‘मैं दुखी हूं कि इतना बेहतरीन अदाकार दो तीन साल बॉलीवुड से दूर चला गया’ लेखक निर्देशक- रेंसिल डिसूजा-

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अक्सर बॉलीवुड में लोग अच्छे राइटर न होने का रोना रोते रहते हैं। ऐसा नहीं हैं। यहां अच्छे राइटर भी हैं, बस उन्हें परखने वाला चाहिये। रेंसिल डिसूजा एक ऐसे ही राइटर हैं जिन्होंने ‘रंग दे बसंती’ जैसी हिट फिल्म लिखी। उसके बाद उन्होंने फिल्म ‘कुर्बान’ का लेखन और निर्देशन किया । हालांकि वो फिल्म नहीं चल पाई,बावजूद इसके करण जोहर ने एक बार फिर उन्हें फिल्म ‘उंगली’ का लेखन और निर्देषन सौंपा। यह फिल्म आज रिलीज हो रही है। इस फिल्म को लेकर उनसे एक छोटी सी मुलाकात ।

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-आप हमेशा ऐसी कहानियों ही लिखते रहे हैं, जो देश, समाज से जुड़ी होती हैं। ‘रंग दे बसंती’ युवाओं के आक्रोश को दर्शाती थी, ‘कुर्बान’ का विषय आतंकवाद था। और अब एक बार फिर आप भ्रषटाचार के खिलाफ युवाओं को उतार रहे हैं?

0 मैं हमेशा ऐसी फिल्मों का फेवर करता रहा हूं जो एन्टरटेनमेन्ट के साथ, देश, समाज और उसमें रहने वाले लोगों के बारे में भी सोच सके। मैं आज नहीं बल्कि कल तक इस तरह की बातें करने वाले फिल्मकारों का फैन रहा हूं। जैसे गुरूदत्त, ऋषि दा, राज कूपर तथा विमल राय आदि । मेरा मानना हैं कि फिल्म एक ऐसा माध्यम हैं जो अपनी बात करोड़ों लोगों तक पहुंचा सकता हूं ।

उंगली है क्या ?

0 ये वो अंगली है जो हम भ्रष्टाचार, बेईमानी, रिश्वत या अन्य ऐसी ही कुरीतियों की तरफ उठाते हुये सिर्फ बातें करते है लेकिन कुछ करते नहीं। मैंने फिल्म में यही बताने की कोशिश की हैं कि जब तक हम इन सारी गलत चीजों की तरफ उंगली उठाते हुय उनका विरोध नहीं करेंगे, उस वक्त तक कुछ होगा । हमें खूद तो ऐसा करना ही होगा, दूसरों को भी प्रेरित करना होगा।

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– फिल्म के किरदारों की अगर बात करें तो ?

0 फिल्म में पांच दोस्त हैं इमरान हाशमी, रणदीप हुड्डा, कंगना रनौत, नेहा धूमिया और अंगद बेदी। इनके पेशे अलग है जैसे इमरान एक बेरोजगार युवक है, रणदीप हुड्डा क्राइम रिर्पोटर है, कंगना एक हॉस्पीटल में डॉक्टर है, नेहा धूपिया रिर्पोटर है तथा अगंद बेदी एक मोटर मैकेनिक है। ये पांचो का एक गैंग है । इनका अपना खुद का पैरलल जस्टिस सिस्टम हैं । ये उस आम आदमी की मदद के लिये तत्पर रहते हैं जिसे कहीं भी इंसाफ न मिला हो। ये अपने सिस्टम से उसे न्याय दिलवाते हैं ।

फिल्म में संजय दत्त क्या कर रहे हैं ?

0 संजय के अलावा फिल्म नील भूपलम भी एक अहम किरदार निभा रहे हैं। जहां तक संजय की भूमिका की बात की जाये तो वो फिल्म में ही देखी जाये तो बेहतर होगा क्योंकि फिल्म तो वैसे भी आज रिलीज हो गई है। इसलिये ऐसे में पहले बताना ठीक नहीं होगा।

-सुना है कि ये फिल्म आपकी पिछली फिल्म ‘रंग दे बंसती’ से प्रेरित है ?

0 दरअसल जब आप कुछ अच्छा कर जाते हैं तो हर बार आपके काम को आपके पहले काम से कंपयेर किया जाता है। रंग दे बसंती भी करप्शन को लेकर थी तो इस फिल्म में कहानी का मुद्दा भ्रश्टाचार ही है। लेकिन यहां मैंने आम आदमी को उसकी ताकत से परिचय करवाते हुये, भ्रश्टाचार के खिलाफ पांच युवाओं को लड़ते हुये दिखाया है ।

-सुना है फिल्म में गाने न के बराबर है?

0 ऐसा नहीं है फिल्म में गाने हैं लेकिन सिर्फ एक लिप्स संाग है बाकी बैकग्राउंड है। और म्युजिक फिल्म की कहानी के अनुसार ही रचा गया है ।

– फिल्म की हाईलाईट क्या होगी?

0 कई हैं जैसे ये फिल्म सिंक साउंड में बनी हैं। सिंक साउंड फिल्मों के सांउड का रिजल्ट दुगना हा जाता है। दूसरे इसके संवाद मिलाप झवेरी से लिखवायें है। मिलाप युवा है अैर युवाओं की नब्ज ज्यादा अच्छी तरह से पहचानते है ।

– आपकी हर फिल्म मल्टी स्टारर होती है ?

0 दरअसल मैंने हमेशा स्क्रिप्ट को स्टारों से ज्यादा अहमियत दी है इसलिये मेरी स्क्रिप्ट ही मेरी फिल्म को सबसे बड़ा स्टार होती है। उसके लिये मैं स्टार नहीं बल्कि किरदार लेता हूं। इमरान, रणदीप, कगंना, नेहा या अगंद मेरी कहानी के किरदार ही है। मैं बहुत ही किस्मत वाला हूं क्योंकि जेल जाने से पहले सजंय मेरी फिल्म की पूरी शूटिंग कर गये। मैं बहुत दुखी हूं कि इतना बेहतरीन अदाकार दो तीन साल बॉलीवुड से दूर चला गया ।


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Mayapuri

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