INTERVIEW: एक्टर कभी फ्लॉप नही होता – सुनील दत्त

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मायापुरी अंक, 58, 1975

फिल्म ‘नागिन’ की शूटिंग में जब सुनील दत्त से मेरी मुलाकात हुई तो उनके पीछे पूरी फौज लगी हुई थी। इनमें से कुछ उनकी फिल्मों के निर्माता थे जो डेटें लेने आए थे। कुछ चमचे थे जो खुद को दत्त साहब का चमचा हूं मैं कहलाने में गर्व का अनुभव करते हैं। चमचों और भीड़ के इस जंगल से होता हुआ मैं दत्त साहब के पास पहुंचा तो वे देखते ही उठ खड़े हुए और हाथ मिलाकर बोले,

आपका मैसेज मिल गया था सुना है मेरी बीवी (नरगिस जी) का इंटरव्यू भी लिया है आपने?

हां, और आपके बारे में भी काफी कुछ पता लगा लिया है मैंने कहा।

सुनील जी हंस पड़े।

आजकल जर्नलिस्ट्स ज्यादातर यही काम कर रहे हैं। बीवी से हसबैंड की बातें पूछते हैं और हसबैंड से बीवी की, इस समय आपके पास करीब 50 फिल्में है आप इतनी सारी फिल्में कैसे मैनेज करते हैं ?

दत्त जी मुस्कुरा पड़े और बोले, कहां यार, बीस पच्चीस फिल्में है और इतनी फिल्में तो मैं पहले भी करता रहा हूं।

सुनील दत्त मुस्कुरा कर खूबसूरत और प्यारा झूठ बोलने में अपना अंदाज रखते हैं। ऐसा अंदाज जो झूठ को सच में बदल देता है। आदमी के तौर पर फिल्म संसार में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो दत्त साहब को प्यार न करता हो। अभिनेता के रूप में सुनील दत्त जितने सुंदर व्यक्ति हैं उतने ही व्यक्तिगत जीवन में भी यही कारण था कि वे जिस सीढ़ी से कुछ समय के लिए नीचे गए थे, उसी से फिर ऊपर आ गए।

दरअसल एक्टर कभी फ्लॉप नही होता। एक्टिंग एक कला है और कला के लिए कोई भी निश्चित मुकाम तय नही किया जा सकता। कला कभी फ्लॉप होने से स्टार फ्लॉप नही होते। चाहे वह शम्मी कपूर हो, राजेन्द्र कुमार हो या सुनील दत्त हो।

अब तो आप निर्देशक बन गए हैं। एक एक्टर और डायरेक्टर में से आप किस पर ज्यादा जिम्मेदारियां समझते हैं ?

निस्संदेह डायरेक्टर की जिम्मेदारियां एक्टर से कहीं ज्यादा है। सारी यूनिट को संभालना एक डायरेक्टर के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी का काम है। इससे भी बड़ी जिम्मेदारी यह है कि निर्माता की हिदायत के अनुसार उसे ऐसी फिल्म बनानी होती है जिसे वितरक देखते ही खरीद लें जो दर्शकों को पसंद आए

एक निर्देशक के रूप में आपके सामने क्या क्या कठिनाईयां आयी ?

जहां तक मेरा जातीय संबंध है मुझे कठिनाई तो महसूस नही होती, हां, मजा जरूर आता है। इसकी वजह यह है कि एक्टिंग मेरा प्रोफेशन है लेकिन डायरेक्शन मेरा शौक डायरेक्टर के तौर पर मैंने यादें बनाई थी जिसकी तारीफें खूब हुई लेकिन फिल्म जैसी चलनी चाहिए थी नही चली फिर मैं यानि डायरेक्टर कैसे चलता। इसीलिए मैंने फिर एक बार शौंक छोड़कर प्रोफेशन पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। अब मैं ‘डाकू और जवान’ का निर्देशन कर रहा हूं।

Sunil Dutt

इसी बीच सुनील दत्त का फोन आ गया। वे फोन सुनने चले गए। उनके इंतजार में खड़ी भीड़ मुझे घूर घूर कर देखने लगी। दो या तीन मिनट के बाद दत्त जी वापिस आ गए। आकर बैठे ही थे कि निर्माता-निर्देशक राजकुमार कोहली का सहायक आ गया। शॉट रेडी है चलिए सहायक ने कहा।

आइये, आप भी सेट पर चलिए। सुनील दत्त ने मुझसे कहा। हम दत्त जी के मेकअप रूम से निकलकर सेट पर पहुंच गए। सेट पर रेखा मौजूद थी। सुनील जी ने देखते ही रेखा से हैलो कहा हैलो के जवाब में रेखा ने एक मदभऱी मुस्कुराहट होंठो पर फैला दी।

शॉट हो जाने के बाद रेखा और सुनील दत्त के कुछ रंगीन फोटो लिए गए जो करीब करीब रोमांटिक थे फोटो खिंच जाने के बाद रेखा अपने मेकअप रूप की ओर चली गई। सुनील जी अपनी कुर्सी पर बैठ गए। डेटें लेने वाले निर्माता और उनके आदमी फिर दत्त जी की कुर्सी को घेरकर खड़े हो गए। सुनील जी ने जल्दी जल्दी तीन चार को निपटाया।

दर्द-सा हो रहा है, वे वापिस मेकअप रूप में आ गए। उनके साथ मैं भी चला आया।

लगता है आपकी आंखे सूजी हुई है ?

हां, कल रात मैं आखिरी गोली की शूटिंग कर रहा था। आज शाम को बैंगलोर जाना है। वहां मैं अपनी फिल्म ‘नेहले पर देहला’ की शूटिंग कर रहा हूं यह करीब-करीब पूरी है। थोड़ा-सा काम बाकी रह गया है।

सुनील जी को सेट पर चलने का बुलावा सामने खड़ा था। मैंने एक प्रश्न पूछना जरूरी समझा था, पूछ ही लिया।

बुरा न मानें तो एक आखिरी सवाल पूछूं?

आजकल आपका नाम ‘डाकू और जवान’ की नायिका रीना रॉय के साथ जोड़ा जा रहा है, इसमें कहां तक सच्चाई है ?

सुनील दत्त ने एक जोरदार ठहाका लगाया और बोले ऐसे सवाल सुनकर मुझे बड़ा मजा आता है कि अखबार वाले या दूसरे कुछ कम दिमाग लोग मुझे अब भी रोमांस के काबिल समझते हैं इसका मतलब तो यह है कि मैं अब भी फिल्मों में रोमांटिक हीरो बन सकता हूं, आपकी इंफॉर्मेशन के लिए मैं बता रहा हूं कि रीना से मेरे ताल्लुक वैसे कतई नही जैसे लोग सोच रहे हैं अब कोई जबरदस्ती मेरा उसके साथ रोमांस करवाने लगे तो भी मुझे कोई ऐतराज नही सुनील जी ने बड़े अनोखे अंदाज के साथ बताया, अब तो मैंने रीना रॉय की बहन बरखा को डायरेक्शन में अपनी असिस्टेंट भी बना लिया है जानते है क्यों? इसलिए कि देखें दुश्मन इस पर क्या बकते हैं ?

और यह कह कर सुनील जी ने मुझसे हाथ मिलाया और मुझे जीने दो जरनैल सिंह वाले अंदाज में एबाउटर्न मारा और सेट पर चले गए।

क्योंकि आदमी मेहनत से ही नाम कमाता है जैसे सुनील दत्त आज रात दिन मेहनत करके नाम कमा रहे हैं।

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Mayapuri