INTERVIEW: ‘‘उनका उतना कहना मेरे लिये किसी पुरस्कार से कम नहीं था’’- संदीप नाहर

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अक्सर बड़े बैनर अपनी फिल्मों के छोटे या नये कलाकारों का प्रमोशन नहीं करते, बेशक उनका फिल्म में कितना ही अहम रोल हो । हाल ही में रिलीज हिट फिल्म ‘एम एस धोनी’ में धोनी के बचपन से अभी तक के साथी और दोस्त सरदार परजीत सिंह उर्फ छोटू भैया की भूमिका निभाने वाले संदीप नाहर ऐसे ही अदाकार हैं जिनकी फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत के पैरलल भूमिका होने पर भी प्रचार मे जगह नहीं मिल पाई । क्या कहते हैं इस बारे में संदीप नाहर ।

संदीप अपने बारे में क्या कहना चाहते हैं ?

मैं पंजाब के एक छोटे शहर कालका से हूं । पापा फाॅरेस्ट आॅफिसर हैं । पंजाब युनिर्वस्टी से ग्रेजुएशन करने के बाद मैं ने इंजीनियरिंग की ।लेकिन एक्टिंग का भूत बचपन से ही हाॅवी था उन दिनों राम लीला में मुझसे डांस करवाया जाता था। काॅलेज टाइम में मैने म्युजिक वीडियो में माॅडलिंग के लिये ट्राई किया लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। बाद में मुझे फील हुआ कि इस फील्ड में पर्सनेलिटी और प्रतिभा दोनो चाहिये लिहाजा मैने थियेटर करना शुरू कर दिया। कुछ पंजाबी प्ले करने के बाद दोस्तों की सलाह पर मैने मुबंई का राह पकड़ी । लेकिन जल्द ही यंहा के संघर्ष से घबराकर वापस चला गया । कुछ दिन बाद एक बार फिर अपनी किस्मत आजमाने के लिये वापस मुबंई आया। इस बार मुबंई की मुझ पर कृपा हुई ।image3

फिल्म तक कैसे पहुचना हुआ ?

दरअसल इस बार मैं निश्चय करके आया था कि इस बार कुछ करना है । लिहाजा मैं यंहा सर्वाइव के लिये एक क्लब में बाउंसर बन गया। अब दिन में संघर्ष करता था और रात को नौकरी । इसी के साथ मुझे डबिंग का काम भी मिलने लगा, साथ ही मैने टीवी पर क्राइम पट्रोल, सीआईडी, आहट आदि सीरियल्स में छोटे छोटे रोल्स करने शुरू कर दिये । बाद में मुझे मैं न भूलूंगी, कैसा इश्क तथा दीया और बाती आदि धारावाहिकों में बड़े किरदार भी मिले । इसके बाद मुझे हैरी बवेजा की पंजाबी फिल्म ‘ हैप्पी गो लकी’ में एक अच्छा रोल मिला, लेकिन उसका मुझेे कोई फायदा नहीं मिल पाया । लिहाजा उसी तरह स्ट्रगल चलता रहा । एक दिन कास्टिंग डायरेक्टर विकी सदाना के यंहा से फोन आया कि एक सरदार का किरदार है कल पगड़ी पहन कर आॅफिस आ जाना। मैं अगले दिन गया । वहां उन्होंने मुझे कुछ लाइने बुलवाई जो मैने बोल दी और मैं वापस आ गया। बाद में मुझे पता चला कि मैं शॉर्ट लिस्ट हो रहा हूं। इसके बाद मेरा वहां आना जाना लगा रहा। करीब तीन महिने बाद मुझे बताया गया कि मेरी नीरज पांडे के साथ मीटिंग है । मिलने पर उन्होंने मेरे बारे में कुछ तहकीकात की, फिर कहा कि तुम्हें इस फिल्म के लिये चुन लिया गया है बस अपनी लाइने अच्छी तरह से याद रखना, बाकी मुझ पर छोड़ दो ।dfd

फिल्म की शुरूआत में क्या अनुभव रहे ?

फिल्म का फर्स्ट शेड्यू्ल जलंधर में था और पहला शॉट मुझ पर ही लिया जाना था। लेकिन इससे पहले नीरज जी ने मुझे और मेरे साथियों को बताया कि तुम्हारा वन टेक शॉट है। अब मुझे तो फिक्र होनी शुरू हो गई कि ये वन शॉट क्या है। बाद में पता चला कि वे एक पूरे सीन के लिये कह रहे थे । इसके बाद तो सब हल्का होता चला गया। सबसे बड़ी बात कि ये मेरी एक तरह से डेब्यूू फिल्म हैं जिसमें मेरे काम को काफी सराहा गया ।

धोनी से मुलाकात के क्या अनुभव रहे ?

रांची में मेरी गेम की शॉप का सेट लगाया गया था। धोनी वहीं सेट पर अपनी पत्नि साक्षी के साथ आये थे, उन्होंने मुझे देखते ही कहा कि अरे छोटू भैया । फिर वे कहने लगे वैरी गुड,आप तो बिलकुल छोटू भैया ही लग रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुझे छोटू भैया ने अपने मोबाइल में आपकी पिक दिखाई थी तभी से तुम्हें देखने की उत्सुकता थी। उनका इतना ही कहना मेरे लिये किसी पुरस्कार से कम नहीं था ।sandeep

छोटू भैया के बारे में कुछ बताईये ?

इनकी रांची में गेम शॉप थी। उन्हें प्यार से छोटू भैया कहा जाता है वैसे उनका नाम परमजीत सिंह है। मैं जब रांची पहुंचा तो उनसे मिलने के लिये बहुत एक्साइटिड था लेकिन मुझसे कहीं ज्यादा परमजीत एक्सााइटिड थे मुझे देखने के लिये। मुझसे मिलने के बाद वे बहुत खुश हुये, हमने काफी खुलकर बातें की। वे मुझे अक्सर अपने घर या बाहर डिनर पर लेकर जाते थे। जितने दिन भी हमने वहां शूटिंग की उनसे रोजाना मिलना होता रहा जो मेरे लिये काफी फायदेमंद रहा क्योंकि उन्हें आॅब्जर्व करने का मेरे लिये अच्छा मौका था ।


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Mayapuri

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