INTERVIEW!! “मेघना गुलज़ार, एक खूबसूरत संवेदनशील हकीकत”

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मेघना यानि वो छलछलाती नदी जिसमें ख़ूबसूरती के साथ गहराई भी है और निर्मलता भी। जो हर उस वादी को हरियाली से भर देती है जहाँ से बह कर निकलती है। मेघना का अर्थ वो मेघ या बदली भी है जो जीवनदायिनी जल से भरपूर है और जब हम बात करते हैं मेघना गुलज़ार की, तो छलछलाती, निर्मल परंतु गहरी नदी और जल भरी बदली का एक मिला जुला जीता जागता रूप देखने को मिलता है। जैसे कि सबको पता है कि मेघना एकलौती बेटी हैं विश्वविख्यात कवि, शायर, लेखक, गीतकार और फ़िल्मकार गुलज़ार साहब तथा अपने समय की बेहद खूबसूरत और बेहतरीन सुपर स्टार अदाकारा राखी गुलज़ार की। जब बातें होती हैं तो कुछ खट्टी, कुछ मीठी, कुछ हल्की फुल्की, कुछ गहरी बातें होती हैं, बातों ही बातों में, पढ़िये, मजा आएगा

“पापा गुलज़ार की वो कौन सी सीख है जिसे आप कभी नहीं भूलतीं ?”

“पापा ने मुझे सादगी की वो सीख दी है जो खुद उनके व्यक्तित्व में पूरी तरह से झलकती है, उनके कर्मों में झलकती है, उनके जीवन में झलकती है। वे थोड़े में, संक्षेप में जीवन की सच्चाई बयां कर देते हैं जो बहुत गहरी होती है। मुझे उनकी अभिव्यक्ति और सोच की नज़ाकत बेहद प्रिय है।”

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“क्या आपके पापा बतौर फिल्मकार भी आपको प्रेरित करते हैं ?”

“बिल्कुल, उनसे मैंने यह प्रेरणा पायी है कि पैसे कमाना भले ही फ़िल्म मेकिंग का एक अहम हिस्सा हो लेकिन उससे भी अहम बात यह है कि फ़िल्म अपने दर्शकों पर एक यादगार असर छोड़े।”

“आपने बिलकुल सही कहा और आपकी हर फ़िल्म आपके पापा की इस सीख पर खरी उतरती है, जैसे आपकी हाल की फ़िल्म “तलवार” जो दर्शकों के लिए एक यादगार फ़िल्म बन गयी है, आपको उस फ़िल्म को बनाते वक्त कैसा महसूस हुआ था ?”

“उस फ़िल्म पर काम करते वक्त मुझे हर मोड़ पर चैलेंजिंग, मोटिवेटिंग और लिब्रेटिंग एहसास हुआ, फ़िल्म के लेखक, निर्माता, संगीत कम्पोज़र विशाल भारद्वाज जी के मेरे प्रति विश्वास पर खरा उतरना मेरे लिये एक चुनौती थी जिसे मैंने दिल से निभाया।”

“आपने अपने करियर की शुरुआत एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में की थी, आपने कई सारी कवितायें भी रची और आपने फिल्में भी बनायीं, इन सबमें आपको सब से ज्यादा संतोष किसमें महसूस हुआ ?”

“जाहिर सी बात है कि फिल्में डायरेक्ट करके। क्योंकि फिल्ममेकिंग में वो सबकुछ समाया हुआ है जो मैं अलग अलग करती रही हूँ, यानि फ़िल्म की कहानी, पटकथा डिवेलप करते हुए लेखन का सुख मिल जाता है, गीतों में कविताओं का आनंद लिया जा सकता है और फ़िल्म की कहानी में अगर यथार्थ की गुंजाईश हो तब तो वो शोध का विषय बनकर पत्रकारिता की जिज्ञासाओं को पूर्ण करती हैं।

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“बतौर लेखिका और कवयित्री आपको पापा की कौन सी बात प्रेरित करती है ?”

“पापा भाषा की शुद्धता पर बहुत जोर देते हैं, आज के समय में जब लोग सोचते भी हैं तो अंग्रेजी में और जब हिंदी में कुछ व्यक्त करना होता है तो सही शब्द ढूंढे पर भी नहीं मिलता है, ऐसे में भाषा की शुद्धता एक संघर्ष की तरह लगती है। पापा ने मुझे शुरू से ही हिदायत दी कि मैं अपने बेटे को शुद्ध भाषा (हिंदी की) सिखाऊँ जैसे पापा ने मुझे सिखायी थी। अब मैं भी इस प्रयास में हूँ कि मेरा बेटा ‘समय’ फर्राटेदार शुद्ध हिंदी बोल सके।”

“आपके माता पिता के साथ आपका रिश्ता कितना गहरा है ?”

माँ और मेरे पिता दोनों के साथ मेरा हमेशा गहरा रिश्ता रहा है। मैंने अपना बचपन एक आम हैप्पी बच्चे की तरह जिया। माँ, पापा अपनी प्रोफेशनल जिंदगी में जो थे वो थे लेकिन घर में वे सिर्फ मेरे माता पिता थे, दोनों ने अलग अलग रहने के बावजूद एक साथ मेरी परवरिश बहुत अच्छी तरह से की।

“आपने अपनी माँ, राखी जी की कौन सी विशेषता हासिल की ?”

“मेरी माँ हमेशा बिना लाग लपेट के खरी खरी बोलती हैं, उन्हें कूटनीति नहीं आती है, मेरा भी यही स्वभाव है।”

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“आपके स्वभाव का कोई और रुख जो लोगों को पता नहीं ?”

“मुझमें मजाक मस्ती ह्यूमर भी काफी है, जो मेरे करीबी लोगों को ही पता है।”

“आप किन फ़िल्मों से प्रभावित हुईं ?”

“बहुत सारी हैं, किस किस का नाम लूँ ?”

“इस फ़िल्म इंडस्ट्री में कोई एक ऐसा कलाकार जिसे आप डायरेक्ट करना चाहती हैं ?”

“ऐसे तो कई एक्टर हैं पर मेरी विशेष चाह है कि मैं अपनी माँ राखी जी को डायरेक्ट करूँ किसी फ़िल्म में।”

“बॉलीवुड की कौन सी बात आपको तकलीफ देती है ?”

“यही कि हमारी इस खूबसूरत हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री को बहुत से लोग बॉलीवुड कहते हैं, ना जाने क्यों ?”

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“आपके जीवन का सबसे अनमोल पल ?”

“वो पल जब मेरे बेटे ‘समय’ ने जन्म लिया, चौदह घंटे की लेबर पेन के बाद माँ बनने का एहसास बेहद सुखद था।”

“माँ बनकर आपमें क्या बदलाव आया ?”

“माँ बनकर मुझमें धीरज और निरंतर प्रयास करते रहने की शक्ति आई और हाँ, मैं अपनी माँ के और करीब आ गयी।”

“आगे किस विषय पर फ़िल्म बना रही हैं ?”

“अगली फ़िल्म की तैयारी चल रही है जो आई सी 814 हाईजैकिंग पर आधारित है।”


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Mayapuri

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