INTERVIEW!! किसी के बुरा मानने के चक्कर में मैं अपने दर्शकों के साथ तो ना इंसाफी नहीं कर सकता ना – मधुर भंडारकर

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कुछ लोग भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं। कुछ अपना मुकाम अलग बना लेते हैं। कुछ भीड़ के पीछे पीछे चलते हैं तो कुछ लोगों के पीछे हुजूम चलता है। हजारों फिल्में बॉलीवुड में हर साल बनती हैं। मगर चंद ऐसी होती हैं जो याद रहती हैं। चंद डायरेक्टर ऐसे होते हैं जिन्हें याद रखा जाता है। क्योंकि वो समाज को आइना दिखाने का हुनर रखते हैं। वो सच कहने की हिम्मत दिखाते है और वो फिल्में सिर्फ व्यवसाय समझ कर नहीं बनाते बल्कि समाज के प्रति अपना फर्ज समझ कर बनाते हैं। हरविन्द्र मांकड आज आपकी मुलाकात ऐसे व्यक्तित्व से कराने जा रहे हैं जो अपने आप में एक पहचान है। जो अपनी कहानी आम लोगों के बीच से चुनते हैं। जो खुद हर उस अहसास से गुजरे हैं जो वो अपनी फिल्मों में दिखाते है। ऐसे जांबाज़ डायरेक्टर हैं मधुर भंडारकर। ‘त्रिशक्ति’ से लेकर ‘कैलेंडर गर्ल्स’ तक का उनका सफर उन्होंने अपने सहज भाव से पाठकों के लिए साझा किया।

 मधुर जी, जब आप इस इंडस्ट्री में आये थे तो क्या सोचा था कि कैसी फिल्में बनायेंगे। जैसी सदियों से बनती आ रही थी या ऐसी जैसी आप बनाने लग गये?

हरविन्द्र जी, जब मुम्बई किसी को पहला कदम टिकाने का मौका देती है तो वो उससे एक वादा लेती है। वो वादा लेती है कि उसे इस नगरी का कर्ज चुकाना ही होगा। उसे ऐसी नायाब फिल्में बनानी ही होगी जो इतिहास बन जायें। मैंने भी जब मायानगरी को अपनी कर्मभूमि बनाया तो यही सोचा कि कुछ ऐसा करूंगा कि जिससे दर्शक व मैं खुद संतुष्ट हो जाऊं सो अपने आसपास देखा। दर्द, सिसकियां, तकलीफ और कराहते जज्बातों को जब मैंने फिल्म के पर्दे पर उतारा तो लगा यही है मेरी मंजिल ‘पेज 3 ‘ , ‘चांदनी बार ‘, ‘फैशन ‘, ‘ट्रैफिक सिग्नल’ या कोई कहानी देख लीजिए मैंने वही कहा है जो सच है और लोगों को जानना भी चाहिए।

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आप खुद इस फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं। क्या आपको डर नहीं लगता इसी में रह कर आप इन्ही के काले इतिहास को एक्सपोज़ करते हैं ?

अच्छा सवाल है, कई बार मेरे दोस्त, मेरे अपने मुझसे खफा भी हो जाते हैं। वो कहते हैं कि क्यों मैं इस दुनिया का काला सच सामने लाता हूं पर किसी के बुरा मानने के चक्कर में मैं अपने दर्शंको के साथ तो नाइंसाफी नहीं कर सकता ना। मेरी जवाबदेही समाज के साथ है। जो लोग मेरी फिल्म देखने आते हैं वो जानते हैं कि मधुर की फिल्म जैसी भी होगी, सच का आइना होगी। बेबाक होगी। बिन्दास होगी। सो उनकी उम्मीदों को पूरा करना मेरा पहला कर्तव्य है। रही बात किसी इंडस्ट्री के काले सच की तो आज समाज का हर वर्ग कहीं ना कहीं अपराध, सैक्स व भष्ट्राचार की दीमक से भर गया है। बस मेरी कोशिश यही है कि वो सब आप के सामने लाता रहूं।

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आज तक किसी ने ‘कैलेंडर गर्ल्स’ विषय चुना ही नहीं ? आप के दिमाग में यह कहां से आ गया?

सच बात है यह टॉपिक पहली बार फिल्म के पर्दे पर आ रहा है। दरअसल हम हर साल देखते तो थे कि फलां लड़की कैलेंडर गर्ल बनी है फलां ने कैलेंडर पर अदा दिखाई है पर बाद में वो जाने कहां गुम हो जाती है। बस जिस तरह हर साल हम पुराने कैलेंडर को रद्दी मे फेंक देते हैं, उसी तरह वो लड़कियां गुमनामी के अंधकार में गुम हो जाती हैं। मैंने उन्हीं लड़कियों के जीवन के दर्द, तकलीफ और संघर्ष को दिखाने की कोशिश की है। यह अपने आप में एक ऐसा विषय है जो आपको हिला कर रख देगा और आप सोचने पर मजबूर हो जायेंगे।

अकांक्षा पुरी, अवनि मोदी, कायरा, रूही सिंह और सत्यरूपा में ऐसा क्या था जो इन्हें कैलेंडर गर्ल्स का रोल निभाने का मौका मिला ?

सभी टेलेन्टिड हैं। डेडिकेटिड हैं। काम करने की लगन है। हजारों लड़कियों मे से चुनकर रोल पाया था इन्होंने और खूब अच्छी तरह अपने किरदार को निभाया। जब सीखने की लगन हो तो निखार आ ही जाता है। यही चमक यही निखार फिल्म में नजर भी आता है। एक दम फ्रेश टेलेन्ट जब अपनी महक बिखेरता है तो देखने वालों के दिलों दिमाग पर छा जाता है। आप देखियेगा कैलेंडर गर्ल्स भी आपके दिलों मे ऐसी जगह बनायेंगी कि आप खुश हो जायेंगे।

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आपको क्या लगता है कि संगीत का आपकी फिल्म में कितना योगदान है ?

बहुत खास, इसके सभी गीत ब्लॉकबस्टर हिट हो ही चुके हैं। यूथ की पहली पसंद बन चुके है और देखना समय के साथ और अधिक जलवा बिखेरते जायेंगे।

आपकी हर फिल्म की तरह क्या इसमें भी डाउन टू अर्थ का वो खास अहसास दिखेगा?

हरविन्द्र जी, डाउन टू अर्थ के बिना आप सरवाइव नहीं कर सकते। कैलेंडर गर्ल्स में भी यही भाव है कि इंसान किसी भी मुकाम पर क्यों न पहुंच जाये। धरती उसे उसकी असली पहचान कराती रहती है। इसलिए आप कुछ भी बन जाओ कभी अपना घर, मां-बाप, बचपन के दोस्त व हैसियत इन्हें भूलना नहीं चाहिए वर्ना ऊपर वाला भी साथ नहीं देता।

मायापुरी के पाठकों के लिए संदेश देना चाहेंगे?

मायापुरी सबसे पुरानी फिल्म पत्रिका है। जो 44 साल से लगातार छप रही है और मेरा परिवार है वो। मैं उसके पाठकों से यही कहूंगा कि अपना प्यार ‘कैलेंडर गर्ल्स’ के साथ बनायें रखें। सिनेमा हाल में जाकर जरूर देखेँ और अच्छे सिनेमा को सफल बनाकर हमारा हौंसला बढाए। मायापुरी जिन्दाबाद!

 


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