पर्दे के पीछे: सिम्पल कपाड़िया नखरे किस लिए?

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मायापुरी अंक, 57, 1975

मेरे एक मित्र जर्नलिस्ट ने नये चेहरों पर एक लेख लिखने के सिलसिले में सिम्पल कपाड़िया को टेलीफोन किया तो सिम्पल के पिता चुन्नी भाई ने बातचीत की पूछने पर कहने लगे सिम्पल बहुत ही बिजी हैं, शूटिंग पर शूटिंग चल रही है (आप दो दिन बाद फोन कीजिए)।

दो दिन बाद फोन किया तो फोन बिगड़ा हुआ था। अगले दिन फोन पर बातचीत हुई तो कहने लगे, कल सिम्पल इंटरव्यू के लिए इंतजार करती रही। अब तो वह दस दिन के बाद ही मिल सकती है। आप दस दिन के बाद फोन कीजिए, उस जर्नलिस्ट ने साफ कह दिया कि वह दस दिन इंतजार करने की जगह किसी और नये चेहरे का इंटरव्यू कर लेगा।

यह इंटरव्यू एक प्रसिद्ध पत्रिका के लिए था। अब चुन्नी भाई चौंके। झट से पत्रिका के सम्पादक को टेलिफोन किया और शिकायत करने लगे। सम्पादक महोदय ने उन्हें बता दिया कि यह उसी जर्नलिस्ट पर निर्भर करता है जिसका चाहे वह इंटरव्यू करे, वह दखल नहीं देंगे।

चुन्नी भाई शायद यह भूल गये थे कि इंटरव्यू सिम्पल कपाड़िया का था। बड़ी बेटी डिम्पल का नही। यह स्टार्स जैसे नखरे अभी से किस लिए। अभी तो मंजिल बहुत दूर है चुन्नी भाई?


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Mayapuri

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