मूवी रिव्यू: बचकानी कॉमेडी ‘इश्क फॉरएवर’

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रेटिंग*

आज खासकर यंगस्टर्स को पूरी फ्रिडम चाहिये चाहे उसके लिये उन्हें कुछ भी गलत ही क्यों न करना पड़े। समीर सिप्पी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘इश्क फॉरएवर’ में ऐसा ही कुछ कहने की कोशिश की गई है।

कहानी

रूही सिंह देश के एमपी की बेटी हैं जो साउथ अफ्रिका में पढ़ती हैं। वो लगातार अपने माता पिता से अपने फ्रिडम की बात करती रहती है कि उसे अपनी आजादी से जीने दिया जाये। दूसरी तरफ एक आतंकवादी जाकिर हुसैन पीएम की बेटी को किडनेप करने के लिये अपने बंदे आरिफ जकारिया और उसके साथी को भेजता है। ये खबर जब पीएम हाउस तक पहुंचती है तो रूही के लिये रॉ जैसी जासूसी संस्था अपने एजेन्ट जावेद जाफरी और लिजा रे को तैनात कर देती है। आरिफ और उसका साथी रूही को किडनेप करने वाले ही होते हैं कि उसे एक बाइक सवार कृष्णा चतुर्वेदी बचा लेता है। बाद में पूरी फिल्म रॉ एजेन्ट आरिफ जकारिया तथा कृष्णा के बीच आंख मिचौली खेलते हुये चलती रहती है। अंत में जो परिणाम आता है उसे अगर आप फिल्म में ही देखें तो अच्छा रहेगा।

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निर्देशन

समीर सिप्पी ने एक आसान सी थ्रिलर सस्पेंस कहानी में रॉ और आतंकवादियों को ऐसे बचकाने तरीके से दिखाया है जैसे वे कॉमेडी कर रहे हों। क्योंकि बार बार हाथ में आये कृष्णा और रूही दोनों को हाथों से ऐसे निकल जाते हैं जैसे उन्हें जानबुझकर छोड़ा गया हो। फिल्म की हाइलाईट बस साउथ अफ्रिका की खूबसूरत लोकेशंस ही हैं। वरना तो कथा पटकथाएं सवांद और संगीत साधारण साबित हुये है और समीर सिप्पी का डायरेक्शन भी।

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अभिनय

रूही सिंह इससे पहले कैलेंडर गर्ल्स में आ चुकी हैं। वो खूबसूरत होने के साथ साथ अच्छी डांसर भी हैं। लेकिन उतनी कमजोर एक्टर भी साबित हुई है। उसी तरह कृष्णा जिसने इस फिल्म से डेब्यू किया है हर क्षेत्र में साधारण साबित हुये। रॉ एजेन्ट के तौर पर जावेद जाफरी और लीजा रे दोनों भुत पूर्व पति पत्नि है जिनका अब तलाक हो चुका है। वे रूही और कृष्णा को पकड़ने पर कम और अपनी प्रसनल बातों पर ज्यादा ध्यान देते नजर आते हैं। इसी तरह आरिफ जकारियां और उसका साथी आतंकवादी कम कॉमेडियन ज्यादा लगते हैं। यही बात जाकिर हुसैन के लिये भी कही जा सकती है।

क्यों देखें

आपके और आपकी पॉकेट के लिये यही अच्छा रहेगा कि आप फिल्म से दूर रहें।

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Mayapuri