जे. पी. दत्ता

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देश भक्ति से सराबोर रहती हैं जे. पी. दत्ता   कि फिल्मेंं

हिन्दी फ़िल्मों के मशहूर फ़िल्म निर्माता-निर्देशक जे पी दत्ता का जब भी नाम लिया जाता है तो आँखों के सामने ‘बॉर्डर’, ‘एल ओ सी कारगिल’ और ‘उमराव जान(2006)’ जैसी भव्य फ़िल्में आ जाती हैं। हिन्दी सिनेमा में जे. पी. दत्ता ने बहुत कम फ़िल्में बनाई हैं, लेकिन उनकी फ़िल्में हमेशा सब से हटकर होती हैं। देशभक्ति और जंग पर आधारित फ़िल्में बनाने के कारण ही जे. पी. दत्ता को सबसे अलग एक बेहतरीन सफल निर्माता-निर्देशक माना जाता है।का जन्म  3 अक्टूबर, 1949  को  मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ था ।इनके पिता का नाम ओ. पी. दत्ता था। ओ. पी. दत्ता भी अपने समय के मशहूर फ़िल्म निर्माता-निर्देशक और संवाद लेखक रहे थे। जे. पी. दत्ता को अपने पिता से ही फ़िल्में बनाने का सपना मिला था। उनकी अधिकांश फ़िल्मों के संवाद उनके पिता ही लिखते थे।

जे. पी. दत्ता ने अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत 1985 में फ़िल्म ‘ग़ुलामी’ से की थी। इसके बाद ‘यतीम’, ‘बंटवारा’, ‘हथियार’ और ‘क्षत्रिय’ जैसी फ़िल्में निर्देशित कीं। साल 1997 में उन्होंने ब्लॉक बस्टर फ़िल्म बनाई ‘बॉर्डर’। यह फ़िल्म सुपर-डुपर हिट रही। इसके बाद जे. पी. दत्ता ने युद्ध पर ही आधारित फ़िल्म ‘रिफ्यूजी’ का निर्माण किया, जिसमें अभिषेक बच्चन और करीना कपूर ने एक साथ काम किया था। यह फ़िल्म भले ही फ्लॉप साबित हुई, किंतु समीक्षकों ने इसे काफ़ी सराहा। अपने कैरियर में ‘रिफ्यूजी’ के बाद वर्ष 2003 में जे. पी. दत्त ने कारगिल पर आधारित फ़िल्म ‘एल ओ सी करगिल’ बनाई। एक बार फिर अपने बेजोड़ निर्देशन की वजह से उन्होंने लोगों का दिल जीता। वर्ष 2006 में उन्होंने पीरियोडिक फ़िल्म ‘उमराव जान’ बनाई, जिसमें अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की जोड़ी एक साथ दिखाई दी। यह फ़िल्म भी उनकी कुछ हिट फ़िल्मों में से एक है।

उनकी मसहूर फिल्मे थी उमराव जान, एल ओ सी कारगिल,रिफ्युज़ी,बॉर्डर,क्षत्रिय,बटवारा, हथियार,यतीम, गुलामी आदि

कहा जा रहा है कि जे पी दत्ता पिछली कई फिल्में असफल रही हैं इसलिए उनके साथ कोई सितारा काम करने के लिए राजी नहीं है। लेकिन जेपी ने हार नहीं मानी है और अब वे बॉर्डर के दो सीक्वल साथ बनाने वाले हैं। इन्हें बॉर्डर 2 और बॉर्डर 3 के नाम से एक के बाद एक रिलीज किया जाएगा।

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Mayapuri