क्या नई फिल्म ‘रामसेतु’ बनाने के पीछे अक्षय कुमार की कोई राजनैतिक सोच है?

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रामसेतु

अक्षय कुमार ने इस दीपावली पर अपनी नई फिल्म ‘रामसेतु’ बनाने की घोषणा किया है। दीपावली के शुभ मौके पर वह ट्वीट द्वाराअपने चाहने वालों को राम की मर्यादा का संदेश देते हुए बताए हैं कि उनकी आगामी फिल्म एक मकसद के लिए बनाई जाने वाली फिल्म होगी ताकि आनेवाली भावी पीढियां राम के आदर्शों का अनुपालन करें और युगों युगों तक भारत की आत्मा को संजो कर रखें।

अक्षय ने दीपावली की शुभ कामना देते कहा है कि ‘रामसेतु’ आपके और आपके अपनो के लिए इसी संकल्प के साथ दिया जाने वाला एक प्रयास है। मजे की बात है कि उधर राम जन्म भूमि के प्रांगड़ अयोध्या में जब मुख्य मंत्री योगी द्वारा चर्चा राम मंदिर शिलान्यास भूमि में 5 लाख 85 हज़ार दीप जलाने की थी, उसी दिन बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार ‘रामसेतु’ की परी कल्पना पर फ़िल्म बनाने की उदघोषणा करके वाहवाही लेने के प्रयास में थे। खिलाड़ी कुमार की भावनात्मक अनाउंसमेन्ट और राम सेतु’ के ‘पोस्टर लांच’ को गम्भीरता से लिया गया है जिसे वह अपने आधिकारिक ट्वीट पर लिखे हैं-

रामसेतु

” इस दीपावली, भारत राष्ट्र के आदर्श और महानायक भगवान श्री राम की पुण्य स्मृतियों को युगों युगों तक भारत की चेतना में सुरक्षित रखने के लिए एक ऐसा सेतु बनाएं जो आनेवाली पीढ़ियों को राम से जोड़कर रखे। इसी प्रयास में हमारा भीएक छोटा संकल्प है-रामसेतु।आप सबको दीपावली की शुभ कामना!” ‘राम सेतु’ के जारी किए गए फर्स्ट लुक पोस्टर पर लिखा गया एक वाक्य कुछ अलग कोतुहल भरी जिज्ञासा उत्पन्न कर रहा था- MYTH OR REALITY?(सच्चाई या कोरी कल्पना )और यह वाक्य अभी भी द्विविधा की स्थिति बनाए हुए है क्योंकि फ़िल्म की विषय वस्तु पर कोई प्रकाश नही डाला गया है। अक्षय के चाहने वाले जानना चाहते हैं कि यह फ़िल्म अक्षय की ही एक फ़िल्म ‘OMG (वोह माइ गॉड)’की तर्ज़ पर होगी या फिर पौराणिक कथा का स्वरूप। उस सेतु (ब्रिज) की कथा- जो लंका विजय के पूर्व भगवान श्रीराम ने समुद्र पर बनाया था?

रामायण- काल की कथा के वर्णन में, गोस्वामी तुलसी दास ने समुद्र पर श्री राम की वानरी सेना द्वारा पूल बनाये जाने का जिक्र किया है। तुलसीदास लिखते हैं पहले राम ने समुद्र से प्रार्थना किया था कि जलाधिपति उनकी सेना को रास्ता दें।जब समुद्र देव ने नही सुना, तब राम कुपित हुए थे- ” विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीत, बोले राम सकोप तब बिन भय होये न प्रीत ।”

तुलसी के द्वारा रामायण में वर्णन किये गये रामसेतु और आज के वैज्ञानिक युग मेंं ‘नासा’ से ली गई तस्वीरों में काफी समानता है।अगर फ़िल्म की कहानी सचमुच राम के आदर्शों से जुुुडी है तो रामेश्वरम स्थित इस पूल को फिल्म में दिखाना ही पड़ेगा।

रामसेतु

रामसेतु रामेश्वरम आइजलैंड( पामबन आइजलैंड) स्थित तमिलनाड (भारत) के दक्षिण – पूर्व छोर से आरम्भ होता है और यह सेतु श्रीलंका के उत्तर- पश्चिम छोर स्थित मनारआइजलैंड तक गया है।जिसकी लम्बाई 48 किलोमीटर बताई जाती है।जहां यह सेतु है वहां कहीं कहीं गहराई सिर्फ 3 फिट तक ही है। कहते हैं 15वीं शताब्दी तक लोग इस ब्रिज से पैदल आया जाया करते थे। फिर साइक्लोन के बाद स्थिति बदल गई।इस ब्रिज को राम के सेनानियों ने नल-नील भाइयों की सहायता से बनाया था।रावण से युद्ध करने के लिए समुद्र पार जाने केलिए यह सेतु बना था, उसे धनुषकोटि के रूप में भी जानते हैं। निश्चय ही अगर राम के आदर्शों की यह फ़िल्म है तो फ़िल्म में ब्रिज दिखाना होगा। हां, अगर फ़िल्म ‘omg ओह माय गॉड’ कि तर्ज पर बनती है तो जाने किस रूप में सेतु का फिल्मांकन किया जाएगा, वक्त बताएगा।

बहरहाल समय की हवा को पहचानने में माहिर अक्षय देख रहे हैं कि अयोध्या में राम मंदिर बनने की तैयारी जोरों पर है,लिहाजा इस विषय पर जब दूसरे निर्माता भी लगे है, वह ‘रामसेतु’ की घोषणा कर दिए हैं। और, सस्पेंस बनाने के के लिए पोस्टर पर एक सवाल भी छोड़ दिए हैं…”रामसेतु- myth or reality?” जाहिर है सेतु तो आएगा ही फ़िल्म में। अक्षय ने ऐसा राखी पर्व के मौके पर भी किया था “रक्षा बंधन” आनाउंस करके। यह वो समय था जब लड़कियों पर बलात्कार की कई घटनाओं ने देश को हिला दिया था। ‘लक्ष्मी’ के बाद ‘रामसेतु’ का बनाना एक चतुर फिल्मकार की दूरदर्शिता का परिचायक है। बतादें कि अक्षय की कई फिल्में 2021 में आने वाली हैं। ‘पृथ्वीराज’, ‘सूर्यवंशी’, ‘बेलबॉटम’, ‘अतरंगी रे’ आदि। इस फ़िल्म ‘रामसेतु’ को भी 2021 में ही रिलीज किया जाएगा,ऐसा कहा गया है। लेकिन, माननेवालों का मानना है कि फ़िल्म राममंदिर निर्माण की चर्चा के साथ प्रगति करेगी।लोगो का यह भी कहना है कि यह फ़िल्म खिलाड़ी कुमार के लिए पोलिटिकल सम्भावनाओं की फ़िल्म भी हो सकती है।

वह आजकल हर वो काम करना पसंद करते हैं जिनके द्वारा वह राजनयिकों के बड़ी लॉबी में खुद को खड़ा पाएं। चाहे प्रधान मंत्री का इंटरव्यू करना हो, चाहे टॉयलट जैसे विषय पर फ़िल्म बनाना हो, चाहे सफाई या सरकारी विज्ञापनों पर चेहरा दिखाना हो, चाहे गाय का मूत्र पीने का संदेश देना हो, अक्षय की मंसा सरकार की नज़रों में फोकस पाना होता है।कहने वाले तो यह भी कह रहे हैं कि राम का संदेश देकर या ‘रामसेतु’ का निर्माण करके वह up के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ की नज़र में चमकना चाहते हैं।उत्तरप्रदेश सरकार फ़िल्मसिटी का निर्माण कर रही है, अक्षय की तेज नजरें वहां तक का फायदा नुकशान देख रही हैं।यानी फ़िल्म बनाने की सोच के पीछे कहीं न कहीं अक्षय कि राजनीतिक सोच भी है।

‘रामसेतु’ के प्रजेंटर हैं कैप ऑफ गुड फिल्म्स। निर्माता: अरुणा भाटिया,विक्रम मल्होत्रा और निर्देशन कर रहे हैं अभिषेक शर्मा।मुख्य भूमिका में अक्षय कुमार ही होंगे बताने की ज़रूरत नही है।


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Mayapuri

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