INTERVIEW!! ‘‘रणदीप हुड्डा मूड़ी कलाकार हैं..’’ – रिचा चड्ढा

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फिल्म ‘मसान’ के लिए दो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में पुरस्कृत होने के साथ साथ भारत में ‘दादा साहेब फाल्के’ पुरस्कार से पुरस्कृत अभिनेत्री रिचा चड्ढा इन दिनों एक साथ दो फिल्मों ‘सरबजीत’ तथा ‘कैबरे’ को लेकर उत्साहित हैं। दोनों ही फिल्में महज एक सप्ताह के अंतराल से रिलीज हो रही हैं। ‘सरबजीत’ 20 मई तथा ‘कैबरे’ 27 मई को रिलीज होगी।

आपकी दो फिल्में ‘सरबजीत’ और ‘कैबरे’ एक सप्ताह के अंतराल में रिलीज हो रही हैं ?

बिल्कुल सही कहा मजेदार बात यह है कि दोनों फिल्में बहुत ही अलग तरह की हैं दोनों फिल्मों में मेरे किरदार बहुत अलग हैं। वैसे दोनों फिल्में एक साथ नहीं आनी थी पर निर्माताओं का अपना तारीख का आंकलन गड़बड़ा गया। मुझे इन दोनों फिल्मों के प्रमोशन के लिए भागदौड़ करनी पड़ रही है।

आपके लिए ‘सरबजीत’ और ‘कैबरे’ में से किस फिल्म के किरदार को निभाना आसान रहा ?

मेरे लिए फिल्म ‘सरबजीत’ में सरबजीत की पत्नी सुखप्रीत का किरदार निभाना आसान रहा क्योंकि यह पंजाबी किरदार है मैं निजी जिदंगी में पंजाबी हूं जबकि इस फिल्म से जुड़े बाकी सभी कलाकार गैर पंजाबी हैं। मेरे लिए भाषा के उच्चारण को लेकर समस्या नहीं आयी। फिल्म ‘कैबरे’ मेरे लिए कठिन रही मेरे लिए यह एक प्रयोगात्मक फिल्म है। अब तक मैंने इस तरह का कोई किरदार निभाया नहीं है सच कहूँ तो मैंने अपने नृत्य के शौंक के चलते फिल्म ‘कैबरे’ की।

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फिल्म ‘कैबरे’ में आपके किरदार का नाम क्या है ?

यह एक ऐसी लड़की की कहानी है जो डांसर है लगातार भागती रहती है उस पर लगातार जान लेवा हमले होते रहते हैं और उसके पत्रकार दोस्त को समझ नहीं आता कि लड़की क्यों भाग रही है रहस्य क्या है ?

फिल्म ‘सरबजीत’ को लेकर क्या कहेंगी ?

‘सरबजीत’ के बारे में लोगों को पता है मैंने इस फिल्म में सरबजीत की पत्नी का किरदार निभाया है जो कि सरबजीत का इमोशनल प्वाइंट है। सबसे ज्यादा यातना तो सरबजीत की पत्नी सुखप्रीत ने झेली, सरबजीत के परिवार का हर सदस्य आगे निकल गया, पर वह जहां की तहां रह गयी। सरबजीत को छुड़ाने की मुहीम में सरबजीत की बहन दलबीर कौर आगे आ गयी। सुखप्रीत को तो आज भी हंसने बोलने में मुश्किल आती हैं उनकी पूरी जवानी बर्बाद हो गयी मैंने इसीलिए इस किरदार को निभाया क्योंकि यह एक आम किरदार है इसके साथ लोग जुड़ सकते हैं।

क्या फिल्म में इस बात का जिक्र है कि सरबजीत के परिवार में सारे लोग आगे निकल गए पर उसकी पत्नी सुखप्रीत की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया ?

देखिए, हमेशा यही होता है कि जो शोर मचाता है, वही आगे निकलता है यहां उसकी बहन ने आवाज उठायी, तो लोगों कि नजर में वही आयीं पर यदि बहन आवाज न उठाती, तो कौन उठाता ? बहन थोड़ी पढ़ी लिखी हैं बाकी तो कोई पढ़ा लिखा है नहीं सुखप्रीत ठेट गांव की महिला हैं उन्हें इस बात का ज्ञान है कि खेती कैसे करते हैं, भैंस का दूध कैसे दुहते हैं जबकि सरबजीत की बहन दलबीर कौर नौकरी करने के साथ साथ अपने भाई को छुड़ाने की कोशिश भी कर रही थी।

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आपके लिए सुखप्रीत का किरदार निभाना भावनात्मक स्तर पर दुःख दायी क्यों रहा ?

भारत पाक की आपसी कलह की वजह से कई भारतीयों को पाकिस्तानी जेल में मौत की नींद सोना पड़ा रहा है। यह दुःखद स्थिति है सरबजीत भी पाकिस्तान की जेल में बंद था उसे छुड़ाने की तमाम कोशिशें बेकार गयी वह मारा गया तो स्वाभाविक तौर पर भावनात्मक स्तर पर यह पीड़ा देने वाली घटना है मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि इस फिल्म को देखने के बाद लोग कहेंगे कि मैंने अभिनय नहीं किया है।

कहा जा रहा है कि फिल्म ‘सरबजीत’ की कहानी तो रणदीप हुड्डा और ऐश्वर्या राय की है आप तो सिर्फ सह कलाकार हैं ?

इसमें गलत क्या है ? जब हम फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ते या सुनते हैं, तभी हमें पता चल जाता है कि किसके किरदार की क्या अहमियत है ? जब मैंने ‘सरबजीत’ साइन की थी तभी मुझे पता था कि फिल्म की कहानी का केंद्र दलजीत कौर (ऐश्वर्या राय बच्चन) व सरबजीत (रणदीप हुड्डा) हैं उसके बाद मेरा नंबर आएगा आखिर यह कहानी एक बहन की है, जिसने पाकिस्तान की जेल में बंद अपने भाई को छुड़ाने की कोशिश की इस सच को मैं क्यों छुपाऊं मुझे गर्व है कि मैं ऐसी फिल्म से जुड़ी हूं।

रणदीप हुड्डा को लेकर क्या कहेंगी ?

वह मूड़ी कलाकार हैं कब किस तरह से पेश आएंगे, कह नहीं सकते ‘सरबजीत’ के किरदार को निभाने के लिए उन्होंने अपना वजन कम किया। फिल्म में मैंने उनकी पत्नी का किरदार निभाया है, तो स्वाभाविक तौर पर उनके मूड़ को झेलना था।

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आप पंजाबी फिल्म बना रही हैं ?

मैंने पहले ही कहा कि मैं यह फिल्म अपने दोस्त नूपेंद्र सिंह के लिए बना रही हूं यह एक लघु फिल्म है इसकी कहानी 80-90 के दशक में पंजाब में सरकार और अलगाव वादियों के बीच फंसे आम इंसानों की बेबसी की कथा है। फिल्म की कथा आज भी समसामायिक है क्योंकि इस तरह कि घटनाएं देश के कई कोनों में हो रही हैं।

वेब सीरीज में काम करने वाली हैं ?

अभी मैं उसी की मीटिंग में जाने वाली हूँ वेब सीरीज में सेंसर का लफड़ा नहीं होता दूसरी बात अब हमारे यहां के टीवी सीरियल पता नहीं किस जमाने के हो गए हैं जब मैं छोटी थी, तब टीवी पर ‘महाभारत’, ‘बुनियाद’ जैसे उत्कृष्ट सीरियल प्रसारित हुआ करते थे। अब तो टीवी कार्यक्रम देखकर अजीब सा लगता है। हमारी उम्र के दर्शक कन्फ्यूज हो रहे हैं।

आने वाली दूसरी फिल्में ?

कई फिल्में है ‘धूमकेतु’ के अलावा सुधीर मिश्रा की फिल्म ‘एक और देवदास’ की शूटिंग हमने लखनऊ में पूरी की है तो वहीं अब फ्रेंच निर्देशक की फिल्म ‘लव सोनिया’ कर रही हूँ।

 


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Mayapuri

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