INTERVIEW: “प्लीज मुझे  एक स्टार -किड  की हैसियत से ना देखें” – हर्षवर्धन कपूर

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लिपिका वर्मा 

हर्षवर्धन कपूर अपनी डेब्यू फिल्म,”मिर्जिया” से ख़ासा उत्साहित है। अनिल कपूर के सुपुत्र होने के नाते उनका यह मानना है कि – जनता फिल्म देखने के बाद यदि उन्हें पसन्द करती है तो बहुत ही अच्छी बात होगी। किन्तु वह जनता से यह भी अनुरोध करना चाहते  है कि -प्लीज मुझे  एक स्टार -किड  की हैसियत से ना देखें। बेशक वह अनिल कपूर के बेटे है किन्तु फिल्म वह अपने ही हिसाब से चुनते  है और लोगों को यह हक़ भी देना चाहते  है कि – लोग उनके काम से उन्हें पसन्द या ना पसन्द करें।  पेश है हर्षवर्धन के साथ लिपिका  वर्मा की एक भेंटवार्ता –

क्या आपकी फिल्म, मिर्जिया” देखने के बाद लोगों ने आपके (स्क्रीन) व्यक्तित्व की तारीफ की है?

 देखिये, अभी तक तो फिल्म रिलीज़ नही हुई है सो मैं कुछ भी नहीं कह सकता हूँ। लेकिन हमेशा से राकेश ओम प्रकाश मेहरा जी ने मेरी आँखों एवं व्यक्तित्व की तारीफ ही की है। उनका यह विश्वास है कि – मुझमें कोई तो ऐसी बात है जो स्क्रीन पर लोगों को भायेगी। बाकि तो समय ही बतलायेगा। जब पहली दफा उन्होंने मुझे देखा तब मेरी बहन सोनम से पूछा भी था – क्या हर्ष फिल्म अभिनय में रूचि रखता है। तब सोनम ने यही  कहा, ‘अभिनय तो हमारे सबके  खून में है।”mirzya_

आपकी पहली फिल्म ,”मिर्जिया” रिलीज़  पर  है सो आपको किस बात का डर  लगता है?

बस ऑडियंस से यही  अनुरोध करना चाहूँगा  कि – प्लीज मेरी फिल्म एवं मेरा काम एक खुले दिमाग से देखें। मेरे काम को मेरे पापा अनिल  कपूर से  जोड़कर न देखें। फिल्म देख कर मेरी  सही मायने में तारीफ या आलोचना किजिये, क्योंकि मैं  अनिल कपूर का पुत्र हूँ सो बिना वजह मेरी टांग मत खींचना।

फिल्म “मिर्जिया” में दो किरदार निभा रहे है, कितनी मेहनत करनी पड़ी ?

इस फिल्म के किरदार के लिए मैंने लगभग दो वर्ष कड़ी मेहनत  की है। रोज़ सुबह जुहू व्यायाम करने जाता। अँधेरी में मेरा जिम है सो मुझे वाह भी जाना होता था। और घुड़सावरी भी करनी होती थी जो आसान काम नहीं है। उसके बाद मुझे मोटर बाइक पर भी ट्रेनिंग  करनी थी सो मैं काफी मर्तबा नीचे  गिर कर सम्भला  भी हूँ। ढेर सारी चोट भी लगी है मुझे, यहाँ तक कि अपना नाश्ता भी कार में ही ले लिया  करता था। मेरी गर्दन पर कई दफा चोट भी लगी है। शरीर के लगभग हर हिस्से में खरोंच आयी है। सच पूछो तो-इस फिल्म के किरदार के लिए  मैंने अपनी लाइफ दाँव पर लगा दी थी। mirzya_interview

आप की स्ट्रगल को  अपने पिताजी से कितना अलग मानते है ?

 देखिये, मेरे पिताजी चेम्बूर से पैदल चल कर  आया करते थे। सीधी  सी बात है उन्हें पैसों की तंगी थी। सो उनके लिए काम पाना अपने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने हेतु ही था, पैसे कमाने की मंशा से वह संलग्न हो- काम ढूंढने जाया करते। ठीक उनकी स्थिति से विपरीत मुझे विलासिता की कमी नहीं है। मेरे अंदर जग को मुट्ठी में करने की एक अद्भुत गुदगुदी थी। मुझे हमेशा से कुछ ऐसा करने का विचार होता जिस से मैं लोगों की नजर में कुछ अलग साबित कर सकूँ। मेरी टीम के सदस्य मुझे यह भी कहते है -कि आप केवल एक ही फिल्म क्यों करते है ? पर मैं जब तक अपनी एक फिल्म को अपना बेस्ट न दे पाऊँ  तो बहुत उदास फील करता हूँ। इस लिए “मिर्जिया” के बाद मैंने, “भावेश” नामक फिल्म साईन की है।

मिर्जिया” म्यूजिक रिलीज़ के दौरान अनिल ने कहा था कि-मेरा बेटा मेरी बात नहीं सुनता है। .. वह क्या बात है हमे बतलायेंगे आप  ?

 जी हाँ मैं अपनी मर्जी से अपने काम का चयन करता हूँ। उनकी एक भी नहीं सुनता हूँ इस मामले में। दरअसल, में काफी सालों  से मैं यही  उधेड़ -बुन में लगा   था कि – निर्देशन  की बाग डोर सम्भालूँ या फिर अभिनय में अपना हाथ  आजमाऊँ ? पापा  अनिल कपूर ने कमर्शियल फिल्म्स की है और उनकी फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिज़नेस किया है। किन्तु मेरी संवेदनाएं और सोचने का नजरिया भी अलग है। इन्टेंस रोल करना मुझे पसन्द है। harshvardhan

सक्सेस (सफलता) और फेलियर (असफल) को आप कैसे देखते है?

 हालाँकि मैंने अपना काम अभी ही शुरू किया है। लेकिन मुझे यह मालूम है कि- सक्सेस (सफलता) को मैं कभी अपने सर के भीतर नहीं जाने दूँगा और फेलियर (असफलता) से मैं कभी  विचलित नहीं होने वाला हूँ। दरअसल, में जब कभी फेलियर का सामना  होता है, तो मेरे अंदर यही  विचार आता  है – दुगनी मेहनत और हार्ड वर्क करूँगा – ताकि फेलियर (असफलता) को मात दे सकूँ।


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Mayapuri

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