INTERVIEW!! ‘‘मीडिया को भी स्टार चाहिये एक्टर नहीं’’ -प्रतिमा (काज़मी) कनन

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टीवी इन्टरव्यू

अभिनेत्री प्रतिमा कनन अभी तक बीस से ज्यादा फिल्में तथा एक दर्जन धारावाहिकों में अपनी अभिनय प्रतिभा दर्शा चुकी हैं। धारावाहिक ‘उतरन’ से उन्हें घर घर में पहचाना जाने लगा। इन दिनों वह कलर्स चैनल पर प्रसारित धारावाहिक ‘ इश्क का रंग सफेद’ में दिखाई दे रही हैं। इस धारावाहिक के अलावा उनसे उनके निजी जीवन को लेकर एक बातचीत।

आपके मीडिया से दूर रहने की वजह। इसीलिये दर्शक आपके बारे में बहुत कम जानते हैं?

इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण तो आप ही हैं देखिये आप मुझसे मेरे बारे में बात करना चाहते हैं तो मैं इसके लिये तैयार हूं। दरअसल मीडिया को स्टार चाहिये एक्टर नहीं। वरना मैं अभी तक न जाने कितने धारावाहिक और फिल्में कर चुकी हूं। अब ये मीडिया की जिम्मेदारी है कि वो मेरे बारे में पाठकों को बताये।

खैर आप अपने बारे में क्या बताना चाहेंगी ?

सब कुछ जैसे मैं यानि प्रतिमा दिल्ली रंगमंच से हूं। मैंने वहां करीब उन्नीस बीस साल तक थियेटर किया। मेरा मानना था कि पहले थियेटर को खूब जी भर कर जी लिया जाये फिर किसी दूसरी विधा की तरफ देखेंगे। मैं जब मुबंई आई तो सिर्फ दो साल का पैसा लेकर आई थी क्योंकि मैं फैसला कर के आई थी कि अगले दो सालों में कुछ हो जाता है तो ठीक, वरना फिर थियेटर की तरफ लौट चलेंगे। यहां आने के बाद टीवी पर मेरा पहला शो ‘इतिहास’ था, उसमें मैने एक खबरी का किरदार निभाया था। एक बात और शेयर करना चाहूंगी। उन दिनों मेरे मुबंई जाने से नाट्यकर्मी सत्य देव दूबे बहुत नाराज थे कि क्यों मैं थियेटर छोड़ आई। बाद में उन्होंने खुद अपना नंबर देते हुये कहा था कि जब मुबंई आओ तो मुझसे मिलना। यहां उन्होंने मेरी काफी मदद की, शायद इसलिये मुझे काम के लिये ज्यादा नहीं भटकना पड़ा।

rashami

आपके आगामी शो कौन कौन से थे ?

इतिहास के बाद मैने स्वाभिमान, सात फेरे, जब लव हुआ, कम्माल, केसर तथा उतरन जैसे धारावाहिक किये। फिल्मों में मेरी शुरूआत फिल्म ‘दुश्मन’ से हुई। इसके बाद मैने पिंजर, बंटी और बबली, मुंबई एक्सप्रेस, गदर आदि फिल्में की। हाल ही में रिलीज फिल्म ‘बदलापुर’ में मैने नवाजुद्दीन की मां की भूमिका निभाई थी लेकिन बतौर अदाकार मुझे धारावाहिक ‘उतरन’ के नेगेटिव किरदार में अपार सफलता हासिल हुई ।

नये धारावाहिक में आपकी भूमिका क्या है ?

इस धारावाहिक को अभी प्रसारित हुये ज्यादा वक्त नहीं हुआ है लिहाजा अभी ज्यादा कुछ बताने की स्थिति में नहीं हूं, इतना बता सकती हूं कि शो में मैं एक विधवा आश्रम चलाती हूं। मेरे करदार का नाम है इन्द्राणी देवी। यह आश्रम बनारस में है। वैसे आजकल आश्रम वगैरह ऐसे ही शहरों तक रह गये हैं।

धारावाहिक के बारे में क्या बताना चाहेंगी ?

धारावाहिक में एक ताजा जवान हुई विधवा की लव स्टोरी है। अभी तक तो लव स्टोरीज फिल्मों में दिखाई देती रही हैं लेकिन अब वे छोटे पर्दे पर भी उतर आई हैं वैसे छोटे पर्दे पर कुछ दिनों से बाल विवाह जैसी कुरीतियों का भी पर्दाफाश किया जा रहा है जिसे बहुत बड़ी त्रासदी के तौर पर देखा जाता रहा है। शो में एक कम उम्र की तरूणी का विधवा हो जाना कितनी बड़ी त्रासदी है। दूसरे उसकी मां ने भी खुद विधवा होने का दुख झेला है, अब अपनी बेटी को उसी रूप में देख कर उस पर क्या बीत रही होगी, लेकिन वह बरसों से चली आ रही प्रथा को मानने के लिये मजबूर है इसलिये वह अपनी बेटी को समझाने से ज्यादा डराने वाले अंदाज में कहती हैं कि हम दोनों मिलकर कुछ नहीं कर सकते, तुझे भी मेरी तरह ऐसे ही जीना होगा। बाद में उस लड़की की जिन्दगी में एक लड़का आता है। ये प्रसंग इन दिनों दिखाया जा रहा है ।

थियेटर के बाद टीवी और फिल्मों को कैसे देखती हैं ?

मैने यहां काम करते हुये यही देखा है और सीखा है कि गंगा की धारा के साथ बस बहते चलो, वरना जहां तक अभिनय की बात की जाये वो तो जो थियेटर में कर लिया सो कर लिया। मेरे गुरू थे बी एम शाह, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके बाद अल्काजी, रामगोपाल बजाज, एम के रैना जैसे अच्छे डायरेक्टर्स की तो आज फिल्मों या टीवी में होने की कल्पना तक नहीं की जा सकती। फिल्म और टीवी की बात की जाये तो एक आर्टिस्ट के तौर पर हम जो थियेटर में कर चुके हैं वह अभी तक तो दूर दूर तक नहीं दिखाई दे रहा है, आगे भी उम्मीद कम ही है। लेकिन एक बात की तारीफ जरूर करनी पड़ेगी कि अब टीवी पर हॉलीवुड की तरह मैच्यौर या उम्रदराज अदाकारों को भी अहमियत दी जाने लगी है बाकायदा उनके लिये मुख्य भूमिकायें लिखी जा रही हैं,ये एक अच्छा परिवर्तन हैं।

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नये लोगों को लेकर आप क्या सोचती हैं ?

भई जैसा कि मैंने अभी कहा कि आज मैं फिल्मों और टीवी में आये बदलाव को लेकर बहुत खुश हूं क्योंकि आज नये नये डायरेक्टर्स और एक्टर्स आ रहे हैं। पहले तो नया कलाकार सही लोगों तक पहुंच ही नहीं पाता था लेकिन आज टीवी पर आ रहे रियलिटी शोज के तहत नई प्रतिभायें सही लोगों तक अपना हुनर पहुंचाने में कामयाब हो रही हैं।

सुना हैं कि आपकी अभिनय की शुरूआत काफी दिलचस्प रही ?

बिल्कुल ये बहुत ही दिलचस्प कहानी है। उस समय मैं अंदाजन सोलह सतरह साल की रही हूंगी। उस वक्त मैंने हायर सेकेन्डरी पास की थी। मुझे उन दिनों गाने का बहुत शौंक था क्योंकि मैं अच्छा गाती भी थी। उन्हीं दिनों मेरी एक दोस्त एन एस डी रिपेट्री में काम करती थी। एक दिन उसने बताया कि एक नाटक में मुख्य किरदार के लिये एक लड़की चाहिये थी जो अच्छा गाती हो। बाद में मेरे कहने पर उसने मेरे घर आकर मेरी मम्मी से मेरे लिये इस बारे में बात की तो उसे जो जवाब मिला वो उसके लिये हैरान कर देने वाला था। मेरी मां ने जैसे ही थियेटर का नाम सुना तो फौरन सख्ती से मना कर दिया। हुआ यूं चूंकि हम क्रिश्चयन हैं इसलिये मेरी दोस्त को लगा था कि क्रिश्चयन तो काफी खुले दिमाग के होते हैं, लेकिन मेरे घर में ऐसा नहीं था। बाद में किसी तरह मां को मनाकर मैं उसके साथ गई। उस नाटक के डायरेक्टर थे बी एम शाह, उन्होंने मुझे पहले गाने के लिये कहा मेरा गाना सुनने के बाद उन्होंने नाटक का विषय बताते हुये मुझसे कुछ संवाद बुलवाये। बाद में मैंने नाटक में एक्टिंग की। मेरे गाने और मेरे अभिनय से बीएम शाह इतने खुश थे कि उन्होंने मुझे कहा कि तुम तो पैदाईशी कलाकार हो लिहाजा तुम फौरन रिपेट्री ज्वॉइन कर लो। इस तरह मेरे करियर की शुरूआत हुई।

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Mayapuri