INTERVIEW!! ‘कुछ अलग कहने के लिये रिस्क तो लेना ही पड़ता है’’ एक्टर सिंगर – डा. पलाश सेन

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पलाश सेन बेसिकली एक एम बी बी एस डाॅक्टर हैं लेकिन उनके सिंगिंग के जुनून ने उन्हे सिंगर बना दिया । लिहाजा वे अपने बैंड यूफोरियो के साथ पूरी दुनियां में घूमते रहते हैं । सिंगिंग के अलावा पलाश ने कुछ फिल्मों में अभिनय भी किया है जैसे फिलहाल और मुबंई कटिंग । करीब एक दशक बाद वे एक बार फिर अभिनय में वापसी कर रहेे हैं निर्देशक अभिजीत वौरा की फिल्म‘ ऐसा ये जंहा’से । इस फिल्म के बारे में उनका काफी कुछ कहना हैं जैसे ।
दरअसल मेरी पहली पसंद मेरा म्यूजिक हैं जिसे लेकर मैं आॅल वर्ल्ड शोज करता रहता हूं । ये सच है कि मुझे अभिनय का भी शौक हैं लेकिन म्यूजिक के बिना में नही रह सकता । मैने पहले कुछ फिल्में की थी जो असफल साबित हुई । बाद में मुझे ऐसा कोई आॅफर आया नहीं जिसमें मेरी दिलचस्पी होती, इसलिये मैने अपने बैंड युफोरिया पर अपना ध्यान केंद्रित कर लिया। जंहा मैं लगातार बिजी रहा। बेशक बाॅलीवुड में ढेर सारा बदलाव हुआ हैं म्यूजिक भी काफी बदला हैं लेकिन उसमें दम नहीं दिखाई दिया। प्राईवेट एलबमों का दौर लगभग खत्म सा हो गया । लेकिन स्टेज पर हो रहे म्यूजिक शोज पर इसका कुछ खास फर्क नहीं पड़ा वे आज भी सफलता से चल रहे हैं ।

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एक अरसे बाद मुझे एक ऐसी फिल्म का आॅफर आया जो मेरे दिल के काफी करीब है । इसीलिये मैने ये फिल्म की । वरना मैं तो म्युजिक में ही मस्त था ।‘ ऐसा ये जंहा’। फिल्म एक विचार प्रकट करती है यानि यह अलग सी कहानी बाॅलीवुड की मसाला फिल्मों से एकदम अलग है। इस बात का एहसास मुझे इसकी स्क्रिप्ट पढ़ते हुए हो गया था । इसे आप पलायन और पर्यावरण को लेकर एक मजबूत संदेश देती हुई फिल्म कह सकते हैं । और छोटे बजट की होने की वजह से इसमें रिस्क भी कम है । लेकिन फिर भी फिल्म में एन्टरटेनमेंट होने के अलावा इसका म्यूजिक पहले ही हिट हो चुका है । फिल्म की नायिका इरा दूबे एक मंजी हुई अदाकारा है फिल्म में वो मेरी पत्नि बनी है जो बेहद महत्वाकांक्षी है उसे कम वक्त में बहुत कुछ चाहिये, जबकि मैं उसके बिलकुल विपरीत हूं । दोनों की इस विचारधारा से उत्पन्न टेंशन का असर हमारी इकलौती बेटी पर पड़ता है ।

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फिल्म में असाम या ऐसे ही नार्थईस्ट के लोगों के साथ दुर्भावपूर्ण रवैये का फिल्म में जिक्र हैं क्योंकि अन्य लोग इन राज्यों के लोगों को किसी दूसरे देश के नागरिक समझते हुए कभी उन्हें नेपाली तो कभी चीनी कहते हुए उनकी भावनाओं को लगातार आहत करने से पीछे नहीं हटते । यह उनकी तो गलती नहीं कि उन ईस्ट नार्थ के लोगों के बारे उन्हें ज्यादा जानकारी न होने के कारण वे ऐसा करते हैं लेकिन करते ही क्यों हैं? ये सवाल फिल्म में बहुत ही प्रभावशाली ढंग से उठाया गया है । बेशक फिल्म में ऐसे इशूज फिल्म को दूसरी तरफ भी ले जा सकते हैं लेकिन कुछ कहने के लिये थोड़ा बहुत रिस्क तो लेना ही पड़ता है सो फिल्म के निर्देषक जो खुद आसाम से हैं ने ये खतरा उठाते हुए अपनी बात फिल्म के माध्यम से कही है । इसके अलावा फिल्म में मुबंई हैं और यहां का सघंर्ष भी है ।

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अगर पंसद की फिल्मों की बात की जाये मैं बिग बजट की मसाला फिल्मों की अपेक्षा छोटे बजट की लेकिन उद्देश्यपूर्ण फिल्में ज्यादा पसंद करता हूं ।मैं चूंकि कोई स्टार नहीं हूं इसलिये मेरे लिये सो करोड़ क्लब में जाने वाली फिल्मों की बातें करना बेकार होगा । फिल्म के संगीत की बात की जाये तो इसके छह गीतों में फोक, राॅक एन रोल, लव सांग तथा पार्टी सांग सारे रंग मौजूद हैं ।


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Mayapuri

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