INTERVIEW: ‘‘इस फिल्म के दौरान तो मैं उस बेचारी को भी वक्त नहीं दे पाया’’ – सलमान खान

1 min


हाल ही में अपनी फिल्म ‘ सुल्तान’ के प्रमोशन के तहत सलमान ने प्रिन्ट मीडिया में कुछ ऐसा कह दिया जो बाद में विवाद बन गया। जबकि उनके कहने का तात्पर्य कुछ और था। इस वक्त का साक्ष्य इस साक्षात्कार का लेखक पत्रकार स्वंय है। विवाद के अलावा उन्होंने फिल्म के बारे और भी काफी कुछ कहा। जैसे….

सवाल था कि पहलवान बन कर उन्हें कैसा लगा ?

यहां सलमान का कहना था कि इससे पहले मुझे स्व. दारासिंह के बेटे विंदू से पता चला था कि पहलवान का बुढ़ापा बहुत बुरा बीतता है। उनके पापा दारासिंह जी दर्द से इतना करहाते थे कि उन्हें उन पर बहुत तरस आता था। जंहा तक मेरी बात है तो कुश्ती के शॉट देते देते मैं इतना थक जाता था कि बाद में मुझे कुछ इस तरह के दर्द से जूंझना पड़ता था जिस प्रकार कोई रेपीस्ट लड़की को पीड़ा से दो चार होना पड़ता है। बाद में यही वाक्य विवाद बन गया। जबकि सलमान द्धारा दिया गया उदाहरण गलत हो सकता हैं लेकिन उनका ध्येय गलत नहीं था।

56efeaa2-5564-4e85-b140-42bbac1f1f93

फिल्म को लेकर आपको किस बात ने प्रभावित किया ?

मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई प्रभावित होने वाली बात थी। यहां फिजिकल मेहनत थी, ये तो आज कल लोगबाग़ शौक के लिये भी कर लेते हैं। टेक्नोलॉजी इतनी इंप्रूव हो चुकी है कि आप अगर थोड़ा बहुत ऊपर नीचे भी करते हैं तो उसे ठीक किया जा सकता है। अहम है स्क्रिप्ट, जिस पर फिल्म के राइटर डायरेक्टर अली ने क्या काम किया है। अब आप इसे लंगोट पहना दो या कोई और कास्ट्यूम पहना दो, नथिंग। उसे अपनी लाइफ में क्या कुछ करना पड़ता है। बाद में एक अकेला आदमी दोबारा से उठता है और फिर एक पोजिशन पर पहुंचता है लिहाजा आउट एन आउट ये एक अडंर डॉग की कहानी है ।

आपने असली पहलवानों के साथ काम किया है ?

वो सब ठीक हैं लेकिन कहा जाये तो ये सुल्तान की स्टोरी है और वो ही हीरो है। लेकिन जो दूसरे पहलवान हैं उनकी भी तो कोई मजबूरी होगी, उन्होंने भी तो उतनी ही मेहनत की होगी, वे भी नाम और दाम कमाने के लिये रिगं में उतरते है, वे विलन हैं। लेकिन अगर उनकी जगह ये होता तो ये विलन होता। रही बात असली पहलवानो की तो मेरी ट्रेनिंग इतनी सख्त हुई है कि फिल्म में मैं उनसे कहीं ज्यादा तर्जूबेकार पहलवान था ।

sultan-teaser-647_041316114729 (1)

आप किस आधार पर इस एक सख्त ट्रेनिंग मानते हैं ?

आप सोचिये कि पहले सुबह शाम दो तीन घंटे पहलवानी के दांव पेंच सीखने, उसके बाद वो सारी चीजें जो एक पहलवान में होने चाहिये। मैने सो किलो से ज्यादा वजन बढ़ाया और शॉट में एक सो बीस किलो के पहलवान को उठाना फिर गिराना और ये सब करीब दस बार करना। यही नहीं इसके बाद फिर वेट घटाना। ये कोई खाने का काम नहीं था। यहां आमिर खान एक बार ये सब कर सकते हैं क्योंकि  वे छह महीने में एक काम करते हैं। लेकिन मेरे लिये ये सब बहुत मुश्किल साबित हुआ।

आपको नहीं लगता कि अब जो फिल्में बन रही हैं वे सीमित दर्शकों के लिये हैं ?

मुझे लगता हैं कि इन फिल्मों का डायरेक्टर यहां का नहीं है वो बाहर से आया है और वो जो फिल्में बना रहा हैं उनकी रेंज मुबंई के कुलाबा से लेकर अंधेरी तक हैं। उनका बिजनिस क्या है वही पच्चीस पचास लाख। आप बनाईये ऐसी फिल्में लेकिन उनके कलेक्शन के बारे में भी तो सोचिये। जबकि हमारे पर इल्जाम है कि यार ये सलमान क्या फिल्में करता है। बजरंगी भाईजान, प्रेम रतन धन पायो। लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि ये कंट्री ऐसी फिल्में ही पंसद करती है। ये तो गनीमत है कि हमारे यहां आज भी कम सिनेमा हैं वरना मेरा दावा हैं कि इन फिल्मो की कलेक्शन देख हॉलीवुड भी बंगले झांकने पर मजबूर हो सकता है ।

salman-anushka-story_647_060116033844

फिल्म में आपने हरियाणवी भाशा बोली हैं वो कैसे सीखी ?

सेट पर एक आदमी बोलता था मैं उसे सुनता था और फिर रिपीट करता था । मेरे पास इतना वक्त नहीं कि मैं महीनो पहले हरियाणवी सीखूं फिर उसे समझूं और फिर फिल्म में उसे यूज करूं। ये सब आमिर खान करते हैं। मेरी मां मराठी है लेकिन मैं मराठी नहीं बोल पाता, अंग्रेजी में भी मैं वैसा ही हूं और हिन्दी में भी मेरे वांदे हैं, हरियाणवी तो बहुत दूर की बात है ।

अनुष्का शर्मा ने पहली बार आपके साथ काम किया है। उसके साथ काम करना कैसा रहा ?

कुछ नहीं बता सकता। क्योंकि शूटिंग के दौरान मैं इतना थक जाता था कि पैकअप होते ही सीधा बिस्तर के हवाले हो जाता था। वरना तो किसी फिल्म की शूटिंग के दौरान पैकअप के बाद पार्टीज होती हैं डिनर होते हैं। वहां एक दूसरे को समझने का मौका होता है लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हो पाया। इसलिये उस बेचारी को मैं पूरी फिल्म में जरा भी वक्त नहीं दे पाया ।

SHARE

Mayapuri