल्म में बहुत ही अच्छी एक्टिंग की है। इनके अलावा एनएसडी से पास आउट और अभिनेत्री प्रतिमा कनन के पति एक अहम रोल निभा रहे हैं वे इससे पहले काफी सीरियल कर चुके हैं। इनके अलावा प्रदीप काबरा हैं, जो टीवी पर मॉडलिंग कर रहे हैं।


Mayapuri