INTERVIEW!! स्कूल में मुझे सबसे ज्यादा डांट गणित अध्यापक से ही मिलती रही है – शबाना आज़मी

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शबाना आज़मी अपनी पहली फिल्म, “अंकुर” जैसी नहीं है अब और बहुत कुछ उन्होंने हमारी संवाददाता लिपिका वर्मा को बताया

लिपिका वर्मा

शबाना आज़मी की तबीयत ख़राब होने के बावजूद उन्होंने मीडिया से बातचीत की फिल्मों, परिवार, ज़ोया, फरहान और जावेद के साथ अपनी जोड़ी के बारे में भी हमे ढ़ेर सारी बातें बतायी

‘चॉक एन डस्टर’ फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया गया है क्या कहना चाहेंगी ?

जी हाँ यह फिल्म एक अध्यापक के बारे में हाईलाइट करती है। एक टीचर हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण स्थान  रखता है यह हमें बाद में ही मालूम होता है। मुझे इस फिल्म में एक गणित अध्यापिका का किरदार निभाने को मिला है। दरअसल स्कूल में मुझे सबसे ज्यादा डांट गणित अध्यापक से ही मिलती रही है। जैसे ही वो कक्षा में आती मुझे कक्षा से बाहर जाने का आदेश दिया करती। खैर आज मुझे यह एहसास हुआ है कि हमारे व्यक्तित्व के विकास में एक अध्यापक का कितना मूल्य होता है।

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कुछ और सोच कर शबाना बोली, “मेरी भाभी सुलभा आर्य जो एक अध्यापिका हैं, अभिनेत्री हैं, यह किरदार करते हुए मैं उनसे प्रेरित हुई हूँ। जब भी मैं कोई किरदार करती हूँ तो रियल केरैक्टर से प्रेरित होती हूँ। जैसे मैं कभी कुकिंग पसंद नही करती हूँ किन्तु यदि मुझे किचन में जाना हो तो मैं सब चीज़ खुद ही रखती हूँ ताकि जब वो शॉट करना हो तो मुझे वह सारी चीज़े सहूलियत से मिल जायें।

शबाना किस तरह की बच्ची थी, पढ़ाई में रूचि रखती थी क्या?

जी हाँ मैं बहुत ही पढ़ाकू बच्ची थी। मुझे गणित कतई पसंद नहीं थी और मेरी गणित की अध्यापिका ज्यों ही कक्षा  में आती मुझे कक्षा के बाहर निकाल दिया करती। मैं पढ़ाई में बहुत रूचि रखती और अच्छे अंक प्राप्त करती हर परीक्षा में। मुझे ड्रामा में बहुत रुझान था। अक्सर लड़के का किरदार मिला करता मुझे क्योंकि मैं टॉम ब्वॉय की तरह ही थी।

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आज की पढ़ाई के बारे में क्या सोचती हैं शबाना?

बच्चों के कन्धों पर ढ़ेर सारी किताबें लाद दी जाती हैं। मेरा ऐसा मानना है कि पढ़ाई लिखाई में रूचि पैदा करनी होती है बच्चों में। मैंने पार्लियामेंट में भी यह आवाज़ उठाई है कि किताबों में यह क्यों लिखा जाता है कि माँ रसोई में होती है और पिता दफ्तर में यह क्यों नहीं लिखा जाता कि माता पिता दोनों रसोई में हो सकते हैं। यह लिंग भेद-भाव कैसा। हमारे देश में एक महिला प्रधानमंत्री रही है और काफी सारी औरतें अच्छी पोजीशन पर कार्यरत हैं। सो ऐसा कोई भेद -भाव नहीं होना चाहिए। देश में आज भी लड़की पैदा होती है तो उसे मार दिया जाता है – क्यों ? यह लिंग भेद -भाव बचपन से नहीं डाला जाना चाहिए छात्रों पर। समाज से ऐसे भेद-भाव खत्म हो जाने चाहिए।

जावेद अख्तर (पति) आपके लिए रोमांटिक लाइन्स लिखते हैं क्या कभी ?

जी नहीं वो सारी रोमांटिक लाइन अपनी हीरोइन्स के लिए लिखा करते हैं। जब कभी मैं उनसे यह सवाल करती  वह मुझे यही कहते हैं कि सर्कस में काम करने वाला घर पर उल्टा खड़े होगा क्या ?

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आप दोनों की जोड़ी आज भी मानी जाती है शादी के बंधन को कैसे निभा पाये आप दोनों ?

देखिये, आज भी जावेद साहब यही कहते हैं कि शादी ने हमारी दोस्ती पर आंच नहीं आने दी है। कहने का मतलब है, हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं।

आप कुकिंग अच्छी नहीं कर पाती हैं क्या कहना है ?

बिल्कुल जब कभी मैं कुछ खाना बनाती हूँ तो जावेद साहब और बच्चे ज़ोया एवं फरहान देश के बाहर चले जाते हैं। सो मेरी एक ही ख्वाहिश है कि मैं उन्हें बेहतरीन खाना बना कर खिला पाऊँ  !

आपने अब तक क्या मिस किया?

आज जब मैं हीरोइन्स को अच्छा नाच करते देखती हूँ तो यही लगता है कि मैंने डांस मिस किया। आज उम्र के इस पड़ाव पर कोई मुझे, “धक- धक गाने पर तो नहीं नचवा सकता है” हंस कर बोली शबाना

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अंकुर की शबाना और आज की शबाना में क्या फर्क महसूस करती हैं ?

अंकुर की शबाना बहुत अकड़ू हुआ करती कभी भी किसी की बात नहीं मानती जो कह दिया सो सही है। किन्तु आज में बातचीत करके हल ढूँढना चाहती हूँ। हर स्थिति पॉजीटिव ही हो ऐसा चाहती हूँ मैं। नकारात्मक स्थिति पसंद नहीं करती हूँ अब।

 


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Mayapuri

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