INTERVIEW!! ‘‘बाजीराव के लिए मस्तानी सोलमेट थी’’ – रणवीर सिंह

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वक्त बड़ा बलवान होता है, एक वक्त वह था जब संजय लीला भंसाली ने सलमान खान और ऐश्वर्या राय बच्चन को लेकर अपनी अति महत्वाकांक्षी फिल्म ‘‘बाजीराव मस्तानी’’ बनानी चाही थी, पर फिल्म नही बन पायी थी। पूरे बारह साल तक वह इस फिल्म को बनाने का सपना देखते रहे। अंततः वह ‘‘बाजीराव मस्तानी’’ को बनाने में कामयाब रहे हैं। अब यह फिल्म 18 दिसंबर को रिलीज होने जा रही है, मगर इस फिल्म में रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण के साथ प्रियंका चोपड़ा हैं।

क्या आपका कैरियर बहुत अच्छा जा रहा है ?

ईश्वर की अनुकंपा से सब कुछ सही ढंग से हो रहा है, मेरा कैरियर बहुत ही अच्छे मोड़ पर है। जिसकी वजह से मैं बहुत खुश भी रहता हूं। आज मेरा कैरियर जिस मुकाम पर पहुंचा है, उसे पाने के लिए मैंने बड़ी कड़ी मेहनत की है। इसलिए मैं हर अवसर को समर्पित भाव से स्वीकार करता हूं।

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आपके लिए ‘बाजीराव मस्तानी’ के बाजीराव पेशवा का किरदार निभाना कितना आसान रहा?

यह एतिहासिक चरित्र है, तीन सौ साल पहले का चरित्र है। इसे निभाना मेरे लिए बहुत बड़ी चुनौती रही। हम शहरों में पले बढ़े मॉडर्न लोग हैं। हमारी चाल ढाल, बात करने का लहजा सब कुछ शहरी युवकों जैसा ही है, इसलिए मुझे खुद को बाजीराव बनाने के लिए बहुत कुछ बदलना पड़ा। मैंने तीन सप्ताह के लिए घर से बाहर एक होटल के कमरे में खुद को बंद कर लिया। मोबाइल, लैप टॉप सब कुछ दूर रखा। होटल के कमरे में रहकर एक्सरसाइज करते हुए अपने आपको बाजीराव में ढाला, मराठी फिल्में देखी, मराठी उच्चारण दोष खत्म करने की ट्रेनिंग देने के लिए मराठी भाषा के कोच आते थे। तीन सप्ताह के अंदर मैंने 300 साल पहले लोग जिस तरह रहते थे, उनकी चाल ढाल, उनके बात करने के लहजे आदि को आत्मसात कर खुद को पूरी तरह से बदला। फिर शूटिंग शुरू होने से पहले सिर मुंडवाया, कई कठिन एक्शन सीन किए और एक्शन सीन की शूटिंग करते हुए मेरा एक कंधा टूट गया था, जिसकी वजह से मुझे ढाई माह तक घर पर बैठना पड़ा था।

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वर्क आउट करने के अलावा भी कोई खास ट्रेनिंग लेनी पड़ी ?

सबसे बड़ी बात यह है कि भंसाली जी अक्टूबर 2014 में इसकी शूटिंग शुरू करने वाले थे। इस वजह से मुझे सिर्फ तीन सप्ताह का ही समय बाजीराव के किरदार की तैयारी करने को मिला। इन तीन सप्ताह में मैंने चरित्र पर काम किया था, स्किल यानी कि तलवार बाजी,घुड़सवारी आदी सीखने के लिए समय नहीं मिला, इसलिए सबसे पहले मैने तलवारबाजी की ट्रेनिंग और शूटिंग एक साथ की। हर दिन सुबह पांच बजे से सात बजे तक मैं तलवारबाजी की ट्रेनिंग लेता था, उसके बाद सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक फिल्म की शूटिंग करता था और शाम को सात बजे से रात 9 बजे तक तलवारबाजी सीखता था। इसी तरह मैंने कुछ समय बाद घुड़सवारी भी सीखी, मेरे लिए ‘बाजीराव मस्तानी’ की शूटिंग करना शारीरिक व दिमागी दोनों तरह से थका देने वाला रहा, मैंने बहुत मेहनत की।

कंधा टूटने के बाद किस मनः स्थिति से आप गुजरे थे ?

मैं पूरी तरह से टूट गया था, जैसा कि मैं पहले ही आपसे कह रहा था कि मेरी निजी ताकत व मेरी खुशी सब कुछ मेरा स्वस्थ शरीर ही है। इसलिए कंधा टूटने पर बहुत निगेटिव असर हुआ। इससे पहले ‘लुटेरा’ और ‘गुंडे’ के दौरान भी मुझे चोट लगी थी। उस वक्त थोड़ा निगेटिव असर हुआ था पर इस बार तो मैं चोट लगने के साथ ही मैं अंदर से टूट गया था। मैं फिल्म के एक्शन सीन को ‘किलिंग मशीन’ की तरह अंजाम दे रहा था। मैं अपने अब तक के जीवन में हमेशा स्वस्थ और फिट रहा हूं। मैं शुरू से ही एक एथलीट की जिंदगी जीता आया हूं या यूं कहें कि मैंने अपनी अब तक की जिंदगी एक योद्धा की तरह जी है। एक्शन सीन के फिल्मांकन के अंतिम दिन अंतिम सीन के वक्त यह हादसा हुआ। घोड़े से गिरते समय खुद को संभालने के चक्कर में मैंने हाथ का सहारा लिया, पर संभल नहीं पाया, गिरते समय कंधे के पास कट से आवाज आयी। उस वक्त हम रेगिस्तान में शूटिंग कर रहे थे, दो घंटे के समय के बाद हम अस्पताल पहुंचे। जांच के बाद जब डॉक्टरों ने कहा कि गंभीर चोट है, ऑपरेशन करना पडेगा। यह सुनते ही मेरे अंदर की सारी पॉजीटिविटी, निगेटीविटी में बदल गयी। मैं पूरी तरह से टूट व बिखर गया था।

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फिल्म के अंदर बाजीराव पेशवा का जो लुक है, उसे लाने में आपकी अपनी क्या भूमिका रही?

यूं तो सब कुछ संजय लीला भंसाली ने ही निर्धारित किया है, इस ऐतिहासिक पात्र पर उन्होंने ही रिसर्च किया था किताबों में और इंटरनेट पर बाजीराव पेशवा की तस्वीरें मौजूद है, जिससे उनका लुक पता चलता है। वह कैसे दिखते हैं, पता चलता है, तो हम उसमें कोई बदलाव नहीं कर सकते थे पर कॉस्ट्यूम डिजाइनर व मेकअप मैन ने इस लुक को सही रूप से परदे पर लाने के लिए बहुत बारीक काम किया।

आपने काफी समय तक बाजीराव के लुक को छिपाकर रखा?

जी हां! ऐसा हमारे निर्देशक संजय लीला भंसाली भी चाहते थे घर से निकलता था, तो टोपी पहनकर निकलता था। मैं एक साल तक अपने लुक को छिपाकर रखा, ट्रेलर आने के बाद अब समस्या नहीं रही पर डेढ़ साल तक खुद को छिपाकर रखना पड़ा।

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आपके अनुसार बाजीराव क्या है?

निडर हैं, जिस बात को सही मानते हैं, उसके लिए जान दे सकते हैं, जज़्बाती हैं, उनकी जिंदगी में जो कुछ भी है, उसे सीना तानकर स्वीकार करते हैं। वह परिणामों की परवाह नहीं करते, बाजीराव पेशवा एक बेटे हैं, एक पिता हैं, एक पति हैं, प्रेमी हैं, योद्धा, शासक हैं।

फिल्म में रिसर्च कितना है?

इसमें रिसर्च और कल्पना दोनों का संगम है, बाजीराव पेशवा ने अपनी जिंदगी में 40 लड़ाईयां लड़ी, हर बार विजेता बनकर उभरा, यह महायोद्धा था, उसकी युद्ध की रणनीति का कोई मुकाबला नहीं था।

मस्तानी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं, उनको लेकर कई तरह की बातें की जा रही हैं, आपके अनुसार मस्तानी क्या हैं ?

देखिए, बाजीराव के लिए मस्तानी सोलमेट थी, ऊपर वाले ने मस्तानी के साथ बाजीराव की प्रेम कहानी रची थी तो यह पूरी तरह से एक इश्वर रचित प्रेम था, इन जुड़ावों के पीछे इश्वरीय शक्ति जुड़ी थी।

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अपनी एक्टिंग स्टाइल को लेकर क्या कहेंगे?

मैं तो अपने आपको भेलपुरी कलाकार मानता हूं, मैं तो इधर उधर हर जगह से प्रेरणा लेता रहता हूं, हर दिन कुछ नया सीखने का प्रयास करता हूं। आपको मेरा यह प्रयास उस वक्त नजर आएगा, जब मेरी कई फिल्में रिलीज हो चुकी होंगी और तब आप कहेंगे कि यह तो ‘रणवीर’ की मौलिक स्टाइल है।

संजय लीला भंसाली को लेकर क्या कहेंगे?

संजय लीला भंसाली कड़क टास्क मास्टर हैं, वह बड़ी शिद्दत से काम करते हैं, उन्हे अपने काम में किसी की भी दखलंदाजी पसंद नहीं है। उनके साथ काम करते हुए बहुत ही अलग स्तर की तकलीफें आती हैं। वह बार बार सेट पर दृश्य बदलते हैं कलाकार को फिल्म व उसके हर सीन में इवॉल्व करते हैं, सेट पर संवाद देने के पांच मिनट बाद ही वह कलाकार से अभिनय करके दिखाने के लिए कह देते थे।


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Mayapuri

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