INTERVIEW!! “जो कुछ भी करें दिल लगाकर, ईमानदारी व मेहनत से करें, जिन्दगी में सफलता जरुर मिलेगी” – प्रेम चोपड़ा 

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जी हाँ 23 सितम्बर को अपना 80वां जन्मदिन मनाने वाले बॉलीवुड के कलाकार प्रेम चोपड़ा ने अपने पचास वर्ष के फ़िल्मी सफ़र में खलनायक के रूप में खूब लोकप्रियता हासिल की। शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम, दो रास्ते, कटी पतंग, दो अनजाने, जादू टोना, काला सोना, दोस्ताना, क्रांति, फूल बने अंगारे, बेवफ़ा से वफ़ा, बॉबी फिल्मों में अपने अभिनय के अमित छाप छोड़ी है इस मशहूर कलाकार ने। अपनी अदायगी के लिए उन्हें इस दौरान कई पुरुस्कारों से नवाज़ा गया लेकिन 1976 में फिल्म दो अनजाने में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए प्रतिष्ठित फिल्म फ़ेयर से सम्मानित किया गया। हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार एस.एस.डोगरा ने प्रेम चोपड़ा जी  से उनके मुंबई स्थित निवास पर जाकर इंटरव्यू किया। आपके समक्ष प्रस्तुत है इंटरव्यू के अंश:

आपने कौन सी उम्र में अभिनय शुरू कर दिया था.

मैंने जवानी में ही शिमला में अभिनय करना आरम्भ कर दिया था। ग्रेजुएशन खत्म करते ही, मैंने एक्टर बनने का निर्णय कर लिया था।

 परिवार ने इस निर्णय का सपोर्ट किया था?

मेरे पिता ने स्पष्ट कह दिया था कि वे उन्हें आई ए एस अधिकारी बनाने के लिए पैसा खर्चने के लिए तैयार है जबकि फिल्म जगत के लिए खुद प्रयास करना होगा।

मुंबई कब आना हुआ ?

वर्ष 1960 में मुंबई नगरी में आना हुआ। मुझे सबसे पहली टाइम्स ऑफ़ इंडिया जैसे बड़े प्रकाशन के यहाँ सर्कुलर मेनेजर की नौकरी मिल गई।

फ़िल्मी सफ़र कैसे शुरू हुआ ?

फिल्मों में काम का ऑफर मिलना बड़ा ही रोचक रहा। एक दिन मैं लोकल ट्रेन में सवारी कर रहा था, एक व्यक्ति ने मेरे पास आकर पुछा कि तुम फिल्म में अभिनय करना चाहते हो, मेरी हामी भरते ही वो मुझे रंजीत स्टूडियो ले गया। वहां डायरेक्टर ने मुझे सिलेक्ट कर लिया और पुणे में उक्त फिल्म की शूटिंग के लिए आदेश दिया, “चौधरी करनैल सिंह” यह मेरी पहली फिल्म थी उसके बाद लगातार तीन और पंजाबी फ़िल्में मिल गई, अब मेरे लिए नौकरी के साथ फिल्मों के लिए समय निकालना कठिन होने लगा। सैलरी अच्छी थी जबकि पंजाबी फ़िल्में लो बजट की हुआ करती थी, मैंने हिंदी फिल्मों की ओर रुख करने का मन बनाया.

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कौन सी पहली हिंदी फिल्म में काम मिला?

सन् 1966 में कुंवारी मेरी पहली हिंदी फिल्म थी जिसमें मुझे लीड हीरो का रोल मिला। इसी दौरान मुझे वाडिया मूवीज़ में “मैं शादी करने चला” नामक हिंदी फिल्म में बतौर मेन रोल के अलावा पांच सौ रूपये मासिक वेतन पर काम करने का ऑफर मिला, लेकिन मेरी टाइम्स ग्रुप की नौकरी छोड़ने की हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि वहां एक हजार रुपए मासिक सैलरी साथ में टी ए डी ए तथा उड़ीसा, मध्य प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और पश्चिम बंगाल का सर्कुलेशन हैड होने के नाते मौज थी परन्तु ‘वो कौन थी’, ‘शहीद’, ‘मैं शादी करने चला’ और ‘तीसरी मंजिल’ जैसी सफल फ़िल्में करने तथा 1967 में सुपर हिट ‘उपकार’ फिल्म के बाद अपनी नौकरी छोड़ पूरा ध्यान अभिनय पर लगा दिया।

आपका पसंदीदा डायलाग कौन सा है जिसे आप बेहद चाहते हैं?

प्रेम नाम है मेरा प्रेम चोपड़ा, बॉबी फिल्म का यह डायलॉग, आज भी बेहद लोकप्रिय है.

बॉलीवुड में बिताए कुछ लम्हे ?

मशहूर फिल्म निर्देशक राज कपूर साहेब, शक्ति सामंत साहेब, राज खोंसला साहेब, मनोज कुमार साहेब फिल्मों के प्रति पूर्णता: समर्पित थे. वे सभी सोते, जागते, खाते पीते सिर्फ फिल्म के बारे में ही सोचते थे इसीलिए वे आज भी जिन्दा हैं। इन सभी निर्देशकों से बहुत कुछ सीखने को मिला और सबसे बड़ी बात ये है कि सिनेमा से मेरा अटूट रिश्ता है।

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आपका खेलों में भी रुझान रहा है?

जी हाँ, आज भी मैं प्रतिदिन तैराकी करता हूँ यही मेरी फिटनेस का राज भी है, मैंने क्रिकेट एवं बेडमिन्टन भी खूब खेला है। मुझे एक चैरिटी मैच में फिल्म स्टार एकादश की तरफ से सलामी बल्लेबाजी करते हुए नाबाद शतक लगाने का मौका मिला, यह मैच ईडन गार्डन कोलकाता में हुआ था जिसमें कुछ रणजी व टेस्ट खिलाडी भी खेले थे और मुझे मेन ऑफ़ द मैच चुना गया।

क्या कभी आपको इस बात का अहसास हुआ कि आपकी शक्ल शम्मी कपूर साहेब से मेल खाती है?

जी, बिल्कुल, उस वक्त कुछ अभिनेत्रियों ने इस बारे में टोका था लेकिन मैं अपने खलनायक के रोल करने में ही मशगुल था इसीलिए इस विषय को मैंने कतई गंभीरता से लिया ही नहीं।

आपने अपने सिर के बाल बिल्कुल ही कटा डाले, ऐसी क्या वजह थी?

मैं यूरोप में परिवार के संग छुट्टियाँ बिता रहा था वहीँ एक विदेशी निर्देशक ने मुझे देखकर अपनी फिल्म में संत की भूमिका के लिए ऑफर किया लेकिन शर्त रखी कि मुझे अपने सिर के सारे बाल कटवाने होंगे. मैंने स्वीकार कर लिया और उसके बाद मैंने सिर पर बाल रखे ही नहीं साथ ही बालों को रंगने तथा कंघी करने से भी छुटकारा मिल गया और इंडस्ट्री में मेरे गंजे वाले लुक को बेहद पसंद भी किया गया।

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आप और आपके परिवार का बॉलीवुड से रिश्ते पर प्रकाश डालें ।

प्रेम नाथ साहेब, राजेन्द्र नाथ साहेब, नरेंद्र नाथ साहेब, कृष्णा कपूर (राज कपूर साहेब की पत्नी), शर्मन जोशी तथा मेरी धर्मपत्नी उमा चोपड़ा की सपोर्ट के अलावा तीनों ही बेटियों प्रेरणा चोपड़ा, पुनीता चोपड़ा और रतिका चोपड़ा का भी बॉलीवुड से विशेष रिश्ता आज भी कायम है। खुदा का शुक्रगुजार हूँ कि मुझे अपना मनचाहा अभिनय वाला काम बखूबी करने का सुअवसर मिला और आज अस्सी वर्ष की उम्र में भी अभिनय कर जिन्दगी की ऐश कर रहा हूँ.

आपके व्यक्तिगत अभिनय कौशल का क्या राज है ?

मैंने हमेशा निर्देशक द्वारा दिए गए, अपने रोल को बखूबी निभाने का प्रयास किया

आपकी सफलता का क्या मूल मन्त्र है ?

“जो कुछ भी करें दिल लगाकर, ईमानदारी व मेहनत से करें, जिन्दगी में सफलता जरुर मिलेगी।” यही नियम मेरे जीवन की सफलता का राज रहे।

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Mayapuri

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