मूवी रिव्यू: पंजाब को मौत की तरफ धकेलते भ्रष्टाचार को उजागर करती है ‘इरादा’

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पिछले दिनाें पंजाब में ड्रग्स की समस्या को लेकर एक रियलस्टिक फिल्म ‘ उड़ता पंजाब’ आई थी । अब निर्देशक अपर्णा सिंह ने फिल्म ‘इरादा’ में कैमिकल की रिवर्स बोरिंग के तहत पंजाब की जमीन को जहरीला बनाने का संवेदनशील  और भयावह मुद्दा उठाया  है जिसमें वे एक हद सफल है।

पंजाब में एक  भ्रष्ट बिजनिसमैन पैडी यानि शरद केलकर वहां की उतनी ही भ्रष्ट मंत्री रमनदीप यानि दिव्या दत्ता की बदौलत केमिकल रिवर्स बोरिंग के तहत पंजाब की जमीन को जहरिला बनाने में लगा है ।अचानक पैडी की फैक्ट्री में जबरदस्त ब्लास्ट होता है । जिसकी तहकीकात करने के लिये एनआईए ऑफिसर अर्जुन यानि अरशद वारसी को नियुक्त किया जाता है । दरअसल अर्जुन व्यवस्था से बेजार पीएमओ में अपना तबादला करवा आराम की जिन्दगी बसर करना चाहता है ।उस दौरान एक तरफ तो मंत्री रमनदीप का उस पर  ब्लास्ट केस दबाने का दबाव है, दूसरी तरफ एक जर्नलिस्ट सिमी यानि सागरिका घाटगे -जिसका ब्वायफे्रंड पैडी के काले कारनामों से वाकिफ होने के तहत उसके हाथों मारा जाता है-से पैडी के खिलाफ सूबूतों को देख उसका मन बदलना शुरू होता है । इसके बाद वो पूर्व आर्मी ऑफिसर परमजीत वालिया यानि नसीरूद्दीन शाह तक पहुंचता है तो उसे पता चलता है कि पैडी की फक्ट्री में ब्लास्ट के पीछे वालिया का हाथ है । बाद में उसे पता चलता है कि वालिया की बेटी  रोमाना मोल्ला जहरीले पानी की वजह से कैंसर का शिकार बनी । उसकी तरह पंजाब के हर एक घर का एक आदमी कैंसर का मरीज बन कर रह गया है लिहाजा वालिया को इस विनाश को रोकने के लिये पैडी की फैक्ट्री को ब्लास्ट का निशाना बनाना पड़ा । इसके बाद अर्जुन मंत्री से लेकर पैडी और उसके सारे गुर्गो के खिलाफ बेखौफ हो उनके काले कारनामों का पर्दा फाश करता है।Arshad

इसमें कोई दो राय नहीं कि नसीर और अरशद की जोड़ी जहंा हो वहां कुछ अच्छा ही देखने को मिलेगा और अगर उनके साथ दिव्या दत्ता तथा राजेश शर्मा तथा शरद केलकर जैसे अदाकार और जुड़ जाये तो इसे सोने पे सुहागा कहा जायेगा । निर्देशक ने इन सारे कलाकारों  की भूमिका के तहत उनकी प्रतिभा का पूरा इस्तेमाल किया है । लेकिन किरदार कहानी के साथ सामजस्य नहीं बना पाते लिहाजा वे अंत तक एक दूसरे से जुड़ नहीं पाते। निर्देशक जिस प्रकार जनता से जुड़े मुद्दे की भयानकता को दिखाते हैं उसी प्रकार उसे दृश्यों से नहीं जोड़ पाते। कहानी पर और काम किया जाना चाहिये था ।फिल्म का बैकग्राउंड तथा म्युजिक एक तरह से पात्रों का परिचय करवाता महसूस  होता है ।Irada_sagarika gotge

अरशद वारसी इससे पहले भी बता चुके हैं कि वे कॉमेडी के अलावा गंभीर भूमिका भी उसी शिद्दत से निभा सकते हैं । अर्जुन की ऐसी ही भूमिका है जो नसीरूद्दीन शाह जैसे अदाकार के सामने और निखर कर सामने आती है । पूर्व आर्मीमैन और वर्तमान शायर की भूमिका में अपनी जवान बेटी की मौत के जिम्मेदार लोगों से बदला लेने वाले परमजीत वालिया की भूमिका में  नसीर अपनी अदाकारी का एक बार फिर उम्दा नमूना दिखा जाते हैं ।नसीर और अरशद के सीन्स फिल्म की यूएसपी कहे जा सकते हैं । इनके बाद दिव्या दत्ता, राजेश शर्मा और शरद केलकर अपनी उम्दा अदाकारी से फिल्म का लेबल और ऊंचा करते हैं ।

फिल्म पंजाब में भ्रष्टाचार में लिप्त बिजनिसमैन, सरकारी गुर्गो तथा मंत्री की कारगुजारियों के तहत नागरिकों की जान से खेलते कड़ुवे सच से रूबरू करवाती है ।


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Mayapuri

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