INTERVIEW!! जैकी श्रॉफ ‘डाउन टू अर्थ’ व विनम्र अभिनेता

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ज्योति वेंकटेश

जैकी श्रॉफ हाल ही में 14वें एमआईएफएफ 2016 में ब्रांड एम्बेसेडर नियुक्त किये गये। यह कहना गलत नहीं होगा कि जैकी श्रॉफ ने उपलब्धियां प्राप्त की है क्योंकि जैकी श्रॉफ ने बतौर अभिनेता फिल्मों में 33 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इनके पिता गुजराती हैं व मां तुर्की की, जैकी श्रॉफ ने अपने करियर के लगभग 33 सालों में 9 अलग-अलग भाषाओं में 207 फिल्मों में काम किया है।

क्या यह सच है कि आपके शुरू के साल काफी मुश्किल भरे रहे हैं ?

बचपन में मैं ‘जैकी दादा’ के नाम से अपनी ‘चॉल’ में प्रसिद्ध था। मेरे बड़े भाई जग्गू दादा चॉल के असली दादा थे। वह हमारी झुग्गी बस्ती के लोगों की देखभाल किया करते थे। लेकिन बहुत ही कम उम्र में, मेरे भाई किसी को बचाने के लिए समुद्र में कूद गए थे। मेरे भाई को तैरना नहीं आता था, इस वजह से वह समुद्र में डूबने लगे थे। मैंने उनकी तरफ एक केबल लाइन फेंकी, इससे पहले कि वह केबल लाइन पकड़ पाते उनका हाथ कुछ ही सेकेंड के भीतर केबल लाइन से छूट गया कुछ ही सेकेंड के भीतर उसके हाथ से केबल फिसल गई। इसके बाद मैंने फैसला किया कि मैं अपनी झुग्गी बस्ती के लोगों की देखरेख करूंगा, मैं जग्गू दादा में तब्दील हो गया।

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अपने जीवन में आपको बहुत ही संघर्ष करना पड़ा। क्या यह सच है ?

मेरे संघर्ष के सालों की एक महान कहानी है। जबसे मेरा झुकाव स्टाइल की व कूकिंग के क्षेत्रों में रहा है। मैं मुंबई के ताज होटल में बतौर शेफ के प्रशिक्षण (शेफ की शिक्षा प्राप्त करने) के लिए पहुंचा था। लेकिन कम योग्यता की कमी के कारण मुझे रिजेक्ट कर दिया गया था। इसके बाद मैंने एयर इंडिया की फ्लाइट अटेंडेंट की पोस्ट के लिए अपलाई किया लेकिन यहा भी इसी कारण से मुझे रिजेक्ट कर दिया गया। एक दिन मैं बसस्टैंड पर बस का इंतजार कर रहा था। एक व्यक्ति मेरे पास आया और बोला कि ‘मॉडलिंग करेगा’। तब मैंने उससे पूछा कि ‘पैसा देगा क्या’ यही से मेरे स्टार बनने की जर्नी शुरू हुई।

आपने ‘स्वामी दादा’ फिल्म में छोटे रोल में कैसे काम किया?

मैंने देव आनंद की फिल्म में ‘स्वामी दादा’ में शक्ति कपूर के अनुयायी की भूमिका निभाई थी। जब देव आनंदजी ने मुझे चारमीनार के विज्ञापन में देखा था तो वह मुझसे काफी प्रभावित हुए थे। जब मैं बाद में उनके पास गया तो उन्होंने मुझे स्वामी दादा के किरदार का ऑफर दिया। मैं झट से उस भूमिका को करने के लिए तैयार हो गया। बाद में, सुभाष घई ने मुझे फिल्म ‘हीरो’ में बतौर एक्टर प्रमुख रोल दिया। आलोचकों द्वारा मुझे लकड़ी का एक्टर नाम दिया गया, फिल्म 75 हफ्ते तक ब्लॉक-बस्टर रही। वास्तव में, यह घई साहब ही हैं जिन्होंने मुझे जैकी नाम दिया, जिसने इतिहास लिखा।

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बो डेरेक ने आपकी पत्नी आयशा के होम प्रोडक्शन फिल्म में कैमियो रोल निभाया था ? आपने किस तरह बो डेरेक को फिल्म में काम करने के लिए राजी किया?

मैं बो डेरेक से साउथ अफ्रीका में मिला। मेरी अपनी पत्नी आयशा ने फिल्म बूम में उन्हें कास्ट करने की इच्छा जाहिर की। बो डेरेक ने मुझसे बहुत ही प्यार से कहा कि अगर मुझे फिल्म की स्क्रिप्ट पसंद आई तब मैं फिल्म में काम करने के लिए तैयार हो जाऊंगी व आखिरकार वह फिल्म में काम करने के लिए तैयार हो गयी। उनके साथ फिल्म में काम करने का अनुभव काफी अच्छा रहा। मैं बचपन से ही बो डेरेक का फैन हूं।

जब आप अपने करियर में पीछे मुड़कर देखते हैं तो आपको कैसा महसूस होता है ?

जब मैं अपने करियर में पीछे मुड़कर देखता हूं। तो मुझे पहली फिल्म ‘हीरो’ से लेकर मेरे आखिरी फिल्म ‘ब्रदर्स’ का अच्छा, बुरा अनुभव दिखता है। मेरे 33 साल की जर्नी वाकई लंबी रही।

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आप उन सितारों में से एक रहे जो ‘मिसिंग’ नाम के एक टीवी शो में बतौर एंकर काम करने के लिए राजी हुए ?

मैं बहुत खुश हूं कि मुझे सोनी टीवी के रियेलिटी शो ‘मिसिंग’ में एंकर के रूप में काम करने का मौका मिला। इस शो के 52 एपिसोड़ के टेलिकास्ट के बाद पांच बच्चों को अपने माता-पिता मिले। एक समय ऐसा भी आया कि मैं एक फैसले पर पहुंचा कि इस शो को बंद करना पड़ेगा क्योंकि इस शो को अच्छी टीआरपी नहीं मिल रही थी।

एक अभिनेता के रूप में फिल्म इंडस्ट्री ने आपको क्या सिखाया?

मैं इस बात को मानता हूं कि फिल्म निर्माताओं के साथ मेरी दोस्ती बढ़ती ही चली गई। मैंने दोस्ती के आधार पर कई फिल्मों में काम किया। जबकि मेरी कुछ फिल्में फ्लॉप भी साबित हुई। मुझे इस बात का कोई भी पछतावा नहीं है, मुझे ऐसा लगता है कि बतौर एक्टर मैंने सभी किरदार निभाएं। यहां तक कि मैंने ‘100 डेज’ फिल्म में नेगेटिव किरदार निभाया था। मुझे ऐसा लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है एक अभिनेता अपनी क्षमता का एहसास कर सके। मुझे ऐसा लगता है कि मैं बहुत ही भाग्यशाली हूं कि मुझे फिल्म इंडस्ट्री सें बहुत कुछ सीखने का मौका मिला।

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आपने आगे के बारे में क्या सोचा है ?

मैं फिलहाल शॉर्ट फिल्में व डॉक्यूमेंट्रीज पर ध्यान दे रहा हूं क्योंकि मैं एमआईएफएफ का ब्रांड एंबेसेडर हूं। मैंने मधुमक्खियों पर शॉर्ट फिल्म बनाने का फैसला किया। मैं फिलहाल प्रसिद्ध वन्य जीवन फिल्मकार माइक पांडे के साथ इस विषय पर बातचीत कर रहा हूं। फिल्मकार माइक पांडे ने मुझसे वादा किया है कि वह मेरी इस फिल्म में मदद करेंगे।


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Mayapuri

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