INTERVIEW!! हर युवा के मन की बात है फिल्म ‘युवा’ में – निर्देशक-लेखक जसबीर भाटी

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इन दिनों यू-टयूब तथा फिल्मी महकमें में जो एक खास फिल्म की बड़ी चर्चा हो रही है वह है जसबीर भाटी की नई नवेली फिल्म ‘युवा’। जब मेरी इनसे मुलाकात करवाई मायापुरी के संपादक प्रमोद बजाज जी ने तो मैंने इनसे इस फिल्म के बारे में तथा खुद जसबीर जी के बारे में जानना चाहा, बातचीत शुरू करते हुए मैंने पूछा, ‘‘फिल्म ‘युवा’ के बारे में हमें कुछ बताईये?’’ इस पर जसबीर जी ने बताया, ‘‘जैसे की नाम से ही जाहिर है यह युवाओं की फिल्म है, जब हम युवा की बात करते हैं तो उसमें आपके उम्र वाले भी शामिल होते हैं लेकिन मैं इस फिल्म में टीनएजर्स की कहानी कह रहा हूं, यानी पन्द्रह सोलह सत्रह अट्ठारह उन्नीस वर्ष के टीनों की कहानी है यह। यह वह उम्र होती है जब बच्चे बहुत कुछ जानना, देखना समझना चाहते हैं, बहुत सवाल होते हैं उनके मन में लेकिन उन पर तमाम तरह के अंकुश होते है जो उनके माता-पिता टीचर या गार्जियन उन पर लगाते हैं लेकिन इस उम्र के बच्चे स्वार्थी नहीं होते, सेल्फ सेन्टर्ड नहीं होते, कई बार दूसरों के खातिर अपना सब कुछ दाँव पर भी लगा देते हैं। तो यह कुछ ऐसे ही टीन एजर्स की कहानी है जिन्हें एक दिन रात को एक लड़की सड़क पर पड़ी मिल जाती है। वे लड़के बिना अंजाम की परवाह किये उस लड़की को अस्पताल में ले जाते हैं। हालांकि अगले दिन उन्हें परीक्षा देने जाना होता है और उन्हें इन पचड़ों में ना पड़ने की सलाह मिलती है लेकिन वे लड़के एक जान को बचाने के लिए अपनी परीक्षा छोड़ने को तैयार होते हैं, क्योंकि परीक्षा तो अगले साल भी दी जा सकती है पर जान चली गई तो वापस नहीं आती। परिक्षण से मालूम पड़ता है कि उस लड़की का गैंग रेप हुआ है और पुलिस इन्हीं लड़कों को उस लड़की के रेप केस में फँसा देते हैं और इन लड़कों की जिन्दगी और भविष्य अंधेरे में नज़र आने लगता है।’’

आप इस फिल्म के जरिये क्या मैसेज देना चाहते हैं?

यही कि युवाओं को बड़ों की सपोर्ट की, दिशा निर्देश की जरूरत होती है, उन्हें एक सही कोच की जरूरत है, बड़ों को चाहिए कि बच्चों पर इतना अंकुश ना लगाये कि वे राह भटक जाये। इस फिल्म में एक मैसेज वाला दृश्य यह है कि इन लड़कों में से एक का पिता अपने बेटे को मना करता है कि वह उस लड़की को इंसाफ दिलाने के चक्कर में ना पड़े और कोर्ट में गवाही ना दें तब बेटा कहता है ठीक है पापा मैं गवाही नहीं दूंगा और तब तक इंतजार करूंगा जब तक कि मेरी माता बहन का रेप ना हो जाए, इस फिल्म के जरिए मैं यह मैसेज देना चाहता हूं रेप केस के मामले में आवाज उठाने की सख्त जरूरत है, सिर्फ कैंडल मार्च करने से नहीं चलेगा। पुलिस या कानून के चक्कर में पड़ने से बचने के लिए हम हर अत्याचार को खुली आँखों से देखने के बावजूद मुंह बन्द रखते हैं, यह गलत है। अब निर्भया केस को देख लीजिए। लड़की कितने घंटों तक अधमरी सी सड़क पर पड़ी रही, कितनी गाडि़यां बगल से गुजरती रही, अगर किसी ने सही समय पर उसे अस्पताल पहुंचाया होता तो शायद वह बच जाती। दूसरों के दर्द को अपना दर्द समझना चाहिए। अगर इस मामले में कोई हिम्मत करके कुछ ठोस करना चाहता है तो उसे डराने धमकाने के बजाय उसकी मदद करनी चाहिए। मेरी फिल्म के टीनएजर्स जज़्बाती है, कुछ सीखना और करना चाहते हैं, जोश से भरे हैं बस बड़ों के साथ की जरूरत है।’’

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आपने इस फिल्म में स्टार्स को ना लेकर एक्टर्स को क्यों लिया?

हमारे बाॅलीवुड में स्टार्स बहुत कम है, ऊंगलियों के गिनती पर है जबकि बहुत सारी फिल्में बनती है, यह गिनती के स्टार्स खुद अपनी होम प्रोडक्शन की फिल्मों में व्यस्त रहते हैं। इन्हें लेने से अच्छा है अच्छे एक्टर्स को लिया जाए और इन्हीं एक्टर्स को स्टार बनाया जाए।

फिल्म ‘युवा’ के हाईलाइट्स क्या है ?

मेरी इस फिल्म की कहानी, इसका कंटेन्ट और अलग अलग संगीतकारों द्वारा संगीतबद्ध चार अलग अलग प्रकार के गाने जैसे एक जोश से भरा वन्दे मातरम गीत (भावार्थःमाँ बहनों की तरफ आँखें उठाने वालों की आँखें नोच ली जाएंगी) दूसरा ‘बनाकर चाँद का च्युंगम…) बहुत लोकप्रिय हो रहा है, यू-ट्यूब में ट्रेलर और गीतों को बहुत तारीफ मिल रही है।

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आप जो भी फिल्में बनाते हैं उसे किसी हिसाब से बनाते हैं, बिजनेस को मद्दे नजर रखकर या अपने संतोष के लिये?

हम अपने संतोष के लिए सिर्फ कैसे फिल्में बना सकते हैं, इसमें हमारे पापा का पैसा तो नहीं लगा है, दूसरों का पैसा लगा है तो जाहिर है हम चाहेंगे कि मेरी फिल्में जितनी लागत की बन रही है उससे ज्यादा कमायें मेरी फिल्में समाज का आइना होती है। मेरी यह फिल्म ‘युवा’ जितने में बनी है उससे ज्यादा बिजनेस जरूर करेगी।

आपने दो और फिल्में बनाई है ‘भौरी’, ‘डाॅट डाॅट डाॅट’?

हाँ, भौरी ईंट भट्टी में काम करने वाले कामगारों पर बनाई है जहाँ एक लड़की पैसों के लिए देह बेचने से इंकार कर देती है जबकि वहां की औरतें ऐसा काम करती रही है, लेकिन यह लड़की के इंकार करने से पुरूष समाज के अहंकार को ठेस पहुंचती है और वे इस लड़की पर अत्याचार करते हैं। डाॅट डाॅट डाॅट एक ऐड्स की पीडि़त लड़की और उसके एक कम उम्र प्रेमी की मर्मस्पर्शी कहानी है। एक बार मेरी यह फिल्म ‘युवा’ रिलीज हो जाये तो मैं पुरानी डिब्बाबन्द यह दोनों फिल्में भी रिलीज़ कर दूंगा।
फिल्म ‘युवा’ के बाद भाटी जी फिल्म ‘हर हर गंगे’ फिल्म बनाने वाले हैं। पूछने पर उन्होंने बताया कि ‘हर हर गंगे’ हमारे देश के लाइफ लाइन कहलाने वाली गंगा नदी पर आधारित है। यह एक प्यारी सी रोमांटिक कहानी है, साथ में यह गंगा नदी पर हो रहे अत्याचार की कहानी भी है। हम यह बताना चाहते हैं कि माँ गंगा चींख चींख कर अपना दुख बयान कर रही है कि मुझ पर कचरा, गंदगी मत डालो, मुझ पर मुर्दा इंसान, जानवर, केमिकल्स मत डालो वर्ना मैं बहना बन्द कर दूंगी।

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फिल्म ‘युवा’ कब रिलीज़ हो रही है?

युवा छब्बीस जून को रिलीज हो रही है, इस फिल्म को बनाने के पीछे मेरी मंशा यह है कि मैं समाज के कुछ नजरअंदाज किए हुए कड़वी और नंगी सच्चाईयों को सामने लाना चाहता था। इस फिल्म के कलाकार है ओम पुरी, जिम्मी शेर गिल परिक्षित साहनी, अर्चना पूरणसिंह, रजित कपूर, संजय मिश्रा, एलिना, जीतू मुकेश भट्ट, संग्राम सिंह, पूनम पांडे वगैरा फिल्म के प्रोड्यूसर है धनराज जेठानी (धनराज फिल्म्स) तथा इस फिल्म का राइटर डायरेक्टर मैं हूं (जसबीर भाटी) बातचीत खत्म करते हुए मैंने पूछा,

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आप मायापुरी पत्रिका पढ़ते हैं?

इस पर वे जोश में भर कर बोले, ‘‘फिल्म इंडस्ट्री से प्यार करने वाला हर शख्स मायापुरी पढ़ता है और मुझे सिनेमा जगत से बेहद प्यार है। बहुत छोटा था तब से मायापुरी पढ़ता था और बाॅलीवुड के बारे में सब जानकारी पाकर मुंबई में कुछ कर दिखाने का जोश मन में भरता था। आज भी मायापुरी पढ़ता हूं और पढ़ता रहूंगा।


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