‘भूतियागिरी’ एक हिलेरियस कॉमेडी फिल्म हैं लेकिन करन्ट इशूज पर भी बात करती है’’ – करण कल्लूर

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करण कल्लूर को बचपन से ही स्टार्स की भावांगिमाओं से कुछ ज्यादा ही लगाव था, किसी भी स्टार्स के पीछे उनके प्रशंसकों की उन्मादी भीड़ का क्रेज, उनका ऑटोग्राफ देना, मीडिया का उनके बारे में बखान करना। उन दिनों वह भी अपने आपको उनकी जगह देखे जाने की कल्पना किया करता था। करण वैसे तो साउथ इंडियन हैं लेकिन उसके पेरेन्टस पूना आकर रहने लगे थे। उसकी स्कूलिंग पंचगनी में कंपलीट हुई और ग्रेजुएशन कॉलेज से। बाद में उसने आई टी मैनेजमेन्ट कोर्स किया। लेकिन उस दौरान भी उसकी आंखों के सामने फिल्म स्टारों की आंखें चुंधिया देने वाली छवि घुमती रहती थी। लिहाजा उसने एक दिन एक्टर बनने का निर्णय ले लिया।

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पूना से मुबंई आने के बाद उसने पहले अनुपम खेर एक्टिंग स्कूल से एक्टिंग का डिप्लोमा लिया लेकिन उसे एक्टिंग स्कूल से कहीं ज्यादा अनुभव विभिन्न आफिसों में ऑडिशनों देते हुये हुआ। क्योंकि आडिशन के दौरान उसे अलग अलग तरह के दृश्यों में अभिनय करने का अवसर मिलता था। करण ने लगातार दो साल तक कड़ा संघर्ष किया लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो उस पर निराशा हावी होने लगी तो वो वापस पूना चला गया। लेकिन कुछ दिनों बाद उसने एक बार फिर स्ट्रगल शुरू कर दिया। इस बार वो कुछ कर गुजरना चाहता था। एक दिन उसे पता लगा कि एक प्रोडक्शन हाउस में उनकी नई फिल्म के लिये ऑडिशन चल रहे थे। ये प्रोडक्शन इससे पहले ‘लकीर का फकीर’ नामक फिल्म बना चुका था। उनकी दूसरी फिल्म का नाम था ‘भूतियागिरी’। जो एक हिलेरियस कॉमेडी थी। इस बार करण को फिल्म में लीड रोल के लिये सलैक्ट कर लिया गया।

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फिल्म का पहला शेड्यूल गोवा में होना तय हुआ। फिल्म में तकरीबन सभी न्यूकमर्स हैं। फिल्म के प्रोड्यूसर, राइटर और डायरेक्टर जुबैर खान हैं। करण का कहना है शूटिंग से पहले हमने करीब एक महीने तक वर्कशॉप की। वर्कशॉप का ये फायदा हुआ कि एक महीने बाद मैं पूरी तरह से अपने रोल को आत्मसात कर चुका था। यहीं से मुझे ये भी पता चला कि बैनर छोटा या बड़ा नहीं होता, फिल्म बड़ी होती है। दूसरे पहली फिल्म तो वैसे भी दिल के करीब होती है। इस एक फिल्म के बाद मैं कह सकता हूं कि फिल्म मेरे लिये एक पैशन है ।

अगर फिल्म की कथावस्तू के बारे में बात की जाये तो इसमें कई इशूज एक साथ उठाये गये हैं। जैसे कालेज स्टूडेंट्स का नशे की तरफ झुकाव, खासकर बड़े घरों के लड़के लड़कियों के लिये नशा स्टेट्स सिंबल बनता जा रहा है। इसके अलावा रेप जैसे सीरियस इशू की भी फिल्म में बात की गई है। इससे ज्यादा अभी फिल्म के बारे में बात नहीं की जा सकती । लेकिन इतना जरूर कहना चाहूंगा कि ये एक ऐसी हिलेरियस कॉमेडी हैं कि आप पेट पकड़ कर हंसने पर मजबूर हो जायेंगे ।

 


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Mayapuri

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