INTERVIEW: “साउथ के फैंस क्रेजी नहीं किन्तु वफादार होते हैं” – काजल

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लिपिका वर्मा

हाल ही में काजल अग्रवाल अपनी फिल्म, “दो लफ्जों की कहानी” के लिए मुंबई मीडिया से मिलने पहुंची। इस फिल्म में वह एक नेत्रहीन लड़की का किरदार निभा रही हैं। काजल साउथ की फिल्मों में एक जानी मानी हस्ती हैं। बॉलीवुड में यदा कदा कुछ हिंदी फिल्में कर लेती हैं काजल – मुंबई की छोरी हैं काजल। “जी हाँ में पंजाबी परिवार का हिस्सा हूँ किन्तु में दिल से साउथ इंडियन ही हूँ। रीजनल फ़िल्में करने में मुझे कोई एतराज नहीं है। मुंबई में पली बढ़ी हुई हूँ तो मराठी मुझे आती है। मैंने मराठी फ़िल्में देखी हैं मेरी सबसे पसंदीदा फिल्म, “नटरंग” है। अतुल कुलकर्णी ने उम्दा काम किया है इस फिल्म में।”

क्या आप मराठी फ़िल्में करना पसंद करेंगी ?

क्यों नहीं। मैं कोई भी रीजनल फ़िल्म करना चाहूंगी और मराठी तो कर ही लुंगी यदि कहानी अच्छी हुई तो। मराठी कल्चर बहुत रिच है और इसकी स्क्रिप्ट्स भी अत्यन्त उम्दा एवं बेहतरीन होती हैं। अगर कोई अच्छा किरदार मिला तो जरूर मराठी फिल्म का हिस्सा बनना चाहूँगी। हाँ यह जरूर है कि मुझे भाषा पर थोड़ा बहुत काम करना पड़ेगा।

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इस फिल्म में नेत्रहीन लड़की का किरदार निभा रही हैं क्या कहना चाहेंगी ?

फिल्म, “दो लफ्जों की कहानी” की स्क्रिप्ट जब मैंने दीपक तिजौरी [निर्देशक] से सुनी तभी मैं बहुत प्रभावित हो गयी थी और कोरियन फिल्म देखने के बाद तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। मुझे वह फिल्म बेहद पसंद आई और मुझे नेत्रहीन लड़की का किरदार निभाना था सो मुझे इस बात की भी ख़ुशी थी क्योंकि ऐसे किरदार निभाने बहुत चुनौतीपूर्ण होते हैं। इस किरदार को रील पर रियल उतारना कोई आसान काम नहीं है।

इस फिल्म से आपने क्या सीखा ?

यही कि नेत्रहीन लोगों को किस तरह से दया की भीख नहीं चाहिए होती है। वह अपने आप में बहुत होशियार होते हैं जैसे यदि एक गिलास पानी भरना हो तो वह उस गिलास के ऊपरी छोर पर अपनी ऊँगली डाल कर रखते हैं ताकि पानी गिर ना पाए। माइक्रोवेव, मोबाइल फोन और अन्य उपकरण इस्तेमाल करने हों तो वह भी अपनी भाषा ब्रैले से सीख लेते हैं।

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फिल्म रोमांस पर है तो नेत्रहीन लोग प्यार करना कैसे सीखते हैं ? आपने क्या पाठ पढ़ा रोमांस पर?

हंस कर बोली – यह कैसा प्रश्न है ? प्यार की भी कोई भाषा होती है भला। प्यार का एहसास तो हर इंसान भीतर से ही कर लेता है।

आपको नहीं लगता यह एक कोरियन फिल्म की रीमेक है और हाल फ़िलहाल रीमेक फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हुई हैं ?

मुझे लगता है यह कहानी सब तक पहुंचनी चाहिए। ऐसी खूबसूरत कहानी ढ़ेर सारी भाषाओं में बननी चाहिए। फिल्म की किस्मत बॉक्स ऑफिस पर तो जनता ही तय करती है।

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फैन फोलोइंग के बारे में आपका क्या विचार है। बॉलीवुड और टॉलीवुड फैंस में क्या फर्क देखती हैं ?

मुझे बॉलीवुड और साउथ फिल्मों दोनों में ही काम करना अच्छा लगता है। सीधी सी बात है दोनों ही मेरे, “बेबीज” की तरह हैं। पर यह जरूर कहना चाहूँगी साउथ के फैंस क्रेजी नहीं किन्तु वफादर होते हैं। बॉलीवुड फैंस तो अपने एक चहेते एक्टर की फिल्म फ्लॉप होने पर उसका साथ छोड़ देते हैं।


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Mayapuri

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