आई.एस जौहर  में जो बात थी वो  हर किसी में  नहीं हो सकती

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आई एस जौहर

अगर स्वर्ग है, अगर मुझे स्वर्ग के द्वार में प्रवेश करने का सौभाग्य प्राप्त होता है और अगर मैं भगवान से मिलंूगा और अगर वह मुझसे पूछेंगे कि पृथ्वी पर वह चीज क्या थी जिसने मुझे पृथ्वी पर रहने लायक बना दिया था, तो मैं बिना सोचे-समझे या पलक झपकाए बिना भगवान से कहूंगा कि धरती पर मेरी मुलाकात कुछ सबसे असामान्य और प्रतिभाशाली पुरुषों और महिलाओं से हुई थी अगर भगवान ने मुझे उनमें से कुछ का नाम लेने को कहा, तो मैं आई.एस.जौहर का नाम निश्चित रूप से सबसे पहले लूँगा! अली पीटर जाॅन

मुझे पता है कि कई लोग हो सकते हैं, खासकर नई पीढ़ी के लोग जो यह सोंचेगे और पूछेंगे की ‘आई.एस.जौहर कौन हैं?’ मैं आई.एस.जौहर को जानते हुए भी उन्हें जानता हूं, मुझे लगता है कि यह मेरे लिए सम्मान की बात है और यह मेरा कर्तव्य है कि मैं आई.एस.जौहर को वह सारा श्रेय दूं जिसके वह बड़े पैमाने पर हकदार थे और हैं।आई एस जौहर

मैं पहली बार जौहर से जौहर द्वारा ही मिला था! जब मैंने आई.एस.जौहर नाम एक कॉलम के पीछे लिखा हुआ देखा था, जो उन्होंने एक प्रमुख फिल्म पत्रिका के लिए लिखा था, जिसमें उन्होंने पाठकों के प्रश्नों के उत्तर दिए और उन्होंने अपने मजाकिया, सर्कास्टिक, फ्री, फ्रैंक और फियरलेस तरीके से जवाब दिए थे। उन्होंने जो कॉलम लिखा, वह उस पत्रिका का एक आकर्षण था और जो आम आदमी सहित सितारों और सुपरस्टार के बीच भी पॉपुलर हुआ था। मैं जो केवल तब ही पत्रिका पढ़ देख सकता था जब मैं नाई की दुकान पर जाता था और मैं उनके कॉलम का आदी हो गया था, लेकिन मुझे थोड़ी लगता था कि मैं एक दिन आई.एस.जौहर के साथ बैठूंगा!

मैं चर्चगेट स्टेशन से नरीमन पॉइंट के लिए अपने ऑफिस जा रहा था जब मैंने एक आदमी को एक सफारी सूट पहने और सड़क पर पोस्ट बॉक्स में कुछ लैटर पोस्ट करते देखा था। लोग उसे घूरते रहे और उसका ध्यान खींचने की कोशिश करते रहे। मुझे यह जानने में केवल एक मिनट का समय लगा कि वह आदमी आई.एस.जौहर थे, और वह पोस्ट बॉक्स के पास की इमारत में ही रहते थे जिसे ‘लोटस कोर्ट’ कहा जाता था। मेरी जिज्ञासा बढ़ती हुई दिखी और मैंने उन्हें अपना परिचय दिया और मैं अपनी कल्पना से परे हो गया था जब उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं वही आदमी हूं जो स्क्रीन के लिए लिखते थे। मैं तो पहले से ही रोमांचित था, लेकिन मेरा रोमांच तब ओर दोगुना हो गया, जब उन्होंने मुझे घर पर एक कप चाय के लिए इनवाइट किया और अगर मैं तब उनका इन्विटेशन एक्सेप्ट नहीं करता तो मैं एक बहुत बड़ा पागल और बेवकूफ इंसान होता!आई एस जौहर

वह अकेले ही रह रहे थे और मुझे तब अचानक से एक झटका लगा, जब उन्होंने कहा, “मैंने सभी अनवांटेड लोगों के साथ काम किया है” (यहाँ वह अपने परिवार का जिक्र कर रहे थे।) फिर उन्होंने चाय के दौरान अपने जीवन और काम की कई कहानीयां मेरे साथ शेयर कि, जिनमे मैं इतना खो गया कि मैं अपने ऑफिस जाना और काम की सभी जिम्मेदारियों को भूल गया! जब मैंने अपने साथियों को मिस्टर.जौहर के साथ मेरी अनएक्सपेक्टेड मुलाकात के बारे में बताया, तो वे इस पर विश्वास नहीं कर सके और मेरे बॉस ने कहा, “आप दो घंटे तक उस पागल आदमी के साथ कैसे बैठ सकते हैं और कैसे उसे सहन कर सकते हैं?” मैंने उन सभी से कहा कि मैंने उनमे एक सबसे समझदार और शानदार आदमी पाया। मेरे एडिटर मिस्टर एस.एस.पिल्लई आई.एस.जौहर के प्रशंसक थे और उन्होंने मुझे जौहर से मिलने के लिए बधाई दी, जिनसे अन्य कर्मचारियों में से कोई भी मिलना नहीं चाहता था क्योंकि उन्होंने कहा कि उन्होंने उन्हें अपमानित किया और उनकी व्यंग्यात्मक टिप्पणियों (सार्कैस्टिक रिमार्क्स) के साथ उनका अपमान भी किया। जौहर के बारे में जो लेख मैंने लिखा था, वह श्री पिल्लई द्वारा प्रमुख रूप से पब्लिश किया गया था और इस लेख ने मुझे जौहर का एक अच्छा दोस्त बना दिया था, जिसके बाद से मैं उनसे कई बार मिलने लगा था और उनके साथ मेरी मुलाकातों का मैं बेसब्री से इंतजार किया करता था।

मैं उस आदमी का वर्णन (डिस्क्राइब) कैसे कर सकता हूं जो वर्णन से परे था। वह एक लेखक, एक निर्देशक, फिल्मों और नाटकों के निर्माता थे] वे सामाजिक कारणों के लिए धर्मयुद्ध लड़ते थे, वह एक आइडल ब्रेकर थे, जिनके अंदर किसी भी प्रकार के धोखाधड़ी और छद्म बुद्धिजीवियों के लिए कोई सम्मान नहीं था और वह एक तरह के ऐसे हास्य कलाकार थे, जिस तरह का भारतीय सिनेमा के पास ओर कोई नहीं था न है, और मुझे पूरा यकीन है कि आगे भी कभी नहीं होगा।

सिर्फ रिकॉर्ड के लिए, जौहर ने बी.आर.चोपड़ा द्वारा निर्देशित पहली फिल्म ‘अफसाना’ की स्क्रिप्ट लिखी थी! उन्होंने अपनी खुद की फिल्मों का निर्देशन किया जैसे ‘नास्तिक’ और इसके बाद कई फिल्में आईं, जिनमें से कुछ का टाइटल था, “जौहर महमूद इन गोवा”, “जौहर महमूद इन हांगकांग”, “जौहर इन कश्मीर”, “जौहर इन बॉम्बे” और “मेरा नाम जौहर”। उन्होंने इमरजेंसी के दौरान श्रीमती इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा किए गए अत्याचारों पर आधारित ‘नसब्ंदी’ जैसी फिल्में बनाने का साहस किया था और जब फिल्म को रिलीज डेट के दिन ही बेन कर दिया गया था तो उनमे उसका परिणाम सहने की भी हिम्मत थी। उन्होंने ‘जय बंगला देश’ नाम की एक फिल्म बनाई जो कि 1971 के युद्ध पर आधारित थी, जिसके कारण बांग्लादेश का निर्माण हुआ था। उन्होंने अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, राजेश खन्ना और यहां तक कि देव आनंद के पुअर डुप्लिकेट्स के साथ ‘5 राइफल्स’ बनाने के साथ स्टार सिस्टम पर एक स्पूफ बनाया। उन्होंने ऐसे नाटक निर्देशित किए जो श्रीमती गांधी के शासन और यहां तक कि पाकिस्तानी प्रधान मंत्री जे.ए.भुट्टो के खिलाफ थे।आई एस जौहर

वह फिल्म उद्योग के एक लीडर थे, लेकिन वे कभी फेक वैल्यू और फेक लोगों को बर्दाश्त नहीं कर सकते थे, जो उद्योग पर राज करते थे और जब वे इसे नहीं झेल सके तो उन्होंने इसे छोर्ड दिया और कहा “यह इंडस्ट्री मूर्खों की हैं, मूर्खों के लिए हैं और मूर्खों द्वारा ही बनाई गई है।” श्रीमती गांधी, जो तब आईएंडबी मंत्री थीं, वह मुंबई में एक मीटिंग को संबोधित कर रही थीं और जौहर उनके साथ मंच पर थे। उन्होंने जैसे ही उन्हें झपकी लेते देखा, वह उठ खड़े हुए और कहा, “ये लोग हमारी बातों को क्या समझेगे या सुनेगे, देखो मैडम तो यहाँ सोई हुई है”, उन्हें अपने इस ‘बुरे व्यवहार’ के लिए कठोर दंड का सामना करना पड़ा था।

यह स्क्रीन का 25 वां साल था और मैनेजमेंट जौहर का संदेश चाहते थे। मेरे सीनियर मिस्टर देसाई ने जौहर को फोन किया और उन्हें बताया कि वह क्या चाहते हैं, जौहर ने यह कहने में एक सेकंड नहीं लिया, और कहा “बहुत होगया बंद करदो”आई एस जौहर

कॉमेडियन जौहर हमेशा अपने सबसे अच्छे रूप में थे, लेकिन उन्हें हमेशा ‘जॉनी मेरा नाम’ में उनकी भूमिकाओं के लिए याद किया जाएगा, जिसमें उन्होंने ट्रिपल रोल निभाया था और उन्होंने उनकी फिल्मों में उनकी सभी भूमिकाओं के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

वह कोई स्टार नहीं थे, लेकिन महमूद के अलावा, कुछ सबसे बड़े सितारे सचमुच उनके साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने से डरते थे।

मैं लोटस कोर्ट में उनसे मिलने जाने के लिए अपने ऑफिस से जल्दी निकलने की तैयारी कर रहा था, लेकिन जैसे ही मैं बिल्डिंग के अंदर जाने लगा, तो वहा के सिक्यूरिटी गार्ड ने मुझे बताया कि जौहर की मृत्यु हो गई है और उनकी इच्छा के अनुसार, उन्हें तुरंत सायन इलेक्ट्रिक श्मशान में ले जाया गया और उद्योग में किसी को इस खबर का पता चलने से पहले ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

उस शख्स को कई श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जो श्रद्धांजलि से नफरत करता था, लेकिन सबसे अच्छी और सच्ची श्रद्धांजलि उन्हें महमूद द्वारा दी गई, जिसने मुझसे केवल यह कहने के लिए बैंगलौर से उड़ान भरी थी कि, “जौहर में जो बात थी, वो किसी ओर में हो ही नहीं सकती”

महमूद मेरे सहित जौहर के कई प्रशंसकों की भावनाओं को प्रतिध्वनित कर रहे थे। आई एस जौहर 

अनु- छवि शर्मा

देखो दो दीवाने दिल के…..
हो ओ हो ओ हो ओ
ये दो दीवाने दिल के चले हैं देखो मिल के
ये दो दीवाने दिल के चले हैं देखो मिल के
चले हैं चले हैं चले हैं ससुराल
चले हैं चले हैं चले हैं ससुराल
हो ओ हो ओ हो ओ
ये दो दीवाने दिल के, चले हैं देखो मिल के
चले हैं चले हैं चले हैं ससुराल
चले हैं चले हैं चले हैं ससुराल
हो ओ हो ओ हो ओ
आये हैं लेने
हमको देखो बाराती
आये हैं लेने, हमको देखो बाराती
ससुरे ने लेने भेजा लोहे का हाथी
ससुरे ने लेने, भेजा लोहे का हाथी
चले हैं तन तन के, सरकारी दूल्हा बन के
चले हैं तन तन के, सरकारी दूल्हा बन के
चले हैं चले हैं, चले हैं ससुराल
चले हैं चले हैं, चले हैं ससुराल
हो ओ हो ओ हो ओ
ससुरे का प्यार देखो, भेजे हैं गहने
ससुरे का प्यार देखो, भेजे हैं गहने
हमने भी देखो आज ,हंस हंस के पहने
हमने भी देखो आज ,हंस हंस के पहने
देखो जी बिना सेहरा, चमक रहा चेहरा
देखो जी बिना सेहरा, चमक रहा चेहरा
चले हैं चले हैं, चले हैं ससुराल
चले हैं चले हैं, चले हैं ससुराल
हो ओ हो ओ हो ओ
देखो वो चोरी चोरी, हमें लिए जाए
देखो वो चोरी चोरी, हमें लियें जाए
कहीं न जवाइन को, नजर लग जाए
कहीं न जवाइन को, नजर लग जाए
ससुर मेरा राजा, शेहनाई है न बाजा
ससुर मेरा राजा, शेहनाई है न बाजा
चले हैं चले हैं, चले हैं ससुराल
चले हैं चले हैं, चले हैं ससुराल
देखो दो दीवाने दिल के, चले हैं देखो मिल के
देखो दो दीवाने दिल के, चले हैं देखो मिल के
चले हैं चले हैं, चले हैं ससुराल
चले हैं चले हैं, चले हैं ससुराल..

फिल्म- जौहर मेहमूद इन गोवा
कलाकार- आई.एस जौहर और मेहमूद
गायक- मोहम्मद रफी और मन्ना डे
संगीतकार- कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार-क़मर जलालाबादी


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Mayapuri

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