INTERVIEW!! ‘‘मुझे फर्जी बातों से परहेज है’’ – ऋषि कपूर

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अपनी दूसरी पारी में ऋषि कपूर ने पॉजिटिव रोल्स के अलावा नेगेटिव भूमिकाओं पर भी हाथ आजमाये और वे खासे कामयाब भी हुए। इन दिनों वे हर तरह के रोल्स कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी इसी सप्ताह रिलीज हो रही फिल्म ‘ऑल इज़ वेल’ को लेकर बातें की।

फिल्म के माध्यम से किसे ऑल इज़ वेल कर रहे हैं ?

अब तो फिल्म रिलीज पर है इसलिये आप फिल्म देखकर सारी बातों का पता लगाएं। फिल्म को लेकर इतना जरूर कहना चाहूंगा कि यह एक पूरी तरह से पारिवारिक फिल्म है जिसे देखते हुये आप महसूस करेंगे कि इन दिनों मां बाप और बच्चों की सोच में खासा गैप आ चुका है। उस पर कैसे नियंत्रण पाया जाये। इतना जरूर है कि फिल्म देखने के बाद परिवारों में जो कहा सुनी होती हैं उस पर जरूर विचार किया जाएगा। एक परिवार फिल्म देखने के बाद फिल्म से काफी कुछ सीख लेकर निकलेगा।

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आप हमेशा मीडिया से बचने की कोशिश क्यों करते हैं ?

दरअसल मुझे फर्जी बातों से परहेज है। आज किसी भी फिल्म को लेकर उसके प्रमोशन पर कुछ ज्यादा ही ध्यान दिया जाने लगा है मैं इससे सहमत नहीं हूं क्योंकि आप किसी भी फिल्म के प्रमोशन पर फिल्म के बारे में जाने क्या क्या कहते हैं जबकि फिल्म में ऐसा कुछ नहीं होता या होता हैं तो उस तरह नहीं होता जिस प्रकार मीडिया के सामने उसे नरेट किया जाता है। अगर फिल्म दर्शक की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी तो डेफिनेटली वो फिल्म से संबधित लोगों को कोसता हुआ सिनेमा हाल से बाहर निकलता है। वैसे भी अपनी फिल्म के बारे में उसकी रिलीज से पहले मुझे ज्यादा बातें करना अच्छा नहीं लगता। वह मुझे काफी बोरिंग लगता है। सबसे बड़ी बात, जो सब कहते हैं मुझे भी तोड़ मरोड़ कर वही सब कहना है जो मैं नहीं कर सकता। यहां मैं फिल्म को लेकर सिर्फ इतना ही कहूंगा कि आपने श्रवण कुमार के बारे में सुना होगा, जिसने अपने अंधे माता पिता को चार धाम की यात्रा करवाई थी। यहां आपको आधुनिक श्रवण कुमार से मिलने का मौका मिलेगा इस भूमिका को अभिषेक बच्चन ने निभाया है, मैंने उसके पिता की भूमिका निभाई है, सुप्रिया पाठक मेरी पत्नि बनी हैं ।

आपने अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन पिता पुत्र, दोनों के साथ काम करने के बाद क्या महसूस किया ?

अमित जी के साथ मैने पांच फिल्में की, वह सभी सफल फिल्में थी। अब अभिषेक के साथ यह फिल्म करते हुये यही सोचा कि जिस प्रकार मेरी अमित जी के साथ बढि़या ट्यूनिंग थी उनके बेटे के साथ भी मैने वहीं ट्यूनिंग बनाने की कोशिश करते हुये काम किया ।

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अभिषेक से पहली दफा कब मिलना हुआ था ?

उन दिनों अभिषेक बहुत छोटा हुआ करता था यही कोई दस ग्यारह वर्ष का। वो अक्सर अपनी बहन श्वेता के साथ सेट पर आया करता था। मुझसे वह काफी घुलामिला था इसलिये हम दोनों काफी खेलकूद और बातें किया करते थे। आज वह अपने पिता की तरह इतना लंबा हो चुका है कि मुझे सिर उठाकर उससे बात करना पड़ती है। यानि कल का छोटा साधारण सा लगने वाला बच्चा आज इतना बड़ा और अच्छा एक्टर हो गया है। मुझे ये बात सोचकर अच्छी फिलिंग होती है कि मुझे पिता पुत्र दोनों के साथ काम करने का मौका मिला ।

असिन के साथ तो आप पहले भी काम कर चुके हैं लेकिन सुप्रिया पाठक के साथ ये आपकी पहली फिल्म है, सुना है कि आप उनके प्रशंसक भी रहे हैं?

मैं ये बात पहले भी कितनी ही बार कह चुका हूं कि सुप्रिया जी से मैं हमेशा इंप्रेस रहा हूं। दरअसल उनका अभिनय हमेशा मुझे प्रभावित करता रहा है। पिछले दिनों मैंने उन्हें रामलीला में नकारात्मक भूमिका में देखा तो लगा कि वह कितनी विलक्षण अदाकारा हैं। उनके चेहरे की संजीदगी ने मुझे हमेशा प्रभावित किया है। आसिन एक ऐसी संस्कारी लड़की हैं जो हमेशा अपने सीनियर्स का सम्मान करती है। मैं ऐसे कलाकारों के साथ बार बार काम करते रहना चाहता हूं।

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लेखक निर्देशक उमेश शुक्ला के बारे में क्या राय रखते हैं  ?

हर निर्देशक का अपना एक अलग अंदाज होता है । जैसे उमेश ऐसी फिल्में बनाते हैं, जो तर्कपूर्ण हो। उनकी फिल्म ‘ओह माई गॉड’  सभी को बहुत पसंद आई। वे कलाकार को सीन कुछ इस तरह बताते हैं कि सब कुछ आंखों के सामने  चलता फिरता नजर आने लगता है ।

 

 


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Mayapuri

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