INTERVIEW!! मैं एक अभिनेता और उससे अधिक एक इंसान के तौर पर और बेहतर बनना चाहता हूं – राहिल आज़म

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राहिल आज़म एक भारतीय टेलिविजन अभिनेता हैं जिन्हें स्टार प्लस पर हातिम में हातिम की भूमिका और लाइफ ओके के महाकुंभ में दानिश की भूमिका के लिये जाना जाता है।

राहिल आजम अब लाइफ ओके के शो ‘एक था चंदर एक थी सुधा’ में दिखायी देंगे जहां वे चंदर का किरदार निभाएंगे। शो का प्रसारण 21 सितंबर से होगा।

शो ‘एक था चंदर एक थी सुधा’ एक गैर-परंपरागत और अनूठी प्रेम कहानी है जो डॉ धर्मवीर भारती लिखित ‘गुनाहों का देवता’ पर आधारित है।

उनके इंटरव्यू के कुछ अंश –

आपने टेलिविजन इंडस्ट्री में सफलतापूर्वक 15 साल पूरे किये। अपनी यात्रा के बारे में बताइये?

मुझे खुशी है कि मेरे काम को पहचान मिली है। मुझे अपने किरदारों के लिये कुछ जबरदस्त प्रतिक्रियाएं मिली हैं चाहे वह हातिम का हातिम हो, गुलाल का वंश हो या फिर महाकुंभ का दंश। मुझे अच्छी और अर्थपूर्ण भूमिकाओं की तलाश आगे भी रहेगी।

मैंने पिछले 15 साल में बहुत कुछ सीखा है और मैं सीखना जारी रखूंगा क्योंकि जब कोई सीखना बंद कर देता है तो उसका विकास रुक जाता है। मैं एक अभिनेता और उससे अधिक एक इंसान के तौर पर और बेहतर बनना चाहता हूं।

rahil azam

नये शो एक था चंदर एक थी सुधा के बारे में बताइये?

यह शो डॉ धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ पर आधारित है। इलाहाबाद की पृष्ठभूमि में आधारित यह उपन्यास उत्साही और नटखट सुधा और जिम्मेदार चंदर की कहानी है जो सुधा के पिता के मार्गदर्शन में रिसर्च कर रहा है। सुधा और चंदर का रिश्ता दो नेकदिल दोस्तों का है जिन्हें पता ही नहीं है कि उनके रिश्ते का कोई नाम भी हो सकता है। जब सुधा के पिता द्वारा पसंद किये गये लड़के से शादी करने के लिये सुधा का मनाने की जिम्मेदारी चंदर को सौंपी जाती है तब दोनों को महसूस होता है कि वे एक दूसरे को कितना पसंद करते हैं। यह कहानी समाज द्वारा निर्धारित दायरों पर सवाल उठाती है और प्रेम के प्रति अवधारणा को पुनः परिभाषित करती है। चंदन और सुधा का प्यार शारीरिक निकटता के दायरे से परे है। यह प्रेम में आत्म बलिदान देने वाली, पवित्र और अद्भुत प्रेम कहानी है जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी यह छह दशकों पहले थी।

चंदर का किरदार किस तरह का है ?

युवा और प्रतिभाशाली शोध छात्र चंदर एक अनाथ है जो डॉ शुक्ला (सुधा के पिता) को अपना सबकुछ मानता है। वह सुधा के पिता के एहसानों तले दबा है और वे उसे अपने बेटे की तरह मानते हैं, चंदर सुधा को उसके पिता के पसंद के लड़के से शादी करने को बाध्य करता है। उसे लगता है कि कुछ और हुआ तो यह सुधा के पिता के साथ धोखा होगा। कहानी चंदर के प्यार के प्रति मानसिक जद्दोजहद और अपने आदर्शों से टकराव और उन्हें तोड़ने की कहानी है। वह कोई गलत नहीं है लेकिन वह अपने समय का एक मिलेजुले विचारों वाला युवा है।

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आपने इस किरदार के लिये क्या तैयारियां कीं ?

शो 1960 की पृष्ठभूमि पर आधारित है इसलिये पर्दे पर वैसा दिखने के लिये बहुत मेहनत करनी पड़ी। हमें खुद को उस वक्त में ले जाना पड़ा क्योंकि आज के समय में किरदारों के भीतर की जद्दोजहद को पकड़ना मुश्किल काम था। यह एक तरह से जॉब ट्रेनिंग की तरह था, मेरी तैयारियां सेट पर होती थीं। वहां के उच्चारण से लेकर, रोना, भावुक होना और अपनी लाइनें याद करना, यह सब मेरे लिये बड़े काम थे। मेरी क्रियेटिव टीम के साथ कई चर्चाएं और मीटिंग्स हुयीं लेकिन इसके परे मेरा किरदार मेरे भीतर हर शूटिंग डे के साथ धीरे धीरे मेरे भीतर उतरता गया।

शो से आपकी क्या उम्मीदें हैं ?

उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ बेजोड़ है और इसने अपना मानक स्थापित किया है। लेकिन जेन्यूइन कंटेंट और स्तरीय मनोरंजन के मामले में हम एक था चंदर एक थी सुधा के जरिये दर्शकों के बड़े समूह को आकर्षित कर सकेंगे। मुझे उम्मीद है कि दर्शक हमारे शो से जुड़ेंगे और इसकी तारीफ करेंगे।

यह शो टीवी पर चल रहे अन्य पीरियड ड्रामाज से कैसे अलग है ?

यह शो अन्य ड्रामा शोज से अपने कंटेंट, प्रदर्शन और ट्रीटमेंट की वजह से अलग है। एक आदर्शवादी बुद्धिमान युवक की प्यार को लेकर भ्रमित सोच को अच्छे से दिखाया गया है और किरदार के विकास की वजह से यह अन्य समकालीन शोज से अलग है। शूट करने और दिखाने से पहले इस शो के पीछे बहुत कुछ है।

 


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Mayapuri

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