INTERVIEW: ‘‘मैने तय कर लिया था कि मेरी फिल्म के मज़ाज, प्रियांशू ही होगें’’ – लेखक निर्माता शक़ील अख़्तर

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इन दिनों कॉमेडी या दूसरी कमर्शियल फिल्मों के नीचे ऐसी तकरीबन सभी कहानीयों दब कर रह गई हैं जो बड़े राजनेता या शायरों पर आधारित हों। इन्हीं में एक मकबूल शायर हुये हैं मज़ाज़। जिनकी शायरी का डंका आज से सो साल पहले काफी बजता रहा है। यहां तक अगर वे दस साल और जिंदा रह जाते तो उन्हें गालिब के स्तर का शायर मान लिया जाता। याद रहे मजाज प्रसिद्ध गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर के सगे मामा थे। फिल्म के लेखक निर्माता शकील अख़्तर, मजाज की शायरी के इस कदर कायल थे कि उन्होंने बरसों पहले उन पर फिल्म बनाने को सोच लिया था। बीच में वे अपने बिजनेस में काफी वयस्त रहे लेकिन मजाज पर बाकायदा रिसर्च भी करते रहे और जैसे ही उन्हें मौंका मिला उन्होंने फिल्म शुरू कर कंपलीट भी कर दिखाई। अब ये फिल्म रिलीज के लिये तैयार है ।

शकील अख्तर का कहना हैं कि उन्हें फिल्म बनाने का आइडिया करीब बत्तीस साल पहले आया था। बकौल शकील, दरअसल में भी अलीगढ यूनिवर्सिटी में पढ़ा हूं और मजाज साहब भी वंहा स्टूडेंट रह चुके हैं जब मैने उन पर फिल्म बनाना शुरू किया तो इससे पहले मैं फिल्म की कथा पटकथा और संवाद लिख चुका था। और फिल्म को निर्देशित करने के लिये रवीन्द्र सिंह का चयन कर लिया था। बेशक इस फिल्म के लिये मुज्जफर अली से बेहतर निर्देशक कोई और नहीं हो सकता था लेकिन उनका कद इतना बड़ा है कि मैं उन्हें अप्रोच कर अपने मन मुताबिक काम निकलवाने की औकात नहीं रखता था। अगला पड़ाव था कास्टिंग। मैने पहले मजाज के लिये इरफान से बात करने की कोशिश की लेकिन उस दौरान वे अमेरिका में थे लिहाजा उन्होंने बाद में मिलने के लिये कहा। काफी दिनों तक जब उनसे कोई रिस्पांस नहीं मिला तो दूसरी जगह देखना शुरू किया। उन्हीं दिनों मेरे बेटे ने फिल्म तुम बिन देखी थी उसने फौरन मुझे उसमें काम कर रहे प्रियांशू चटर्जी के बारे बताया । फिल्म देखने के बाद मैने तय कर लिया कि मेरी फिल्म के मजाज प्रियांशू ही होगें।
इस तरह की फिल्में बनाने में सबसे बड़ी दिक्कत आती है कि उस माहौल और उस वक्त के लुक को कैसे दिखाया जाये । इसलिये मैने सही माहौल और वास्तविकता दिखाने के लिये फतेहपुर सीकरी तथा लखनऊ में शूटिंग की तथा ताज महल में शूट करने के लिये अलग से स्पेशल परमिशन ल़ी। फिल्म की शूटिंग को महज सत्ताईस दिन में पूरा किया गया ।Maz

अगर मजाज की और बात की जाये तो कहा जाता है कि वे काफी हैंडसम और रोमांटिक प्रवृति के थे। उनकी फिल्म में एक लव स्टोरी हैं जिसे ट्रायगंल लव स्टोरी कहा जाये तो ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि उनकी प्रेमिका की किसी और से शादी के बाद ही वे शराब में डूब गये थे। इसलिये उनके दृश्यों के लिये कुछ सिनेमा लिबर्टी भी ली गई । फिल्म में अगर उनकी कुछ कमजोरियों का जिक्र किया गया है तो उनकी अच्छाईयों के बारे में भी तफसील से बताया गया है। महज चवालिस साल की उम्र दी खुदा ने मजाज का, उन्हें मरे हुये एक सो दस वर्श बीत चुके है। लेकिन इतनी उम्र में ही उन्होंने अपनी शायरी से नई नई ऊंचाईयां छू ली थी । फिल्म की कहानी उनके पैदा होने से उनके मरने तक की है ।
फिल्म के संगीत के लिये मैने पहले खय्याम साहब के बारे में हल्के से सोचा जरूर था लेकिन मैं उनके सामने सिर्फ खड़ा रहने भर की औकात रखता था उन्हें अप्रोच करने की बात तो बहुत दूर की कोड़ी है। तलत अज़ीज से पहले फिल्म के गानो की बात की गई थी लेकिन तब बतौर कंपोजर भी उन्हें अप्रोच किया तो वे काफी खुश हुये। वे इतने हैडसम हैं और इससे पहले एक्टिंग भी कर चुके है लिहाजा उन्हें फानी बदायुनी की भूमिका करने के लिये कहा तो उन्होंने मना करते हुये कहा कि मुझ पर पहले ही बहुत बड़ी जिम्मेदारी है ।

मजाज साहब का आज कितना बड़ा रूतबा है कि उन पर बनी बायोपिक फिल्म के म्यूजिक लांच में खय्याम,पंकज उधास,अनूप जलौटा, अल्का याज्ञनिक और मदी जैसे संगीत से जुड़े बड़े फनकारों ने शिरकत की जबकि इस समारोह का चीफ गेस्ट मैने मजाज के भांजे और प्रसिद्ध लेखक और गीतकार जावेद अख्तर को बनाने को इरादा करते हुये आमंत्रित किया था लेकिन अफसोस उन्होंने इस समारोह के प्रति जरा भी दिलचस्पी जाहिर नहीं की ।


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Mayapuri

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