INTERVIEW!! ‘‘लव स्टोरी तो कोई भी लिख लेता है’’ – लेखक निर्देशक विक्रम शंकर

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Parvin Dabas with Director Vikram Shanker

बेसिकली हरियाणा के फरीदाबाद से पढ़ाई लिखाई कंपलीट कर विक्रम फिल्मों में अपना करियर बनाने के लिये मुबंई आ गये और यहां उन्होंने अपनी शुरूआत टीवी से की। ढ़ेर सारे धारावाहिक करने के बाद उन्हें भूषण पटेल का एडी बनने का अवसर मिला। फिल्म ‘जब तुम कहो’ से विक्रम ने बतौर निर्देशक डेब्यू किया है। इस फिल्म को लेकर उनसे एक बातचीत।

अपने शुरूआती दौर के बारे में क्या कहना चाहेगें ?

जैसा कि मैंने बताया कि शुरू से ही फिल्मों में जाना था लिहाजा अपने गृह नगर फरीदाबाद में अपनी शिक्षा पूरी कर दो हजार छह में मैं मुबंई आ गया था। यहां शुरूआत हुई सीरियल्स में फर्स्ट सहायक से, उसके बाद सेकंड एडी, फिर एपिसोड डायरेक्टर बन गया। उस दौरान मुझे धारावाहिक शाबास इंडिया, में एपिसोड़ डायरेक्ट करने का अवसर मिला और बाद में सीरियल अलादीन में स्वतंत्र डायरेक्टर बना। महावीर हनुमान जैसे बिग शोज मिलाकर मैंने तकरीबन तीन सौ एपिसोड किये होंगे।

फिल्मों में कैसे आना हुआ ?

मैं भूषण पटेल को टीवी के दिनों से जानता था। उन दिनों भूषण पटेल विक्रम भट्ट की कंपनी के तहत फिल्म 1920 डायरेक्ट कर रहे थे लिहाजा टीवी से फिल्मों में आने के लिये मुझे एक बार फिर डायरेक्टर भूषण जी का सहायक बनना पड़ा। उनके साथ मेरी पहली फिल्म ‘1920’ ही थी।

Parvin Dabas with Director Vikram Shanker
Parvin Dabas with Director Vikram Shanker

इस फिल्म से कैसे जुड़ना हुआ ?

राजीव कुमार इससे पहले फिल्मों को सिर्फ फाइनेंस करते थे। मैं उन्हें किसी के थ्रू मिला था। वे अपना होम प्रोडक्शंस शुरू करने जा रहे थे। सबसे अहम बात कि मैं पहली मुलाकात में ही उनका मुरीद बन गया था क्योंकि वे काफी भले और सही बिजनिसमैन आदमी थे। उन्होंने मुझे कोई स्क्रिप्ट सुनाने के लिये कहा। मैंने उन्हें एक कहानी सुनाई जो उन्हें थोड़ा ओवर बजट लगी। बाद में उन्होंने अपना एक बजट बताया और उस पर कोई रोमांटिक लव स्टोरी बनाने की ख्वाईश जाहिर की।

ज्यादातर लव स्टोरी एक जैसी होती है ?

मेरा मानना है कि लव स्टोरी लिखना बहुत आसान है उसे कोई भी लिख लेता है और वे फिल्में बन भी जाती हैं, लेकिन उनके लिये मैंने जो स्टोरी चुनी वह कहीं न कहीं ट्रू स्टोरी थी। दरअसल मेरे एक दोस्त ने मुझे एक बार बताया था कि एक बार वो एक छोटे से शहर में अपनी गर्ल फ्रेंड के साथ गया था वहां उसके साथ क्या कुछ हुआ वो वाकई वह मेरे लिये एक नया तजुर्बा रहा। बाद में मैंने उसी लाइन को पकड़ा और जो कहानी निकल सामने आई उसमें प्यार में खता खाया एक ऐसा शख्स जो अब काफी धनवान है, लेकिन एक बार फिर उस पर प्यार की खुमारी छाने लगती है तो वो किसी के कहने पर कोलकाता जाता है, वहां उसे एक लड़की मिलती है। जिससे मिलने के बाद उसे जीवन में प्यार को लेकर दूसरी बार क्या अनुभव होता है फिल्म की मूल कहानी यही है।

कास्टिंग को लेकर क्या कहना है ?

दरअसल कहानी के अनुसार हमें लीड रोल के लिये एक ऐसा आर्टिस्ट चाहिये था जो पैंतीस चालीस के बीच का अधेड़ लगने वाला जाना पहचाना तथा उमदा एक्टर हो। कितनी चेहरे सामने आये अंत में परवीन डबास हर तरह से भूमिका के लिये फिट लगे। कहानी दिल्ली से कोलकाता जाती है इसलिये कहानी में वास्तविकता लाने के लिये पहले हमने राइमा सेन को साइन किया था लेकिन शेड्यूल के मुताबिक उससे हमारी डेट्स मैच नहीं हो पा रही थी। इसके बाद हमने कोलकाता में तीस चालीस लड़कियों के ऑडिशन किये और उनमें अंबालिका सरकार को सलैक्ट कर लिया। मूल रूप से अंबालिका एक मॉडल है उसे वहां होर्डिंग क्वीन कहा जाता है। सबसे बड़ी बात की उसकी भाषा में बंगालीपन था, इनके अलावा स्वच्छता गुहा वह लड़की है, जिससे परवीन ने पहले प्यार में धोखा खाया था। फिल्म में आपको वो छोटी छोटी बातें दिखाई और सुनाई देगीं जिन्हें अक्सर नजर अंदाज कर दिया जाता है वे सारी सिचुएशन दर्शकों को खूब गुदगुदायेगीं। फिल्म के संवादों में भी आम भाषा यूज की गई है।

Parvin Dabas with Director Vikram Shanker
Parvin Dabas with Director Vikram Shanker

फिल्म की यूएसपी क्या होगी ?

फिल्म की यूएसपी है इसका संगीत। यहां एक संगीतकार अनुज गर्ग हैं जिन्होंने साहेब बीवी और गैंगस्टर में म्यूजिक दिया है। इसके अलावा शंकर महादेवन की टीम से निशाद ने भी एक दो गाने कंपोज किये हैं, एक क्लब सांग है फिल्म में इन सिंगर्स ने गाया है जैसे शंकर महादेवन, मोहित चौहान, पलक मुच्छल तथा प्रीत हरपाल आदि।


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Mayapuri

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