INTERVIEW!! मेरे पास शब्द नहीं है काजोल की प्रतिभा को बयां करने के लिए – तनुजा

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उत्साही व जीवंत मानी जाने वाली अभिनेत्री तनुजा जब बात करना शुरू करती है तो बिना रूके बिंदास हो कर बात करती हैं। इस बातचीत के दौरान उन्होंने कुछ समय पहले हुए पुणे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की यादगार दास्तान भी बताई। जिसमें उन्हें भारतीय सिनेमा में बेहतरीन योगदान के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, तनुजा ने जब मायापुरी से बातचीत करते हुए अपनी बेटी काजोल व बतौर अभिनेत्री के रूप में अपनी समृद्ध जर्नी के बारे में बताया तब उनकी बाते सुन मैं अवाक् रह गया

ज्योति वेंकटेश

आप उन शिक्षित अभिनेत्रियों में से एक हैं जिन्होंने साठ के दशक में राज किया। आपको कैसा लगता है जब आप पीछे मुडकर अपने शानदार करियर को देखती हैं?

मैं शिक्षित सीकेपी समुदाय के परिवार से ताल्लुक रखती हूं। मेरे दादा एक बैंकर थे। जब कि वास्तव में वह एक महान चमत्कारी समय था जब लोग थियेटर को देखते थे। विशेष रूप से 30 के दशक में, मेरी माँ शोभना समर्थ जो समाज में अन्य रूढि़वादी महिलाओं से अलग होना चाहती थी, जब उन्हें फिल्म में काम करने का ऑफर मिला तो उन्होंने हां कह दिया। मैं अपनी मां का धन्यवाद करती हूं जिनका मानना था कि व्यक्ति के जीवन मे शिक्षा सबसे पहले आनी चाहिए। मैंने अपनी उच्च शिक्षा स्विट्जरलैंड में पूरी की। मैं यू.के. की इंटरप्रेटर बनना चाहती थी व मुझे लोगों की भाषाओं में बात करने की चाह थी। इसके साथ ही अलग-अलग भाषाओं को सीखने का भी शौंक था। मैंने एक संदेश वाहक होने की अपनी महत्वाकांक्षा को हासिल किया। हालांकि, मैंने जर्मन व फ्रेंच भाषा नहीं सीखी थी। मैंने हिन्दी व अंग्रेजी के अलावा बंगाली, मराठी भी सीखी।

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बतौर एक्ट्रेस आपने अपना काम कब शुरू किया?

मेरी बड़ी बहन नूतन मेरी मां के नक्शे कदम पर चली व फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्ट्रेस अपना करियर बनाया। एक एक्टर अपने आसपास के लोगों को देख अभिनय के विभिन्न तरीके सीखता है। एक्टिंग बदलती नहीं, प्रदर्शन का बदलाव जरूर होता है। एक्टिंग जीवन में एक कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है ये आगे चलती चली जाती है।

फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले क्या आपने एक्टिंग सीखी है?

मुझे लगता है कि आप किसी व्यक्ति को एक्टिंग नही सिखा सकते। आप केवल व्यक्ति को कैमरे के सामने किस तरह दिखना है यह सिखा सकते हैं। एक अच्छा एक्टर होने के नाते जरूरी है कि उसके अंदर भावना हो जो कि व्यक्ति के अंदर से आती है, ना कि किसी प्रोजेक्ट से। आज हर कोई एक्टर है, उसे अपने रोल को निभाने की समझ है। मेरा हर फिल्म में काम करने का अनुभव बहुत अच्छा था। कैमरा हमेशा से मेरा अच्छा दोस्त रहा है। कैमरे को फेस करने में मुझे कभी कोई परेशानी नही हुई।

Kajol Ajay with Tanuja
Kajol Ajay with Tanuja

आपके पसंदीदा एक्टर कौन कौन से हैं ?

बहुत सी फिल्में ऐसी रही है जो मैंने नही देखी। अगर मुझे ट्रायल के लिए नहीं बुलाया जाता है, तो मैं थिएटर फिल्म देखने भी नही जाती। मैं डीवीडी या टीवी पर घर में ही फिल्में देख लेती हूं। मुझे ऐसा लगता है कि अच्छी फिल्मों की बहुत ज्यादा कमी है, लोग यह भूल गए है कि सिनेमा मनोरंजन पर आधारित है। मैं मीना कुमारी और मधुबाला की बहुत बड़ी फैन हूं। मैं अपनी बहन नूतन की फिल्में देखा करती थी बंदिनी, सीमा में नूतन जी ने बेहतरीन काम किया था। किशोर कुमार बेहतरीन एक्टर थे। जो हर रोल मे अच्छे लगते थे।

बतौर अभिनेत्री आप अपने विकास का मूल्यांकन किस तरह से करती हैं?

लगभग 9 साल के लिए अपने आप को स्थापित करने के लिए मैंने सबसे ज्यादा काम किया। जिससे एक्टिंग आसान होती चली गई। मैंने अपने कर्तव्य का चुनाव किया क्योंकि एक्टिंग करने मे, मैं खुद को सहज महसूस करती थी। भावनाएं कभी नहीं बदलती है। तब में और अब में, कोई फर्क नही है क्योंकि एक एक्टर अब भी एक एक्टर है और एक परफॉर्मर अब भी एक परफॉर्मर ही है, आज तकनीक बहुत एडवांस हो गयी है। मैंने अपने जीवन मे एक्सपैरिमेंट किया है व मैंने हिंदी फिल्मों में लाइट भूमिकाऐं ही निभाई। इसके साथ ही मैंने मलयालम और बंगाली फिल्मों में काम किया है।

Tanisha Mukherjee Tanuja Kajol
Tanisha Mukherjee Tanuja Kajol

अब आप फिल्मों में काम क्यों नही करती?
बतौर एक्ट्रेस ‘पिथरूरन’ मेरी आखिरी फिल्म थी। ‘पिथरूरन’ एक मराठी फिल्म थी, जिसके निर्देशक नीतेश भारद्वाज थे। मैं हर तरह की फिल्में करना पसंद करती हूं। भाषा से सिनेमा में कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरा कोई ड्रीम रोल नहीं है। मैं रोल व स्क्रिप्ट देखती हूं। मैं एक निर्देशक की अभिनेत्री हूं तो यह निर्देशक का कर्तव्य है कि वह मुझे बताए कि मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं। मैं अपनी भूमिका की व्याख्या करने में सक्षम हूं।

आपकी बेटी काजोल आपकी छत्र-छाया से बाहर निकलकर अपने दम पर बेहतरीन अदाकारा बनी!

मेरे पास शब्द नहीं है काजोल की प्रतिभा को बयां करने के लिए। वह अपनी हर फिल्म में अपना स्पॉक दिखाती है। मैंने फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएगे’ आठ बार देखी गाने व अपनी बेटी का स्पॉक देखने के लिए। वह न्यासा व युग की मां होने के नाते लोजिकल व डाउन टू अर्थ है। बतौर नानी मैं बहुत गर्वित महसूस करती हूं


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Mayapuri

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