INTERVIEW!! ‘‘मैं दूसरों की राह में टाँग नहीं अड़ाती.. ’’ कंगना रनोट

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फिल्म ‘क्वीन’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली अदाकारा कंगना रनोट बार बार साबित करती जा रही हैं कि अभिनय में उनका कोई सानी नहीं है। दो दो राष्ट्रीय पुरस्कार पाने के बाद भी वह खुद को जमीन पर ही मानती हैं, तभी तो जब इमरान खान की लगातार तीन फिल्मों की असफलता के बाद निखिल अडवाणी निर्देशित फिल्म ‘कट्टी बट्टी’ में कई अभिनेत्रियों ने काम करने से इंकार कर दिया था, तब कंगना ने इस फिल्म में काम करना स्वीकार कर लिया था। फिल्म ‘कट्टी बट्टी’ देखकर आमिर खान ने कंगना की परफार्मेंस की जमकर तारीफ करते हुए यहां तक कह डाला कि इस फिल्म को देखते हुए वह अपनी आँखों के आँसू नहीं रोक पाए। मजेदार बात यह है कि आमिर खान ने लोगों के सामने उजागर किया है कि इस फिल्म की शूटिंग करते हुए हर रात कंगना रोती थी। जब कंगना रनोट से हमारी एक्सक्लूसिव बात हुई, तो कंगना ने स्वीकार किया कि ‘कट्टी बट्टी’ से पहले उन्होंने इतना अधिक संजीदा किरदार किसी अन्य फिल्म में नहीं निभाया।

फिल्म ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ की अपार सफलता से तो आप काफी खुश हुई होंगी?

जी हाँ! इस फिल्म को बहुत अच्छा रिस्पांस मिला, मुझे भी खुशी हुई, पूरी फिल्म इंडस्ट्री ने मेरी परफार्मेंस की तारीफ की। दत्तो का किरदार सभी को पसंद आया। फिल्म ‘क्वीन’ के समय तो मेरे मोबाइल फोन की घंटी बजना बंद ही नहीं हो रही थी, पर दत्तो के बाद तो लोगों को मेरा फोन सिर्फ व्यस्त मिल रहा था, इतने फोन आ रहे थे।

तो आप मानती हैं कि दत्तो के किरदार के लिए आपने जो मेहनत की थी, वह सफल रही?

मेरा हमेशा से मानना रहा है कि मेहनत कभी जाया नहीं जाती। मैंने दत्तो के किरदार के लिए उसकी बॉडी लैंग्वेज, उसकी हरियाणवी भाषा के लहजे आदि पर बहुत काम किया था। मुझे उम्मीद है कि लोगों को मेरी अगली फिल्म ‘कट्टी बट्टी’ इससे भी अधिक पसंद आएगी।

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इस फिल्म की रिलीज के बाद आपको जब हिमाचल प्रदेश की सरकार ने सम्मानित किया, तो आपको गर्व महसूस हुआ होगा?

मैं हिमाचल प्रदेश की बेटी हूं, जब वहां के मुख्यमंत्री ने मुझे सम्मानित किया, तो यह मेरे लिए अपनी मातृभूमि में सम्मान मिलने जैसा रहा। इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है, यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात रही।

फिल्म ‘कट्टी बट्टी’ किस तरह की फिल्म हैं?

जैसा कि लोग सोच रहे हैं कि यह रॉम कॉम वाली फिल्म है, वैसी नहीं है। यह एक अति संजीदा किस्म की फिल्म है, इस फिल्म में मेरा पायल का किरदार एक रोमांचक तरीके से खुलता है। फिल्म में जो लड़का है, उसकी जिंदगी से पायल अचानक गायब हो गयी है। अब वह उसे कुछ क्लू के सहारे ढूंढ़ते हुए उस लड़की तक पहुंचता है। जब वह उस लड़की से मिलता है तो यह राज उजागर होता है कि आखिर पायल है कौन ? यही हमारी फिल्म का क्लाईमैक्स है, जो मैं बता नहीं सकती। मेरे लिए यह पहला मौका है, जब मैं अपने किरदार को लेकर खुलकर बात नहीं कर सकती। फिल्म देखते समय कभी आपको बहुत सहज लगेगी, कभी साधारण, कभी आसाधारण। कई बार लगेगा कि आप इस लड़की को समझ नहीं सकते. तो इस फिल्म में पायल के कई तरह के व्यक्तित्व नजर आते हैं. इसे फिल्म में देखने का ही मजा होगा।

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फिल्म के निर्देशक निखिल अडवाणी और फिल्म के हीरो इमरान खान से जो मेरी बातचीत हुई है, उससे यह बात उभरी कि फिल्म में लड़के व लड़की के बीच छह सात साल का रिश्ता है। इसे आप ‘लिव इन रिलेशनशिप’ मानेंगी ? या क्या कहेंगी?

इसे ‘लिव इन रिलेशनशिप कदापि’ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि हमारी फिल्म की कहानी वहां शुरू होती है, जब दोनों साथ में नहीं होते हैं। लड़के को कहीं याद आता है कि उस दिन उसने मुझसे ऐसा कहा था, फिर उसी क्लू को पकड़कर उसके पीछे भागता है। इसलिए मैं कह सकती हूं कि यह फिल्म ‘लिव इन रिलेशनशिप’ के बारे में नही है।

तो फिर इस फिल्म में किस तरह के रिश्ते का चित्रण है?

जी हां! यह फिल्म एक ऐसे रिश्ते की बात करती है, जहां हम हर चीज अपने आप पर थोपते हैं, फिर चाहें वह पति पत्नी का रिश्ता हो, प्रेमी प्रेमिका का रिश्ता हो, माता पिता का रिश्ता हो. हर रिश्ते में हम हर बात सिर्फ अपने नजरिए से सोचते हैं। सामने वाले के नजरिए पर हम कभी सोचते नहीं हैं, इसी वजह से सारी चीजें हम अपने हिसाब से तय कर लेते हैं। हमारी यह फिल्म इस बात को रेखांकित करती है कि हर रिश्ते में यदि हम दूसरों के नजरिए पर या दूसरों के हिसाब से सोचें, तो हमारा एक्शन कुछ अलग हो सकता है, यह एक मकसदपूर्ण कहानी है। हम अक्सर खुद सोच लेते हैं कि सामने वाला ऐसा होगा, वह ऐसा कर सकता है। पर हम उसके हिसाब से कभी सोचते नहीं, यानि कि हम कई बार एक नजरिया बना लेते हैं कि सामने वाला मुझे अच्छा नहीं समझता है या कुछ और जो कि गलत है।

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इमरान खान की कई फिल्में फ्लॉप हो जाने के कारण कुछ अभिनेत्रियों ने उनके साथ इस फिल्म को करने से मना कर दिया था. पर आपने क्या सोचकर यह फिल्म स्वीकार की?

मेरी भी फिल्में फ्लॉप हुई हैं, हर कलाकार की कोई न कोई फिल्म फ्लॉप होती है। जब मैंने करियर शुरू किया था, उस वक्त कई लोगों ने मेरे साथ काम करने से इंकार किया था। मैं हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव से आकर मुंबई में स्ट्रगल कर रही थी। ऐसे समय में बड़ी मुश्किल से तो कोई फिल्म मिलती है, उस पर यदि कोई आपके साथ काम करने से मना कर दे, तो तकलीफ होती है। पर आज जब वह सफल हो गयी है, तो उसी के पास आप एक नहीं बल्कि दस स्क्रिप्ट भेज रहे हैं, यह सब क्या है ? अब आप बार बार मुझे फोन कर रहे हैं कि मैं उनकी फिल्म कर लूं, तो यहां लोगों की याददाश्त बड़ी कमजोर है। आप यह नहीं कह सकते कि दो माह बाद क्या होगा ? संघर्ष के ही दौरान मैंने तय कर लिया था कि मैं कभी भी अपनी छोटी सोच की वजह से इस तरह के निर्णय नहीं लूँगी। मैं तो किसी भी डिजायनर को इंकार नहीं करती मेरी राय में यदि कोई नयी प्रतिभा आ रही है, उसका रास्ता बन रहा है, तो बनने दो फिर चाहे वह कास्ट्यूम डिजायनर हो, कलाकार हो, निर्देशक हो या कोई अन्य, हम क्यों किसी के रास्ते में टाँग अड़ाकर खड़े हो जाएं। मैंने ‘कट्टी बट्टी’ की स्क्रिप्ट सुनी, पसंद आयी तो कर ली, फिर इमरान खान हों या कोई अन्य कलाकार।

कलाकार के तौर पर इमरान खान कैसे लगे?

उनमें एक तरह से स्पॉटेनियटी रहती है, वह हर सीन को बहुत हल्के से लेते हैं। इससे सीन में बहुत अलग सा प्रभाव निकल कर आता है। फिल्म में उनका किरदार एक ऐसे लड़के का है, जो कि बहुत सीधा है, अच्छे घर से है, संस्कारी है, फिल्म में इमरान एकदम किरदार में फिट बैठे हैं।

बतौर निर्देशक निखिल अडवाणी के साथ आपकी यह पहली फिल्म है. क्या अनुभव रहे ?

बहुत अच्छे अनुभव रहे, उनके साथ काम करना आसान रहा। वह बहुत ही ज्यादा खुले दिमाग के इंसान व प्रतिभाशाली निर्देशक हैं। वह कलाकार की हर बात को तवज्जो देते हैं, जो हॅंसमुख स्वभाव के हैं।

Kangna Ranaut Looking Front In White Top

‘कट्टी बट्टी’ देखने के बाद आमिर खान की आंखों में आँसू आ गए, ऐसा उनका दावा है, आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है ?

जी हाँ! आमिर खान ने ‘कट्टी बट्टी’ देखी है, फिल्म देखने के बाद उन्हे रोना आ गया, क्योंकि यह बहुत ही ज्यादा इमोशनल फिल्म है, हर दर्षक को रोना आएगा.

इसके बाद कोई दूसरी फिल्म?

विशाल भारद्वाज के साथ ‘रंगून’ कर रही हूं, जिसमें मैं एक अदाकारा का किरदार निभा रही हूं। केतन मेहता के साथ फिल्म ‘झांसी की रानी लक्ष्मीबाई’ करने वाली हूं, फिर हंसल मेहता की फिल्म ‘सिमरन’ करने वाली हूँ। फिलहाल सारा ध्यान ‘रंगून’ पर है, इसकी शूटिंग खत्म करने के बाद ‘झांसी की रानी लक्ष्मीबाई’ के लिए तैयारी शुरु करुँगी।


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Mayapuri

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