‘‘मैंने तो आज तक एक्टिंग नहीं सीखी’’ -नुपुर शर्मा

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सिनेमा में आए बदलाव के बाद विविधतापूर्ण सिनेमा बनने लगा है.इसी केे साथ अब छोटेे शहरों में पलने वाली प्रतिभाएं अपनी किस्मत आजमाने के लिए बालीवुड की तरफ रूख करने लगी है.ऐसी ही प्रतिभाओं में से एक हैं अजय चंडोक निर्देशित फिल्म ‘‘हे ब्रो’’ की हीरोईन नुपुर शर्मा. रिलीज के लिए तैयार इस फिल्म में नुपर शर्मा के साथ मशहूर नृत्य निर्देशक गणेश आचार्य व मनिंदर सिंह ने मुख्य भूमिका निभायी है.

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अपनी अब तक की यात्रा के बारे में बताएं?
-मैं जयपुर राजस्थान की मिडल क्लास परिवार से हॅूं. मेरी स्कूली शिक्षा सेंट एडमेंट स्कूल, जयपुर में हुई है. स्कूल की पढ़ाई खत्म होते ही 2008 में मैं ‘मिस इंडिया’ में हिस्सा लेने पहुॅच गयी थी. उसके बाद मैं वापस जयपुर गयी. मैंने अपनी कालेज की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई पूरी करने के बाद 2013 में मैं अभिनय के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के लिए मुंबई आयी. ‘हे ब्रो’मेरी पहली फिल्म है. मगर इससे पहले मैंने 2008 में ‘‘मिस इंडिया’’ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था. उस वक्त मुझे ‘मिस इंडिया टैलेंटेड’’अवार्ड मिला था. तभी मेरे दिमाग में अभिनय का कीड़ा कुल बुलाया था.


जब आपने फिल्म अभिनेत्री बनने का निर्णय लिया, तब आपके माता पिता की पहली प्रतिक्रिया क्या थी?  
-मेरे पिता आई सी आई सी आई बैंक में नौकरी करते थे. अब वह रिटायर हो चुके हैं. मॉं भी एक क्षेत्रीय बैंक में नौकरी करती हैं. हम उस परिवार से हैं, जिनके बड़े बड़े सपने नहीं होते हैं. जो बहुत ज्यादा उंची बातें नहीं सोचते हैं. जिंदगी बहुत शांति से गुजारते हैं. इस वजह से मुझे अपने मम्मी पापा को समझाने में बहुत तकलीफ हुई कि मुझे मेरा यह सपना पूरा करना है. एक तो ब्राम्हण परिवार से हूँ और हम राजस्थानी ब्राम्हण काफी कल्चर्ड लोग हैं. मुझको लेकर जरुरत से ज्यादा प्रोटेक्टिब है.पर वह समझ गए और अब उनका सपना है कि मैं अभिनेत्री के तौर पर सफल हो जाउं. अब मेरा सपना उनका सपना बन चुका है.

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पहली फिल्म‘‘हे ब्रो’’पाने से पहले कितना संघर्ष करना पड़ा?
-काफी संघर्ष किया. पूरे एक साल के संघर्ष के बाद मुझे पहली फिल्म मिली. मगर पहली फिल्म की कहानी अपने आप में फिल्मी कहानी जैसा ही है. मुझे टीवीएस स्कूटी की विज्ञापन फिल्म के लिए आॅडीशन देने जाना था. पर सुबह से मेरी तबियत ठीक नहीं थी, तो मैं नहीं जाना चाहती थी. मेरी मॉं ने कहा कि आपकी मर्जी. पर में गयी और वहां पर मेरा सेलेक्शन भी हो गया. उस कास्टिंग एजंसी के पास मेरी एक पुरानी फोटो थी, जिसे देखकर गणेश आचार्य जी ने मुझे मिलने के लिए बुलाया. मैं आॅडीशन देने गयी. मैं लेट हो गयी थी. मैं सीधे वहां पहुंची और आॅडीशन देने के लिए स्क्रिप्ट मॉंगी. मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी और आॅडीशन दिया. उसके बाद जब मैं वापस आकर बैठी, तो देखा कि सामने गणेश आचार्य सर बैठे हुए हैं. मैंने उनसे माफी मॉंगी कि मैं आॅडीशन के लिए लेट हो जाने की वजह से उसी में खोयी हुई थी और उन्हे देख नहीं पायी. गणेश सर ने कहा कि कोई बात नही. बाद में उन्होने मुझसे डांस करने के लिए कहा, जिसकी कोरियोग्राफी उन्होंने खुद की. फिर मैं घर आ गयी उसी दिन शाम को गणेश जी का फोन आया कि,‘मैं गणेश बोल रहा हूं. ’मैंने उनसे कहा-‘‘कौन गणेश? मैंने आपको पहचाना नहीं?.’ तो उन्होंने कहा कि, ‘मैं गणेश आचार्य बोल रहा हूं.’ उनकी बात सुनकर मुझे हंसी आ गयी. मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह फोन करेंगे. गणेश सर ने फोन पर ही कहा कि, ‘‘मैं दिन में सिर्फ तुम्हें आब्जर्व कर रहा था. मुझे मेरी फिल्म के लिए तुम्हारी जैसी ही लड़की चाहिए थी.’ दूसरे दिन मैं उनसे मिलने गयी और मुझे यह फिल्म मिल गयी.
इस फिल्म में आपने किस तरह का किरदार निभाया है?
-मैंने इस फिल्म में मुंबई में रहने वाली एक लड़की अंजली का किरदार निभाया है, जो कि जिद्दी है. वह जो कुछ पाना चाहती है, उसे पाकर ही रहती है. वह किसी बात को इग्नोर नहीं करती. बहुत के्रजी है. एक घमंडी पुलिस आॅफिसर(मनिंदर सिंह) के पीछे पड़ी हुई है. उसे हर हाल में पाना चाहती है. अंजली स्ट्रोंग है. दिल की साफ व अच्छी लड़की है. अंजली की प्यार की गाड़ी आगे बढ़ती उससे पहले ही एक दिन इस पुलिस अफसर का जुड़वा भाई (गणेश आचार्य) उसे खोजता हुआ पहुॅच गया. उसके बाद कहानी काफी रोचक मोड लेती है.
जब आपको पता चला कि इस फिल्म में आपके साथ गणेश आचार्य भी अभिनय कर रहे हैं. तो आपके दिमाग में क्या आया?
-मेरे दिमाग में आया कि यह इंसान पूरी जिंदगी डांस के माध्यम से इमोशन पेश करता आया हैं,तो स्वाभाविक तौर पर कमाल के अभिनेता होंगे. मुझे लगा कि मुझे इनसे डांस सीखने को मिलेगा और मैं इनसे अभिनय करते समय किस तरह से चेहरे पर भाव लाए जाते हैं, वह सब सीख सकॅूंगी.

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फिल्म के प्रोमो रिलीज हो चुके हैं लोग क्या कह रहे हैं?
-सभी उत्साहित हैं. मम्मी पापा तो बहुत ही ज्यादा उत्साहित हैं. सभी को मेरी फिल्म के रिलीज का इंतजार है. फेसबुक पर मेरे सारे दोस्ती मेरी फिल्म की पब्लिसिटी करने में लगे हुए हैं.
आपने प्रोफेशनल नाटकों में अभिनय किया है?
-हां! मैंने पृथ्वी थिएटर पर 6 मई 2014 को पहली बार एक हास्य नाटक ‘‘माई वाइफ्स हसबैंड’’ में  अभिनय किया था. और 9 मई 2014 को मेरी फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी.इसके अलावा मैंने कत्थक डांस सीख रखा है.
कत्थक डांस सीखने की क्या वजह थी?
-डांस में क्लासिकल डांस बहुत महत्वपूर्ण फार्म होता हैं. शास्त्रीय नृत्य सीखने के साथ ही आपका शरीर फ्लैक्सिबल हो जाता है. आपके शरीर में गे्रस आ जाता है. कत्थक बहुत ही अनुशासन वाला फार्म है. इसको सीखने से शरीर में भी अनुशासन आ जाता है.जिंदगी में भी अनुशासन आ जाता है.
कहा जाता हैं कि स्टार सन या स्टार बेटीयों के मुकाबले गैर फिल्मी माहौल से आयी लोगों के साथ अलग तरह से ब्यवहार किया जाता है?
-वास्तव में इस तरह का फर्क होता है. मुझे तो कोई बताने वाला नहीं था. मुझे किसी ने नही बताया कि मुझे कहां आॅडीशन देने जाना चाहिए. किस तरह से देना चाहिए. किस तरह लोगों से बातें करनी चाहिए. मैंने तो आज तक एक्टिंग नहीं सीखी. मुझे जरूरत भी नहीं पड़ी. मेरे साथ कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं था. पर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ इस तरह की समस्या नहीं आती.पर मैं लक्की हूं कि एक साल के अंदर ही मुझे फिल्म में अभिनय करने का मौका मिल गया. मुंबई पहुॅचने के दो साल के अंतराल में मेरी फिल्म ‘हे ब्रो’ रिलीज होने जा रही है.


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Mayapuri

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