INTERVIEW!! ‘‘अपनी असफल फिल्मों के लिए मैं ही दोषी हूं..’’ रणबीर कपूर

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‘सांवरिया’ से लेकर अब तक अपने आठ साल के करियर में रणबीर कपूर ने ‘वेकअप सिड’, ‘रॉक स्टार’, ‘बर्फी’, ‘यह जवानी है दीवानी’ जैसी कुछ बेहतरीन फिल्में की। लेकिन ‘बेशरम’ के बाद उनका करियर निंरतर गिरता ही चला गया। ‘बेशरम’ के बाद ‘रॉय’, ‘बॉम्बे वेलवेट’ जैसी असफल फिल्मों ने उनके करियर पर बहुत गलत असर डाला। पर अब रणबीर कपूर को इम्तियाज अली निर्देशित फिल्म ‘तमाशा’ से काफी उम्मीदें हैं और उनको यकीन है कि इस फिल्म के बाद उनके करियर को एक बार फिर नई गति मिलेगी।

फिल्म की सफलता असफलता का किसी भी कलाकार के करियर पर कितना असर पड़ता है ?

बहुत असर पड़ता है। मेरी पिछली कुछ फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर न चलने से मेरे स्टारडम पर काफी असर पड़ा है। दर्शकों ने जो जिम्मेदारी मुझ पर सौंपी, उसे शायद मैं सही ढंग से निभा नहीं पाया। दर्शकों का मानना है कि रणबीर कपूर अच्छी फिल्में करता हैं और अच्छा कलाकार है। पर मेरी पिछली फिल्मों से दर्शकों को लगा कि मैंने अच्छा काम नहीं किया। मैं अपनी इस गलती को स्वीकार करता हूं। अब मैं ज्यादा जिम्मेदारी के साथ फिल्मों का चयन कर रहा हॅूं, जिससे दर्शकों का भरपूर मनोरंजन हो सके। मुझे उम्मीद है कि फिल्म ‘तमाशा’ से दर्शकों की शिकायत दूर करने में मैं सफल हो सकूंगा।

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क्या आपकी नयी फिल्म ‘‘तमाशा’’ से दर्शक रिलेट कर पाएंगे ?

जरुर इस फिल्म से दर्शक ज्यादा रिलेट करेंगे। इस फिल्म में मेरा देव का जो किरदार है, वह सिस्टम में फंसकर रोबोट बन चुका है। हमारा समाज, परिवार, माता पिता हम पर एक दबाव डालते हैं, जिसकी वजह से हम एक रोबोट की तरह काम करने लगते हैं। स्कूल में होते हैं, तब गणित में अच्छे नंबर लाने का दबाव होता है। फिर कॉलेज की पढ़ाई, उसके बाद अच्छी नौकरी की तलाश। यह जो सिस्टम बन गया है, उसकी वजह से हम एक मीडियाकोर इंसान बन जाते हैं। जबकि देव की ही तरह हर इंसान का अपनी जिंदगी में अपना एक सपना होता है, एक आकांक्षा होती है। वह कुछ खास काम करना चाहता है या कुछ खास बनना चाहता है। पर सिस्टम में फंसकर हम सब अपने सपनों, अपनी इच्छाओं को भूल जाते हैं। समाज के दबाव के मद्देनजर हम अपने मन को मारकर काम करने लगते हैं। पर तभी हमारी जिंदगी में कैटलिस्ट के तौर पर एक इंसान आता है, जो प्यार या दोस्त हमें याद दिलाता है कि हमारे अंदर एक और इंसान है। यदि हम वैसा बनना चाहेंगे या वैसा बनने की कोशिश करेंगे, तो हमारी जिंदगी और ज्यादा खुशहाल बन जाएगी। अन्यथा रोबोट बनकर पूरी जिंदगी बिताएंगे। फिर रोबोट की जिंदगी बिताते बिताते इस संसार से विदा ले लेगें।

इम्तियाज अली के साथ आपकी यह दूसरी दीपिका पादुकोण के साथ तीसरी फिल्म है। इसलिए आपने ‘तमाशा’ कर ली?

देखिए, ‘तमाशा’ करने की इन दोनों वजहों के साथ साथ दूसरी वजहें भी रही। इम्तियाज अली ने मेरे करियर की अति महत्वपूर्ण फिल्म ‘रॉकस्टार’ निर्देशित की थी। इस फिल्म की वजह से मुझे दर्शकों का प्यार मिला। कई अवॉर्ड मिले। इस वजह से इम्तियाज अली के साथ दोबारा काम करना चाहता था। इम्तियाज अली की खासियत है कि वह फिल्म तभी बनाते हैं, जब उनके पास कुछ कहने को होता है। इम्तियाज अली हमेशा अपनी फिल्म के माध्यम से लोगों को कुछ देने की कोशिश करते हैं। उनकी कोशिश होती है कि उनकी फिल्म की वजह से दर्शकों की जिंदगी बेहतर हो जाए। ‘तमाशा’ भी सामाजिक तौर पर रिलीवेंट होने के साथ साथ एक प्रेम कहानी वाली फिल्म है। फिल्म की कहानी व किरदार दोनों मुझे बहुत पसंद आए।

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‘तमाशा’ के अपने देव के किरदार को किस तरह से परिभाषित करेंगे ?

देव जब स्कूल जाता है, तो गणित पढ़ने में उसका मन नहीं लगता। उसका मन कहानियों को सुनने में लगता है। वह जेब खर्च के लिए मिलने वाले पैसों को लेकर उस इंसान के पास जाता है, जो उस पैसे के बदले कहानियां सुनाता है। देव को राम, सीता, भगवान कृष्ण, वासुदेव आदि की कहानियां सुनना पसंद है। वह कहानियों में डूब जाता है। पूरी तरह से मगन हो जाता है। पर बड़े होते होते उसे अपने पिता के दबाव के तहत गणित में अच्छे नंबर लाने, इंजीनियरिंग कॉलेज की पढ़ाई करने, फिर मनेजमेंट की पढ़ाई के बाद अच्छी नौकरी की तलाश के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। इस तरह से वह सिस्टम का एक कछुआ बन जाता है और वह अपने आपको ही भूल जाता है। पर एक दिन देव की जिंदगी में कैटलिस्ट बनकर दीपिका किरदार तारा आता है। तारा उसे याद दिलाती है कि, ‘तुम यह नहीं हो। बल्कि कुछ और हो और जब वह बन जाओगे, तो ज्यादा सफल बन जाओगे और खुश रहोगे।’ इस तरह से यह फिल्म हर इंसान को इस बात के लिए पे्ररणा देगी कि उन्हें उस काम को भी करना चाहिए, जिसे उन्होंने लंबे समय से मन के किसी कोने में दबा कर रखा हुआ है।

‘तमाशा’ को क्रोशिया में फिल्माने की वजह ?

फिल्म की कहानी में एक अध्याय ऐसा है, जिसकी वजह से फिल्म क्रोशिया में जाती है, इसे अभी से बताना अच्छा नहीं होगा। फिल्म में देखेंगे, तो ज्यादा मजा आएगा। देव और तारा दोनों कुछ अलग परिस्थितियों में भारत से बाहर क्रोशिया में मिलते हैं। दोनों वहां अपनी अपनी जिंदगी को भूलकर कुछ समय बिताने का निर्णय लेते हैं। इन दोनों के बीच यह तय होता है कि क्रोशिया में वह जो कुछ भी करेंगे या उनके बीच जो कुछ भी होगा, उसे वह किसी को भी नहीं बताएंगे। फिर वहां वह डॉन या मोना डार्लिंग कुछ भी बनकर रहते हैं। तो वह क्रोशिया में जो सात दिन बिताते हैं, वह मजेदार हैं। उसके बाद तीन साल बीत जाते हैं। फिर कहानी अलग रूप लेती हैं।

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क्रोशिया में फिल्माए गए गाने में आपने देवानंद की नकल की है। इसके लिए कोई खास तैयारी करनी पड़ी?

मुझे लगता है कि हर कलाकार देवानंद से प्रभावित है। उनके फिल्मी पे्रम का अंदाज, उनका मैनेरिज्म, संवाद अदायगी का लहजा सबको प्रिय है। और उसकी झलक हम सभी कलाकारों में कही न कहीं नजर आती है। मैं मीमिक्री कलाकार नही हूं। इसलिए मेरी कोशिश रही कि परदे पर कही भी मीमिक्री नजर ना आए। या कहीं भी बचकानापन नजर ना आए। इसके लिए मैंने देवानंद की कई फिल्में देखी और बारीकी से उनके मैनेरिज्म आदि को आब्जर्व किया। उनके मैनेरिज्म को अपनाने की कोशिश की। मैंने देव साहब की एक्टिंग सम्मान जनक तरीके से की है। कहीं भी उनका मजाक नहीं उड़ाया। क्रोशिया में मेरा किरदार देवानंद बनकर मजा लेता है।

‘रॉक स्टार’ के इम्तियाज अली और ‘तमाशा’ के इम्तियाज अली में क्या फर्क आया ?

बहुत फर्क है। ‘रॉक स्टार’ एक संजीदा फिल्म थी। जबकि ‘तमाशा’ एक सामाजिक संदेश वाली फिल्म है। ‘तमाशा’ की मूल थीम प्रेम कहानी है। इम्तियाज अली की सबसे बड़ी खूबी है कि वह प्रेम कहानी को भी हर फिल्म में बहुत अलग अंदाज में पेश करते हैं। फिर चाहे वह फिल्म ‘जब वी मेट’ हो या ‘रॉक स्टार’ हो या ‘हाईवे’ हो। ‘रॉक स्टार’ में भी एक प्रेम कहानी थी।

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दीपिका पादुकोण के साथ तो आपकी यह तीसरी फिल्म होगी?

‘बचना ऐ हसीनो’ और ‘यह जवानी है दीवानी’ के बाद ‘तमाशा’ दीपिका पादुकोण के साथ मेरी तीसरी फिल्म है। हमारी ट्यूंनिंग हर फिल्म में अच्छी रही। वह एक बेहतरीन प्रोफेशनल कलाकार हैं।

आपकी फिल्म ‘जग्गा जासूस’ काफी समय से बन रही है। क्या इसकी वजह भी आपकी पिछली फिल्मों का असफल होना हैं?

मुझे ऐसा नहीं लगता। यह फिल्म रूकी हुई नही है। इस पर लगातार काम हो रहा है। फिल्म ‘जग्गा जासूस’  मेरे लिए और अनुराग बसु दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह संगीत प्रधान फिल्म है। इसके निर्माण में काफी समय लग रहा है। ‘जग्गा जासूस’ की शूटिंग के बीच में मैंने ‘बॉम्बे वेलवेट’ पूरी की। ‘तमाशा’ पूरी की। करण जौहर की फिल्म ‘ए दिल है मुश्किल’ की अस्सी प्रतिशत शूटिंग पूरी की। पर जग्गा जासूस में समय लग रहा है। क्योंकि इसमें बहुत सारा काम करना है।

 


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Mayapuri

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