“ईशा गुप्ता के साथ जन्नत जाना है” – चच्चा फिल्मी

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बॉलीवुड की टहनी पर रोज नये नये फूल खिलते हैं। कोई बरसों तक महकता रहता है तो कोई चंद दिनों में मुरझा जाता है। कुछ फूल ऐसे भी आते हैं जो चंद लोगों को नजर आते हैं पर वो बेहद शांत व काबिल होते हैं। ऐसी ही एक हॉट, खूबसूरत व नेक दिल अभिनेत्री है ईशा गुप्ता। मेरे साथ वो आस्ट्रेलिया में एक फिल्म समारोह में गई थी। तब मैंने जाना कि वो बेहद रियल व डाउन टू अर्थ हैं। बस मैं अपने ईशा के साथ आस्ट्रेलिया में बिताये लम्हों का जिक्र कर ही रहा था कि चच्चा फिल्मी लट्टू की तरह फिरफिराते हुये घर में दाखिल हुये।
“लाहौल विला कुव्वत.. राइटर की दुम.. तेरी यह मजाल.. तू मेरे बगैर मेरी दिलरूबा, मेरी हमशक्ल, मेरी दिलफरेब ईशा के साथ जन्नत टू हो आया।“ चच्चा उबलते दूध से पतीले से बाहर उफनते हुये कुलबुलाए।
“अरे चच्चा, पायजामे मे रहो, क्यों पीकदान से बाहर थूक रहे हो.. ईशा गुप्ता मेरे शो में मेरे साथ 15 दिन के लिए सिडनी गई थी। तुम्हें क्या ऐतराज हो रहा है?” मैंने चच्चा को तीरे नजर से घायल करते हुये कहा।
“भाड़ में गये तुम.. और खाक़ मे गया तेरा शो.. कम्बख्त मारे.. मैं राज 3D को चश्मे लगा लगा कर पचास बार देख आया.. मैंने चक्रव्यूह को अपने पान की गिलौरी कुर्बान करके दस बार देखा.. क्योंकि मुझे ईशा के साथ जन्नत यानि आस्ट्रेलिया जाना था। और तू.. तू एहसान फरामोश..नाशुक्रे.. तू पकी पकाई खीर में अपनी चम्मच डाल कर सिडनी को गलियों में गरारे कर आया।“ चच्चा पिलपिला कर उफने।
“अरे चच्चा.. कहां तुम, कहां ईशा, वो एक बेहद टेलेन्टड अभिनेत्री है। अपने हुस्न व अदा से बॉलीवुड को सम्मोहित करना जानती है.. और तुम उसके साथ जन्नत नशीं होना चाहते हो। चच्चा, चच्ची के साथ मजनूं के टीले हो आओ..तुम्हारे लिए वही आस्ट्रेलिया है.. सिडनी का ख्याल आये तो कच्चे तिहाड़ की गलियां नाप आना.. आस्ट्रेलिया जाने का सपना भी देखोगे तो बैंक से पैसे कट जायेगें।“ मैनें चच्चा को भगाने की नियत से कहा।
“ठीक है.. ठीक है.. जाता हूं पर याद रखना.. ईशा मेरी है.. मेरी जन्नत.. मेरी हूर.. मेरी ख्वाबगाह की मल्लिका.. एक ना एक दिन.. वो मेरे साथ वर्ल्ड टूर पर जायेगी।“ चच्चा कुलबुलाते हुये बाहर निकल गये।
वाकई बॉलीवुड के दीवाने क्या क्या सोच लेते हैं। फिल्मी कलाकार आखिर किस किस को अपना बनाये। ईशा गुप्ता को करीब से जाना मेरे लिए यही सौभाग्य था। चच्चा फिल्मी की टेंशन नही लेने का.. वो कल किसी और के दीवाने हो जायेंगे।

                                                                         (लेखक हरविन्द्र मांकड़)


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