टीवी इन्टरव्यू मुझे अब लोगों को पहचानना आ गया है – आरती राणा

1 min


बॉलीवुड में विदेश से सिर्फ विदेशी लड़कियां ही नहीं आती, बल्कि एनआरआईज भी अच्छी खासी संख्या में यहां अपनी किस्मत आजमाने आती है । इन्हीं में आरती राणा एक नाम है। आरती गुजरात में पैदा हुई लेकिन स्कूलिंग के बाद वह लंदन में शिफ्ट हो गई, आगे की पढ़ाई उसने वहीं की। एक्टिंग का कीड़ा उसे बचपन से ही था इसलिये बचपन से ही उसने एक्टर बनने का ऐम बना लिया था । एक दिन पिता की मर्जी के खिलाफ उसने मुंबई की उड़ान भर ली।  अदालत, प्रितम प्यारे तथा चक्रवर्ती सम्राट अशोक जैसे धारावाहिकों के बाद इन दिनों कामेडी शो ‘ यारों का टशन’ में दिखाई दे रही आरती, अपनी अभी तक यात्रा का जिक्र वह कुछ इस प्रकार करती है।

अभिनय की शुरूआत

जैसा कि मैने बताया, मुझे बचपन से ही एक्टिंग का कीड़ा था, इसीलिये मैं सात समंन्दर पार मुंबई बॉलीवुड में आ गई । यहां आने के बाद मैने सबसे पहले अनुपम खेर एक्टिंग स्कूल से डिप्लोमा लिया लेकिन मैं सिर्फ डिप्लोमा से संतुष्ट नहीं थी इसलिये मैने कर्म कला ग्रुप के साथ थियेटर करना शुरू कर दिया । इसके अलावा मैं दूसरे ग्रुप्स के साथ भी जुड़ते हुये नाटक करने लगी । हमारे नाटक एनसीपी या रंग शारदा आदि थियेटर्स में होते रहते हैं । इसके बाद मुझे विज्ञापन फिल्में भी मिलने लगी। इस दौरान मुझे कंगना रनौत की फिल्म ‘रज्जो ’ में कंगना के दोस्त की भूमिका मिली । उसी दौरान मैने टीवी पर सिंगल एपिसोड करने शुरू कर दी । जिसके तहत अदालत के मैने तीन एपिसोड किये । उन्हीं दिनों मुझे ‘देवो के देव महादेव’ का पायलेट करने का मौंका मिला लेकिन बाद में मुझे वह भूमिका ऑफर नहीं हुई जो मैने पायलेट में की थी इसलिये मैने उसे न करना बेहतर समझा और किसी और मौंके का इंतजार करने का फैसला किया । संघर्ष जारी था । फिर मुझे कॉमेडी शो ‘ प्रितम प्यारे ’ मिला, वहां मैं टीकू तलसानिया की भांजी की भूमिका में थी । टीकू जी से मुझे काफी कुछ सीखने को मिला  । इसके बाद मुझे मेगा शो चक्रवर्ती समा्रट अशोक मिला। उस शो मैं मैने बेला नामक लड़की का किरदार निभाया । दरअसल जिन दिनों यह शो लीप ले रहा था उसी दौरान मैने इसके लिये ऑडीशन दिया था, जो चैनल को बहुत अच्छा लगा, इसलिये उन्होंने फौरन मुझे बेला के महत्वपूर्ण रोल में सलैक्ट कर लिया ।

भूमिका

बेला की भूमिका के बारे में अगर मुझे बताना पड़ा तो मैं एक उदाहरण देना चाहूंगा । अगर आपने मूवी वीराजारा देखी है तो आपने देखा होगा तो उसमें प्रिति जिंटा बिना अपनी सहेली दिव्या दत्ता के कोई काम नहीं करती । इसी तरह अशोका में भी राजकुमारी बेला के बिना अधूरी है । बचपन से ही वह कुछ भी करने से पहले बेला से जरूर सलाह मशवरा करती है, उनकी बॉडिंग दो बहनों की तरह है। मेरा ट्रैक हाल ही में खत्म हुआ है । इसके बाद मैं खाली बैठी थी तभी मुझे एक अन्य शो ‘यारो का टशन’ में एक रोल का ऑफर मिला, मैने वह रोल बिना सुने कर लिया, क्योंकि मैं खाली नहीं बैठना चाहती थी। यहां  मैं शो के मुख्य किरदार यारो के दोस्त की गर्लफ्रेंड की भूमिका कर रही हूं ।

संंघर्ष के अनुभव

चूंकि मैं बाहर से हूं इसलिये यहां न तो मेरा कोई सपोर्टर था न ही कोई गॉड फादर। आप कह सकते हैं कि यहां स्ट्रगल के दौरान ही मुझे दुनियादारी समझ में आई । आप मेरे जैसी लड़की को पर्दे पर देख रहे हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिये मुझे कितने पड़ाव पार करने पडे, कैसे कैसे लोगों से सामना हुआ । इसके बाद ही मुझे अच्छे बुरे का पता लगा, मैं पहले से ज्यादा मैच्योर हां गई हूं । सबसे बड़ी बात कि मुझे अब लोगों को पहचानना आ गया । सब कुछ होने के बाद भी मैं लकी हूं कि महज छह महिने में ही मुझे इतना काम मिलने लगा।

फिल्म और टीवी

बेशक आज फिल्म और टीवी में कुछ ज्यादा फर्क नहीं रह गया क्योंकि आज अगर टीवी  कलाकार फिल्में कर रहे हैं, वहीं अमिताभ बच्चन, सलमान खान, शाहरूख खान से लेकर अनिल कपूर तक टीवी पर दिखाई दे रहे हैं। लेकिन जंहा तक मेरी बात हैं, बावजूद इसके मैं फिल्मों के फेवर में हूं क्योंकि मुझे लगता है कि आज भी फिल्मों की रीच ज्यादा है। आपने देखा होगा कि यंग जनरेशन टीवी से कहीं ज्यादा फिल्में पंसद करते हैं । सबसे अहम् कि टीवी की अपेक्षा फिल्मों में आपके रोल यादगार बन जाते हैं।

SHARE

Mayapuri