INTERVIEW!! ‘‘मेरी तुलना रेखा जी से की जा रही है, ये मेरे लिये गर्व की बात है’’ – पर्निया कुरैशी

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मुज़फ्फर अली की फिल्म ‘जांनीसार’ का हीरो इमरान अब्बास और संगीतकार उस्ताद शफकत अली खान तो पाकिस्तान से हैं ही लेकिन फिल्म की हीरोइन पर्निया कुरैशी का भी संबन्ध कहीं न कहीं पाकिस्तान से है। कैसे, बता रही हैं पर्निया इस मुलाकात में ।

पर्निया कुरैशी का परिचय

मेरे पिता रामपुर से हैं और मम्मी पाकिस्तान की हैं, शादी के बाद उनका इंडिया आना हुआ। हमारी नानी लखनऊ की थी, उनकी शादी लाहौर हुई थी, फिर मम्मी शादी होकर वापस इंडिया आई। इस तरह दो जनरेशन का एक्सचेंज होता रहा। मेरी परवरिश अमेरिका के एक बोर्डिगं स्कूल में हुई। कॉलेज की पढ़ाई भी अमेरिका में ही हुई। पांच साल पहले मैं इंडिया आई। यहां मैने एक छोटी सी शॉप शुरू की जो इंडिया में पहली ऑन लाइन शॉप थी । उसमें हम डिजाइनर कपड़े और तकरीबन सारा लेडीज सामान ऑन लाइन बेचते हैं। दरअसल अमेरिका में तो सभी ऑन लाइन शॉपिंग करते हैं । यहां आने के बाद मैने देखा यंहा तो ऐसा कुछ नहीं हैं इसलिये मैने ये ऑन लाइन शुरू की। उसके एक साल बाद तो ढ़ेर सारी ऐसी शॉप खुल चुकी हैं। मैने तीन साल की उम्र में क्लासिक्ल डांस सीखना शुरू कर दिया था। वहां मैने कत्थक और कुचीपुड़ी डांस सीखा। यहां मैने वापस कुचीपुड़ी सीखा, साथ ही कत्थक में भी दोबारा से स्पेशल ट्रेनिंग ली। दरअसल फिल्म में मेरा रोल एक ऐसी महिला का है जो अवध की हैं। उसकी अदायें निराली हैं उसके चलने फिरने में एक नज़ाकत है। इसलिये कत्थक डांस जरूरी था।

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फिल्म में क्लासिक्ल डांस

जैसा कि मैने कहा, मेरा रोल एक क्लासिक्ल डांसर का है। फिल्म में एक गाना बिरजू महाराज ने  कोरियोग्राफ किया है तथा कत्थक की महान गुरू कुमुदिनी लखिया ने दो तीन गाने कोरियोग्राफ किये हैं। उन्होंने उमराव जान में भी कुछ गाने किये थे। मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे इतने महान गुरूओं से सीखने और उनके साथ काम करने का अवसर मिला ।

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भूमिका

ये 1857 के बीस साल बाद 1877 की कहानी है । अवध की ऐसी लड़की जिसका नाम नूर है जो अब बीस इक्कीस साल की है। उस दौर में जो भी ओरतें या लड़कियां होती थी वे एक दायरे में रहती थी लेकिन नूर का अपना अलग दिमाग हैं, वो अपने हिसाब से जीना पसंद करती हैं बहुत ही स्ट्रांग दिमाग की है। दूसरे कुछ लोग अपने तक ही सोचते हैं लेकिन कुछ लोग अपने से आगे तक का सोचते हैं देश के लिये सोचते हैं भविष्य के लिये सोचते है । ये लड़की उसी तरह की है ।

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फिल्म

फिल्म में दो कहानियां पैरलल चलती हैं एक प्रेम कहानी दूसरी देश भक्ति । दोनों ही कहानियां मुज़फ्फर सर ने कमाल की लिखी हैं और फिल्म में उन्हें बेहद खूबसुरती से फिल्माया है । अगर फिल्म की कहानी की बात की जाये तो ये एक ऐसे राजा की कहानी है जिसकी परवरिश लंदन में होती है और एक लड़की की जो अवध की मिट्टी में जन्मी है,उसे अपनी मिट्टी से बहुत प्यार है । कैसे ये लड़की राजा को देश का महत्व समझाती है, ये इस फिल्म में बखूबी दिखाया गया है।  दरअसल इससे पहले उस राजा का झुकाव अंग्रेजों की तरफ था, बाद में वो उसे देश भक्ति का किस तरह पाठ पढ़ाती है । फिल्म की कहानी में वास्तविकता हैं क्योंकि पहले अंग्रेज ऐसा ही करते थे। वे छोटे छोटे राजाओं या नवाबों को लंदन ले जा कर वहां उनकी परवरिश इस तरह से करते थे कि वे बाद में उन्हीं का गुणगान करते थे। इस राजा के साथ भी उन्होंने ऐसा ही किया था जान तक कुर्बान करने के लिये तैयार हो जाता है ।

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फिल्म को लेकर सोच

इस फिल्म में मेरी भूमिका के तहत मेरी तुलना लीजेन्ड रेखा जी से की जा रही हैं जो मेरे जैसी न्यूकमर के लिये तो ये सपने जैसी बात है। दूसरे कोई आपको प्रोत्साहित करे, आपके काम को सराहे तो ये उसके लिये बहुत बड़ी बात होगी। मुज़फ्फर सर ने मुझे लेकर यही किया, क्योंकि ये फिल्म एक पीरियड फिल्म है। इसका संगीत, माहौल, भाषा काफी कुछ उस दौर का है, इसलिये लोग बाग इसकी तुलना उमराव जान से करते हैं ।

आगे की सोच

मैं बहुत ही खुशकिस्मत हूं कि मेरी शुरूआत मुजफ्फर अली जैसे लीजेन्ड फनकार के साथ हुई है। दूसरे मैं फिल्म में एक क्लासिकल डांसर हूं । शायद इसलिये लोग मेरी तुलना रेखा जी से कर रहे हैं। लेकिन अभी मुझे बहुत आगे जाना है, बहुत काम करना है। जंहा तक रेखा जी की बात की जाये तो उन्होंने बहुत कुछ अचीव किया है वे लीजेंड है । बावजूद इसके मेरी तुलना उनसे की जा रही है, मैं यहां कुछ नहीं कर सकती। अगर कहा जाये तो ये मेरे लिये बहुत गर्व की बात है कि मेरे जैसी न्यूकमर की तुलना रेखा जी से हो रही है ।

 


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Mayapuri

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