INTERVIEW!! ‘‘वो शब्द मेरी सत्ताईस साल की मेहनत जाया कर देता है’’ – राजपाल यादव

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पिछले दिनों राजपाल यादव को लेकर अफवाह उड़ी कि वे नहीं रहे। इस पर राजपाल को कुछ परेशानी भी झेलनी पड़ी। लेकिन जब उनके स्वस्थ और कुशल होने की खबर मिली, तो अफवाह उड़ाने वालों पर हंसी भी आई और एक हद तक गुस्सा भी । खैर पिछले दिनों उनसे फिल्म ‘ बांके की क्रेजी बारात’ को लेकर ढ़ेर सारी बातें हुई जो कुछ इस प्रकार थी ।

शायद ये आपकी बारात हैं इसीलिये इतने झंझट हो रहे हैं ?

हमारी तो पूरी लाईफ ही झंझटों से गुजर रही है। जीवन में इंडिया जैसी स्पैलिंग आती ही नहीं चकोस्लोवाकिया जैसी स्पैलिंग ही सामने आती है। अब तो अगर सिपंल सी स्पैलिंग मिल जाये तो लगता है कि इसमें कुछ है ही नहीं। आप लोगों ने हमारी पंद्रह साल की जर्नी देखी हैं जब हम एक स्टूडेंट के तौर पर आये थे तो मुंगेरीलाल के भाई नौरंगी लाल के समय आप लोगों से मुलाकात हुई थी जो आज तक बरकरार है ।

इस लाइन में आने के बाद कितने संतुष्ट हैं ?

बहुत । बहुत ज्यादा।  मैं बहुत ही खुशनसीब हूं क्योंकि सौ साल के सिनेमा में कहीं न कहीं हमारा भी सहयोग याद किया जायेगा। बाकी तो जो मिल रहा है वो मेरे लिये बोनस है। लेकिन जब कोई मुझे कहता है कि आपने फलां फिल्म में बहुत अच्छी कॉमेडी की तो मुझे लगता हैं कि मुझे कोई आर्शीवाद दे रहा है लेकिन जब कोई बोलता है कि यह अच्छा कॉमेडियन हैं तो वो मुझे गाली जैसा लगता है यानि वो एक शब्द मेरी सत्ताईस साल की मेहनत जाया कर देता है। क्योंकि मैं कॉमेडियन नहीं अभिनेता हूं। मैं अगर चुप चुपके की कॉमेडी के लिये पसंद किया जाता हूं तो पहेली के भी दो सीन लोगों का याद आने चाहिये । बतौर कॉमेडियन नहीं बल्कि बतौर अभिनेता मेरी कम से कम बीस फिल्में ऐसी हैं जिन पर मुझे नाज़ है ।

Indian Bollywood actors Satyajeet Dubey and Rajpal Yadav (top) take part in a promotional event for upcoming Hindi comedy film ‘Bankey Ki Crazy Baarat’ in Mumbai on July 20, 2015. AFP PHOTO
Satyajeet Dubey and Rajpal Yadav ‘Bankey Ki Crazy Baarat’

अपने करियर में आप किसका ज्यादा योगदान मानते हैं ?

मेरे करियर को उभारने में राम गोपाल वर्मा का सबसे ज्यादा योगदान रहा है । मुझे लाइसेंस उन्होंने दिया आगे गाड़ी पर प्रैक्टिस करने का अवसर प्रियदर्शन और डेविड धवन ने दिया । वैसे प्रकाश झा ने मुझे दूरदर्शन के सीरियल में पहला मौका दिया था ।

आज हीरो सब कुछ कर रहा हैं लिहाजा कॉमेडियन खतरे में हैं ?

जैसे चोरों को बचाने की बात की जाती हैं आप तो उसी तरह कॉमेडियंस को बचाने की बात कर रहे हैं। देखिये मुख्य होता है मनोरंजन। ये जितने भी कार हैं जैसे कलाकार, कहानीकार, पत्रकार ये सब अपने अपने तरीके से मनोरंजन ही तो करते हैं फिर अकेले कॉमेडियन की पैरवी ही क्यों की जाये ।

बतौर निर्देशक फिल्म ‘अता पता लापता’ जैसी फिल्म से क्या सीखा ?

अपने जीवन में कुछ अच्छा काम कर पाया तो अता पता लापता बना पाया। ये फिल्म मेरे जीवन की ऐसी किताब है, जिसमें मुझे जीवन के सारे आयाम पढ़ने का मौका मिला। मैने इस फिल्म के लिये कहा था कि ये फिल्म अगर सौ करोड़ कमा ले फिर भी मैं डायरेक्टर नहीं हूं, ये एक रूपया भी न कमाये फिर भी मैं डायरेक्टर नहीं हूं। अगर आगे भी ऐसा सब्जेक्ट आया तो मैं जरूर उस पर काम करूंगा लेकिन मेरा ये जॉब नहीं है। मेरा जॉब है एक्टिंग करना और डायरेक्शन मेरा शौंक हैं।

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बांके की क्रेजी बारात को लेकर क्या कहेंगे ?

बहुत ही शानदार फिल्म है। दूसरे मैने कितनी ही शादियां देखी हैं और बहुत सारी में मैं शामिल भी हुआ हूं । लिहाजा मैं कहना चाहूंगा कि अगर एक हजार शादियां हैं तो एक हजार ही इंसिडेंट भी हैं। ये एक ऐसी फिल्म हैं जिसके बारे में आप अपनी बेटी, बेटे, पति और पत्नि के साथ खुलकर चर्चा कर सकते हैं। दूसरे ये फिल्म आपको सिनेमाघर में दो घंटा बिठाकर पूरी तरह से क्रेजी बनाकर दम लेगी। इसीलिये मैं इस फिल्म को लेकर एक्साइटिड हूं ।

 

 

 

 

 

 


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Mayapuri

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