INTERVIEW!! स्टार नही एक्टर – संजीव कुमार

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मायापुरी अंक, 57, 1975

एक दिन मैं पाली हिल गया तो संजीव कुमार की कार खड़ी देख कर उनके घर की ओर चला गया। उनके घऱ में दरबार लगा हुआ था लोग शोले में उनकी प्रशंसा करते नही थक रहे थे। मुझे अवसर मिला तो मैंने भी शोले में उनके अभिनय की प्रशंसा करते हुए कहा।

आप फिल्मों में हीरो के रोल करते हैं फिर भी आपने शोले में केरैक्टर रोल स्वीकार कर लिया क्या इससे आपकी इमेज पर बुरा प्रभाव नही पड़ता?

मैं जब फिल्मों में आया था, तभी मैंने सोच लिया कि मैं स्टार नही एक्टर के तौर पर अपने आप को मनवाऊंगा और वह एक्टर जो हर प्रकार के रोल स्वीकार करता है। ‘आक्रमण’ और शोले नया दिन नई रात इसके ज्वलंत प्रमाण है। मैं मानता हूं कि स्टार से ज्यादा लम्बी उम्र एक्टर की होती है और शोले ने यह सिद्ध कर दिया है शोले का रोल काफी मुश्किल था उसे निभाने में मुझे मेरे स्टेज के अनुभव ने काफी मदद दी है, संजीव कुमार ने बताया।

निर्देशक और निर्माताओं को आपसे शिकायत है कि आप अपनी सेहत का ख्याल नही रखते हैं और सेट पर भी बहुत देर से आते है। क्या आप इस बात को जानते है ? मैंने पूछा।

आदमी काम करता है खाने पीने के लिए और यही वक्त है कि आदमी अपने दिल के अरमान पूरे कर सकता है कि इसके बावजूद मैं अपने काम से बेइमानी नही करता इसीलिए लोग काम देते हैं और काम लेते हैं। देर से आने की बात यह है कि एक साथ दो तीन- फिल्मों की शूटिंग करनी पड़ती है और यह बात निर्माता-निर्देशक भी जानते हैं। लेकिन इतना व्यस्त होने पर भी मैं अपना काम पूरा करवा देता हूं, देर से आता हूं लेकिन अपनी वजह से मैं किसी का नुकसान नही करवाता। इसीलिए देर से आने पर भी सब लोग खुश रहते हैं। सबको अपने काम से मतलब होता है और काम में मैं किसी से पीछे नही रहता। संजीव कुमार ने कहा।


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Mayapuri

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