INTERVIEW!! टी वी पर स्टार क्रिएट करना आसान है – टीनू आनंद

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आप टी वी पर निर्देशक के तौर पर कब दिखेंगे हालांकि अब आप फिल्मों में एक्टिंग कर रहे है?

मैं निर्देशक के तौर पर वापसी नहीं करना चाहता हालांकि जब मैंने अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म शहंशाह के स्क्रिप्ट पर बहुत काम किया था। जब मैं अमिताभ बच्चन के साथ शहंशाह की शूटिंग कर रहा था उस समय अमिताभ बच्चन मेरे साथ फिल्म शुरू करना चाहते है और वो चाहते थे कि मैं उनकी ए.बी.सी एल प्रोडक्शन हाउस की फिल्म को डायरेक्ट करूं फिल्म जिसका नाम ‘एक आदमी’ था जो कि पूरी नहीं हुई कुछ लोगों ने अमिताभ बच्चन को सलाह दी कि उन्हें 35 साल पहले बूढ़े का किरदार नहीं निभाना चाहिए पर अब यह बिलकुल सही समय है बूढे व्यक्ति का रोल निभाने की क्योकिं लोगों ने उन्हें खुले हाथों से उसे गले लगा लिया है और अमिताभ को पीकू जैसी फिल्मों में अपने अभिनय के लिए उन्हें खूब प्रशंसा भी मिल रही है।

‘एक आदमी’ प्रोजेक्ट के बारे में कुछ और बताइए?

– ‘एक आदमी’ प्रकृति से सच्ची कहानी से प्रेरित है और मैं लेख से प्रेरित हू जो ‘इलेस्ट्रेट वीकली आॅफ इंडिया’ में प्रकाशित हुई थी इस लेख में मनी नाम का रिटायर साउथ इंडियन नौकरशाह है जो कि अपने परिवार से बहुत प्यार करता है पर उसे धीरे-धीरे यह महसूस होने लगा कि जैसे-जैसे वो बूढ़ा हो रहा है उसका परिवार उससे खीज सा रहा है व उसे अनदेखा कर रहा है पर एक दिलचस्प क्लाइमैक्स तब आता है जब मणिकनन अपनी हवेली को तोड़ता है जो कि उसने मेहनत से बनाई थी और खुद होटल में जा कर अपनें तरीके से रहने लगता है।

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अगर अमिताभ बच्चन आपकी फिल्म का हिस्सा बनने को तैयार हो जाते हैं तो क्या इसे लाॅन्च करने पर विचार करेगें?

ये बिल्कुल सही समय है ‘एक आदमी’ जैसी फिल्म को अमिताभ बच्चन को लाॅन्च करने के लिए मैं पूरी तरह से तैयार हू इस प्रोजेक्ट के साथ आगे बढ़ने के लिए और अमित जी ने यह भी कहा है कि वो तैयार है मेरी फिल्म का हिस्सा बनने के लिए। मै तो तैयार हूं कि कब मुझे एक इशारा दे।

आप अब एक अभिनेता के रूप में अपने कार्यकाल का आनंद लेने लगे है?

एक अभिनेता के रूप में मुझे काम करने में बहुत मजा आ रहा है साथ ही मैं इस बात को भी मानता हूं कि मैं स्क्रिप्ट को पढ़ने में बहुत समय ले रहा हूं। इससे पहले मैंने इतना ध्यान नहीं दिया था इन सब पर जब मैं डायरेक्शन के क्षेत्र में था।

आप फिल्मों से अचानक क्यों गायब हो गए थे? और एक अभिनेता के रूप में आपकी आखिरी फिल्म ‘क्लब 60’ रही।

मैनें फिल्मों से सन्यास नही लिया था और न ही उस वजह से किसी दृश्य से गायब हुआ था जब मैंने फिल्म मेजरसाहब डायरेक्ट की थी तब मैंने सोचा था कि इस फिल्म के बाद मैं विश्राम करूंगा।

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आप टी वी शोज के साथ भी जुड़े तो कैसा रहा आपका अनुभव?

मैं परेश रावल के टी वी सीरियल ‘लागी तुझसे लगन’ का हिस्सा बना था साथ ही मुझे जो रोल मिला उसमें मुझे काफी आनन्द आया। मैंने एकता कपूर के शो ‘कही तो होगा’ में भी काम किया और मैं धन्यवाद करता हूं सीरियल का क्योंकि इन सीरियल की वजह से मैं खुद का घर खरीद पाया।

यहा तक की आज आप फिल्म शंहशाह के लिए जाने जाते हैं व आपने बहुत सी फिल्मों में काम भी किया साथ ही फिल्मों को डायरेक्ट भी किया?

हां, यह अद्भुत है पर सच है कि मैं आज भी अपनी फिल्म शंहशाह के लिए जाना जाता हूं। यहां तक की मैंने ये इश्क नहीं आसान की कहानी नही लिखी इसकी कहानी कमलेश्वर द्वारा लिखी गई है। बहुत से लोग जो इस जनरेशन से तालुक्क रखते हैं उन्हें यह सच नहीं पता कि बहुत से आलोचनात्मक डायलाॅग मेरे पिता इंद्र राज आनन्द द्वारा लिखे गए है। यह बड़ी दिलचस्प बात है कि मैंने अपने पिता को कहा कि आप फ्लावरी भाषा में डायलाॅग्स लिखे ताकि लोगो को वो समझ आ जाए। यहा तक कि आज भी लोगो को फिल्म का डायलाॅग ‘रिश्ते में तो हम तु्म्हारे बाप लगते है नाम है शंहशाह’ याद है।

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एक डायरेक्टर के रूप में आप अपना वर्णन किस तरह से करेंगे?

मैं वो डायरेक्टर नहीं जो फिल्म के सेट पर एक्टर्स को कहे कि अपने हाथ में पेन लो और डायलाॅग्स लिखो।

आपको मनमोहन देसाई के बारे में क्या पसंद है, जो कि अच्छे डायरेक्ट  के रूप में जाने जाते है?

मेरी नजर में मनमोहन देसाई बहुत ही लाजवाब डायरेक्टर थे क्योंकि वो  दिल से आॅडियन्स की नब्ज को अच्छी तरह से जानते थे एक बार उन्होंने मुझसे कहा था कि हिन्दी सिनेमा एक जंगल है और मुझे एक्टर को मटन व वेजिटेरियन देना होता है। मेरे पिता द्वारा अब तक के जितनें भी डायलाॅग्स लिखे गए चाहे वो कालिया फिल्म का हो या शंहशाह सभी डायलाॅग्स आज भी आइकाॅनिक माने जाते हैं।

आपने अमिताभ बच्चन के साथ कितनी फिल्में डायरेक्ट की है, जो कि अच्छे के रूप में जाने जाते हैं?

अमिताभ बच्चन के साथ मैंने अपने एक्टिंग करियर की शुरूआत के.ए अब्बास की फिल्म ‘सात हिदुस्तानी’ से की और यह मेरा सौभाग्य है  कि मैंने अमित जी के साथ शंहशाह, कालिया, मैं आजाद हूं, मेजर साहब जैसी फिल्में में डायरेक्टर के रूप में काम किया।

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आपको ऐसा क्यों लगता है कि आपकी फिल्म ‘दुनिया मेरी जेब में’ बाॅक्स आॅफिस पर नहीं चल पाई?

अगर पहले का समय याद करे व पीछे पलट कर देखे तो मुझे यह महसूस होता है कि शशि कपूर फिल्म के किरदार के लिए बिलकुल भी सही नहीं थे और मैंने फिल्म को शूट भी तब किया जब शशि जी बहुत व्यस्त थे वह एकसाथ पांच फिल्में में काम कर रहे थे जिस वजह से वह एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो के चक्कर लगाते थे। यहा तक की मैं भी उस समय नीतू सिंह व अमिताभ के साथ कालिया फिल्म बना रहा था और मैं यह मानता हूं कि मेरा एक्टर की कास्टिंग को लेकर आईडिया गलत था। इस फिल्म के लिए मुझे 5 साल लग गए और  यह डायरेक्टर के रूप में मेरी असफलता थी।

आपको डायरेक्शन में हाथ आजमानें का ख्याल कहां से आया?

अगर मै आज अच्छा डायरेक्टर माना जाता हू तो यह सिर्फ और सिर्फ मेरे पिता इंद्र राज आनन्द की वजह से होगा। क्या आप जानते हैं कि मेरे पिता ने फिल्म डायरेक्ट की थी जिसमें नूतन व राज कपूर थे जो सुभाष देसाई निर्मित थी (मनमोहन देसाई के भाई) पर फिल्म आगे नहीं बढ़ पाई क्योंकि नूतन जी प्रेग्नेंट हो गई थी।

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पूरी तरह से डायरेक्शन के क्षेत्र में आने से पहले आपको डायरेक्शन के लिए किसने असिस्ट किया था?

यूनिवर्सिटी में हम पढ़ने जाते हैं न की प्रिंसिपल बनने उसी तरह राजकपूर व सत्यजीत राॅय के बेटे दूसरे राजकपूर व सत्यजीत नहीं बन सकते। मैंने सत्यजीत राॅय के साथ इसलिए काम किया था क्योंकि वो मास्टर थे। मैनें उन्हें 5 फिल्मों ‘गुपी गाइन बाघा बाइन’, ‘प्रतिद्वदीं’, ‘अरण्येर दिनरात्रि’, ‘सीमा, सीमाबद्ध’ में असिस्ट किया।

क्या आप टी वी शो डायरेक्ट करने की कोई योजना बना रहे हैं?

टी वी पर स्टार क्रिएट करना आसान है व मेरे पास टी वी के लिए स्क्रिप्ट भी है जो 30 साल पहले मैंने लिखी थी। यह रियलिटी व फिक्शन शो है जिसमें दर्शक यह तय करेंगे कि पात्र किस तरह से व्यवहार करेंगे हालांकि यह शो दूरर्दशन के लिए लिखा गया था पर अब यह शो कर्लस पर प्रसारित होगा।

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Mayapuri