एक असामान्य यात्री  के डायरी से कुछ अनसुनी कहानियां

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अली पीटर जॉन

राजेश खन्ना धीरे-धीरे अपनी स्टारडम की ऊंचाइयों से  नीचे आ रहे थे जो उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। उनकी सुपरस्टारडम अमिताभ बच्चन के आने से कम होती जा रही थी और उनके पास कोई फिल्म भी नहीं थी। राजनीति के क्षेत्र में भी उनको असफलता ही मिली। एक दिन वह अपने बंगलें के छत पर अवसाद में आकर खूब रोए यह कहते हुए कि, ‘हे भगवान! मैं ही क्यों? ‘

पर फिर भी उनके पास लाखों फैन थे जो उन पर भरोसा करते थे और उनसे प्यार करते थे,ठीक उसी तरह जैसे पहले किया करते थे। एक बार महिलाओं के एक ऑर्गेनाइजेशन ने मुझसे पूछा कि क्या मैं कोलकाता में उनके एनुअल फंक्शन में काका जी को ला सकता हूं। मैंने एक्स सुपरस्टार से इस बारे में बात की और मैं आश्चर्यचकित हो गया यह जानकर कि जो इंसान लोगों को घंटों इंतजार कराता था और  उनके ऑफिस के बाहर महीनों हां या ना  सुनने के लिए फिल्ममेकर्स इंतजार थे, जो अक्सर ‘ना’ ही होता था, उन्होंने मेरे इस निमंत्रण को एक बार में स्वीकार कैसे कर लिया।

हम कोलकाता पहुंचे और हम राजेश खन्ना के पसंदीदा होटल द पार्क में रुके। वेन्यू पर हम मर्सिडीज़ से पहुंचे और दो हजार औरतों को जमीन पर बैठकर अपने दर्शन का इंतजार करते हुए देख कर मानव पुराने राजेश खन्ना फिर से जिंदा हो गए हो।  राजेश खन्ना को एक समय पर भगवान कहा जाता था। उन्होंने मेरे कान में धीरे से बोला, ‘अली लगता है मैं अभी भी सुपरस्टार हूं।’ उन्होंने स्पीच दी जो वो हर फंक्शन में बोलते थे और वहां की औरतें पागल हो गयी। वह बहुत खुश थे और हम दोनों ने रात के 2:00 बजे तक खूब पी। मैंने लंबे समय से उन्हें इस तरीके से खुश होते नहीं देखा था। अगले सुबह उन्हें  पश्चिम बंगाल की नयी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर पर निमंत्रित किया गया। उनके कालीघाट स्थित घर के बारे में राजेश बिल्कुल अनजान थे। नई मुख्यमंत्री गेट पर राजेश खन्ना के स्वागत के लिए उपस्थित थी। राजेश खन्ना और मुख्यमंत्री के बीच एक मीटिंग हुई उनके ऑफिस में जो एक छोटा सा रूम था। वहां एक लकड़ी की मेज और रंग बिरंगी प्लास्टिक की कुर्सियां थी। मुख्यमंत्री प्लेन उजली साड़ी में थी। उन्होंने राजेश खन्ना के लिए खुद से चाय बनाया। फिर ममता बनर्जी ने राजेश खन्ना को अपने बड़े से बंगले का भ्रमण कराया। एक घंटे के इस मुलाकात के बाद राजेश खन्ना वहां से निकलने लगे तो ममता बनर्जी अलविदा कहने के लिए खुद वहां मौजूद थी।

वापस आते वक्त खन्ना ने मुझसे कहा,’ मेरे शब्द याद कर लो अली, यह औरत जितनी छोटी दिखती है, उतनी अंदर से बहुत ताकतवर है। देखना एक दिन यह भारत की बहुत बड़ी नेता बनेगी, मुझे तो लगता है कि इसमें इंदिरा गांधी जैसे बनने की सारी खूबियां हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि, ‘कल मैं रहूं या नहीं रहूं ममता जी देश में एक महान शक्ति बनेगी’ और फिर  पूरे दिन राजेश खन्ना सिर्फ ममता बनर्जी के बारे में बात करते हुए आये। वह ममता बनर्जी से काफी प्रभावित हुए थे। एयरपोर्ट जाने के रास्ते में हजारों लोग लाइन से खड़े थे रोड के दोनों तरफ सिर्फ और सिर्फ सुपर स्टार की एक झलक देखने के लिए। और राजेश खन्ना के चेहरे की वह चमक और मुस्कुराहट यह देखकर वापस आ गई थी.

दो महीने बाद एक बुरी खबर का पता चला कि उनके लिवर में कैंसर हो गया है। डॉक्टरों ने अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किया, फैमिली ने भी सपोर्ट किया पर इन सबके बावजूद उनकी जिंदगी नहीं बच पाई और आखिरकार उनके बंगलों में उनकी मृत्यु हो गई.
मैं पहला आउटसाइडर था जिसने उनकी मृत शरीर को देखा। जब मैंने उन्हें देखा तो गंदे से रजाई में लिपटी हुई उनकी मृत शरीर को उनके नौकर नीचे ला रहे थे।

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