INTERVIEW!! “पहले अपने लिए कुछ ऑक्सीजन ले लूं” – सैफ 

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सैफ एजेंट विनोद के बाद एक और एक्शन फिल्म ‘फैंटम’ में नजर आनेवाले हैं। उनको एक्शन करना बेहद पसंद है और कार रेस भी बहुत अच्छी लगती है।

सैफ ने दिल खोल कर अपनी माँ -शर्मीला टैगोर, पत्नी करीना कपूर अपने बच्चो एवं कुणाल कपूर (जीजाजी) के बारे में ढ़ेर सारी बातें हमारी संवाददाता लिपिका वर्मा के साथ शेयर की

दोबारा एक्शन फिल्म कर रहा हूं 

जी हाँ ! ‘एजेंट विनोद’ मेरी वजह से बनी थी। मुझे एक्शन करना बेहद पसंद है सो वो फिल्म करना मेरी दिली इच्छा थी। क़िन्तु यह फिल्म फैंटम में कबीर की वजह से कर रहा हूं उन्होंने इस फिल्म के लिए मुझे चुना है, और मैं साजिद के साथ भी काम करना चाहता था। कटरीना कैफ के साथ दोबारा काम कर रहा हूं। वो मेरे साथ फिल्म, ‘रेस’ में भी थी किन्तु अब वो एक अच्छी कलाकार बन चुकी  हैं और उन्होंने अपना करियर बहुत ही अच्छे ढंग से आगे बढ़ाया है इस बात की मुझे खुशी है।

फैंटम भी क्या एक्शन  फिल्म है ?

फैंटम को एक्शन की  श्रेणी में रखना ठीक नहीं होगा, बहुत मुश्किल होगा इस फिल्म के जोनर का आकलन करना। क्या यह एक थ्रिलर फिल्म है ? पर यदि एक्शन भी है तो वह ढ़िशूम ढ़िशूम वाला एक्शन नहीं कहा जा सकता इस फिल्म को। हाँ यह फिल्म एक लार्ज स्केल  पर बनी हुई एक बेहतरीन फिल्म है केवल एक्शन हो तो बहुत अलग फिल्म होती है। केवल एक्शन करने में बहुत थकावट महसूस होती  है। किन्तु मुझे एक्शन फिल्में बहुत अच्छी लगती है और मैं उनका हिस्सा बनना पसंद करता हूं।

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फैंटम टेररिस्ट फिल्म है क्या ? टेररिज्म आपके लिए क्या मायने रखता है ?

फैंटम फिल्म टेररिज्म पर आधारित फिल्म नहीं है।  पर जो कोई भी टेररिस्ट बनते है वो शायद किन्हीं  वजह से यह सब करने लगते हैं। मेरे हिसाब से उनको माँ बाप, भाई के प्यार के बारे में ज्ञान नहीं होता है। मैं खुशकिस्मत हूं मेरा परिवार है माँ है, पत्नी है और बच्चों का प्यार भी साथ में है, पैसे भी है। टेररिज्म को धर्म का नाम देना अच्छी बात नहीं है।

अभिनेताओं के लिए एक्शन सीन कितना जोखिम भरा होता है ?

बिल्कुल हम कोई भी चॉन्स नहीं ले सकते हैं। कुछ भी कभी भी हो सकता है। हम लकी मानते है अपने आपको।  आज तक कोई भी दुर्घटना नहीं हुई है  हमारे साथ। यह तो मानना होगा कि पहले से बहुत बेहतर तरीके अपनाये जा रहे है   एक्शन सीन्स फिल्माए जाते  समय। पर एक्शन जोनऱ वही सब होता है जो हुआ करता था। कुछ टेक्निकली हम और आगे बढ़ गए है।

हँसते हुए सैफ बोले,” एक्शन करते समय यदि मैं मर जाता हूं कोई फर्क नहीं पड़ता है क्यूंकि मेरे पास अच्छा खासा इंश्योरेंस है। एक्शन  करते हुए मैं अपने परिवार के  बारे में नहीं सोचता हूं। मैं कुछ स्वार्थी हूं -केवल अपने ही बारे में सोचता हूं। फिल्मों में क्रेजी एक्शन करना मुझे बहुत ही पसंद है।

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किताबों पर फिल्म बनाने की कितनी चाह है आपको ?

एक अच्छी किताब कभी कभी अच्छी फिल्म नहीं बन पाती  है जबकि एक बुरी  किताब अच्छी फिल्म बन सकती है। यह सब  व्यक्तिपरक है। मैंने मुंबई अवेंजर्स नहीं पढ़ी है किन्तु कबीर खान को सब मालूम  यह किताब उन्होंने पढ़ी हुई है। और इस  विषय पर कबीर को सारी जानकारी है। बॉर्न आइडेंटिटी  कर पाऊं  ऐसी मेरी इच्छा है।

आप अपनी फिल्म से कितना जुड़ते है और फिर अलगाव कैसे करते हैं किसी फिल्म से ?

हर फिल्म- आप जब शूटिंग शुरू करते हैं तो आप उस में एक एक्टर की हैसियत से जुड़ते हैं।  फिर कास्ट और डायरेक्टर भी होते  है फिल्म का हिस्सा। कुछ समय बाद यह सब लोग एक परिवार की तरह हो जाते है। हम जब एक फिल्म साथ साथ करते है तो उस में एक आम कारण हम सब को एक साथ जोड़ता है। उस फिल्म को जितना हम सब लोग समझ पाते  है कोई और नहीं समझ पायेगा, आपका परिवार भी नहीं।

आप अपने चरित्र को अपने साथ घर भी ले जाते हैं क्या ?

जी नहीं मैं एक कमांडो  की तरह घर पर व्यव्हार नहीं कर सकता हूं यदि वैसा किरदार निभा रहा हूं  तो। आप को उसे  कैमरे के सामने निभाना होता है आप को  वो चरित्र सही मायने में निभाना होता है। आप वैसे  नहीं बन जाते है रियल लाइफ में। हाँ यह जरूर है कुछ लाइन याद रह जाती है और वो हमारी ज़िन्दगी का कभी कभी हिस्सा भी बन जाती है।

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फिल्मों के अलावा जिंदगी क्या मायने रखती है आप के लिए ?

मेरे माता-पिता ने यह सिखाया  है हमे कि – ज़िन्दगी सिर्फ फिल्म और फिल्मी दुनिया के लोगों की नहीं होती है। एक आद बारी  पार्टी करना ठीक होता है। हमसे अगली पीढ़ी  को मिलना और उसके अलावा आम जनता लोगों से भी मिलना, देश -दुनिया  की जानकरी रखना  यह सब भी बहुत महत्वपूर्ण  होता है जीवन में, यही रियल लाइफ है।

अपनी माँ की फिल्में क्यों नहीं देखते आप?

जी हाँ मेरी माँ को बहुत ही बेहतरीन किरदार  निभाने को मिले किन्तु वो भावुक किरदारों के लिए जानी  जाती थी । और उनका रोना धोना मुझे पसंद नहीं आता था इसलिए मैं उनकी फिल्में ज्यादा देखता नहीं था। किन्तु अब मैं हिंदी फिल्मे काफी देखता हूं।

रियल सैफ भव्य है या फिर कलात्मक ?

मुझे भव्य शब्द कतई पसंद नहीं है। इस शब्द का मायने है हर इंसान के साथ सहज व्यव्हार करना किन्तु सही मायने में यह  शब्द गरीबों का दमन करता है। जब भव्य शब्द का उपयोग होता है तब मुझे अपने पिताजी  की याद आ जाती है एक स्वच्छ भावना  के तहत।  मैं अपने माता-पिता  दोनों का मिश्रण हूं।

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आप अपने बेड डे को किस तरह परिभाषित  करेंगे ?

बस बेड डे पर बेड गुणों का मिश्रण देखने मिलेगा जब की गुड डे पर अच्छे गुणों को देख पाते  है आप।

हंस कर बोले -जब कभी भी मेरे मष्तिष्क  में केमिकल लोचा हो जाता है तब उसे हम बैड डे  कहते है। मेरा  दिमाग थोड़ा क्रंकी (सठिया)  जाता है। मैं छोटी छोटी बातों पर इर्रिटेट हो जाता हूं । फिर अपने आप को वापस संतुलित करने के लिए मैं जीम चले जाता हूं। अपना संतुलन ठीक ठाक करने के लिए अच्छा खाना खा लेता हूं  और व्यायाम द्वारा  अपने आप को संतुलित  कर लेता हूं।

 आप ने अपने माता – पिता की किन गुणों को अपने अंदर पाया है ?

उनकी सीख, उनके मुल्य – वो दोनों बहुत ही जमीन से जुड़ा व्यक्तित्व रखते है। बहुत ही सरल  स्वभाव के हैं। बहुत अच्छे लोग है वो और मैं  भी उनकी तरह  बनने की कोशिश करता हूं हमेशा।  जो की मेरे खून में भी बस है। अपने बच्चों के बारे में यही  कह सकता हूं कि मैं बहुत ही खुशकिस्मत हूं कि वो मेरे लिए हर चीज़  आसान कर देते हैं। कई मर्तबा मैं यह भी सुनता  हूं कि कई एक्टर्स अपने बच्चों को लेकर बहुत ही मालिकाना हक़ जताते हैI  मेरा ऐसा मानना है कि हमें उनकी परवरिश करते समय  अवास्तविक तौर तरीके  भी नहीं अपनाने चाहिए। अपने बच्चों की देख रेख साधारण तरीके से करनी चाहिए। मुझे मेरी बेटी सारा का बॉयफ्रेंड अच्छा लगता है। हमारी ऐसी बॉन्डिंग बच्चों के साथ है  ।

करीना और सैफ दोनों को हम कब एक साथ  रील पर देखेंगे?

किसी ने हाल ही में करीना को एक नेगेटिव किरदार ऑफर किया था। हमें  एक साथ कुछ नहीं मिला है अभी तक, किन्तु यदि मिलता भी है तो कुछ अच्छा होगा तभी हम दोनों  एक साथ नजर आएंगे।

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शादी के बाद करीना आपकी जिंदगी में  लक लायी है क्या?

मैं उनके साथ शादी करके बहुत खुश हूं मेरी ज़िन्दगी में वो  बहुत सारी खुशियां ले आई हैं।

जर्नी के बारे में कुछ बातएं ?

मेरे ख्याल से समय बदला है और बदल रहा है ९० की दशक में मेरी कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर पिट गयी थी। आशा है की अब कुछ अच्छी फिल्में कर रहा हूं  मैं।

आपकी जर्नी अपनी माँ से कितनी मिलती जुलती  है ?

मेरी माँ को बहुत अच्छे रोल मिले और वह हमेशा ही इमोशनल (भावुक) किरदार किया करती। मुझे अब तक जितने भी  किरदार निभाने मिले है उन सब को  मैं मन से करता हूं। माँ बहुत ही निपुण  है अपने अभिनय में, जब कभी भी पर्दे पर आई सब को रुला गई।

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अच्छी फिल्म ना मिले तो  निराश होते है?

जी नहीं!  हर बारी यही  अपेक्षा करता हूं कि अच्छा किरदार करने को मिले। हमारा खुद का  प्रोडक्शन हाउस है तो हम कुछ बेहतर  करने की कोशिश  भी करते हैं।

आप की फिल्में ‘सलाम  नमस्ते’ और ‘हम तुम ‘बहुत ही अच्छी फिल्में रही वैसी फिल्मों में कब नजर आओगे आप?

आप जीवन में आगे निकल जाते है वह एक बहुत ही यंग फिल्म थी अब किरदार सूट नहीं करेंगे मुझे।

आपकी बिटिया सारा एक्टिंग करना चहती  है क्या?

चाहती होगी तो उसे कॉलेज की पढ़ाई पूरी करनी होगी। और उसने कुछ सोचा नहीं है अभी तक ।

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आपकी भोपाल प्रॉपर्टी का क्या मामला  चल रहा है कोर्ट में? 

बहुत सारे मामले  कोर्ट में चल रहे है लगभग १०० से भी ज्यादा और उस में बहुत  लोग लिप्त है। बड़ी फैमिली है और ढ़ेर सारे  कोर्ट केसेस फैमिली के बीच चल रहे है। मेरा ऐसा मानना है कि मैं फिल्मों में काम करके ज्यादा कमा  लूंगा।

कुणाल खेमू (जीजाजी) के साथ कब काम करते नजर आएंगे आप?

मैं फिलहाल अपने लिए कुछ प्लान कर रहा हूं। पहले मुझे कुछ ऑक्सीजन ले लेने दीजिये, हंस कर चलते बने छोटे नवाब

 


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Mayapuri

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