रिव्यु: ‘आईपीएल- प्रेमा चा लफड़ा’ पारिवारिक हल्की फुल्की हास्य ‘मराठी’ फिल्म

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मराठी सिनेमा पूरी तरह से बदल गया है लेकिन फिर भी पारिवारिक हल्की फुल्की काॅमेडी फिल्मों का बनना जारी है। प्रोडयूसर मोहन पुरोहित निर्देशक दीपक कदम की फिल्म ‘आईपीएल’ इसी श्रेणी में आती है।

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स्वनील जोशी और संतोश मेयकर एक चाॅल में रहते हैं। स्वप्नील जंहा एक कंपनी में काम करने वाला सीदा सादा युवक हैं वहीं संतोश हर किसी को चूना लगाकर पैसा कमाने वाला चालू बंदा है। इसलिये उसने चाॅल मालिक की बेटी तक को पटा रखा है। एक बार स्वप्नील की एक लड़की शीतल उपरे से मुलाकात होती है जो उसके आॅफिस में काम करने आती है। एक नजर में दोनों का प्यार हो जाता है। शीतल एक अनाथ लड़की है इसलिये उसकी इच्छा है कि वो एक ऐसे पारिवारिक लड़के से शादी करे जिसका भरा हुआ घर हो यानि उसमें मां बाप भाई बहन सभी हों। स्वप्नील का भी कोई नहीं। लेकिन शीतल का प्यार पाने के लिये वो उससे झूठ बोलता हैं कि उसके परिवार में सभी लोग है।

उसके इस झूठ को सच साबित करने के लिये एक भाई विजय पाटकर उसकी बार डांसर प्रेमिका तथा दो भिखारी उसका परिवार बनते हैं। जब स्वप्नील का झूठ पकड़ा जाता है तो शीतल स्वप्नील को छौड़ देती है इस बात से दुखी हो स्वप्नील अपने गांव लौट जाना चाहता है। तब ये सब लोग शीतल से माफी मांगते हुए उसे समझाते है कि रिश्ते खून से ही नहीं, प्यार से भी बनते हैं। शीतल को अपनी गलती का एहसास हो जाता है और दो दिल एक हो जाते हैं। आईपीएल एक हल्की फुल्की कामेडी है जिसमें वे सारे मसाले मौजूद है जो पूरे परिवार के साथ, एक साथ बैठकर देखे जा सकते हैं। फिल्म स्वप्नील जोशी, संतोश मेयकर, क्षितिजा घोसालकर, विजय पाटकर, सिया पाटिल, विजय कदम, उशा साटम, सुनील तावडेतथा, लीखा मुकुंद आदि सभी कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं के साथ पूरा-पूरा न्याय किया है। फिल्म का संगीत एवरेज रहा। फिल्म के बारे में कहा जा सकता है कि ये टिपिकल मनोरंजक मराठी फिल्म है।

-श्याम शर्मा


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