जावेद अख्तर

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हैप्पी बर्थडे जावेद अख्तर

जावेद अख्तर भारत के एक मसहूर बॉलीवुड हस्तियों में से एक कवि, गीतकार और पटकथा लेखक भी हैं जिनका जन्म 17 जनवरी, 1945 को ग्वालियर, मध्य प्रदेश में हुआ था। पिता जान निसार अख़्तर प्रसिद्ध प्रगतिशील कवि और माता सफिया अख़्तर मशहूर उर्दू लेखिका तथा शिक्षिका थीं। इनके बचपन का नाम ‘जादू जावेद अख़्तर’ था।जावेद अख़्तर के जन्म के कुछ समय के बाद उनका परिवार लखनऊ आ गया। जावेद अख़्तर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ कॉल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज से पूरी की। कुछ समय तक लखनऊ रहने के बाद जावेद अख़्तर अलीगढ़ आ गए, जहां वह अपनी खाला के साथ रहने लगे। वर्ष 1952 में जावेद अख़्तर को गहरा सदमा पहुंचा जब उनकी मां का इंतकाल हो गया। जावेद अख़्तर ने अपनी मैट्रिक की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अपनी स्नातक की शिक्षा भोपाल के “साफिया कॉलेज” से पूरी की, लेकिन कुछ दिनों के बाद उनका मन वहां नहीं लगा और वह अपने सपनों को नया रूप देने के लिए वर्ष 1964 में मुंबई आ गए।

अगर जावेद साहब की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उनका एक अच्छा खास खुशहाल परिवार है जिनमे उनकी पत्नी हनी ईरानी जिनसे वे फ़िल्म “सीता और गीता” के निर्माण के दौरान मिले और जल्द ही जावेद अख़्तर ने हनी ईरानी से निकाह कर लिया। हनी इरानी से उनके दो बच्चे फ़रहान अख़्तर और ज़ोया अख़्तर हुए लेकिन हनी ईरानी से उन्होंने तलाक लेकर साल 1984 में प्रसिद्ध अभिनेत्री शबाना आज़मी से दूसरा विवाह किया।

जावेद अख्तर भारत के एक कवि, गीतकार और पटकथा लेखक है जिनका बचपन से ही शायरी से गहरा रिश्ता था क्योकि उनके घर शेरो-शायरी की महफिलें सजा करती थीं। उनकी सबसे सफल फ़िल्मे 1970 और 1980 के दशक मैं पटकथा लेखन सलीम खान के साथ आई थी।अख्तर बॉलीवुड में एक प्रमुख सबसे लोकप्रिय गीतकारों मैं से एक है। उनका असली नाम जादू अख़्तर था और वो ग्वेलियार मैं पैदा हुए, इनके पिता एक बॉलीवुड फिल्म गीतकार और उर्दू कवि, और गायक सफिया अख्तर, उनकी माताजी थी। जावेद अख्तर 1999 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से और 2007 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हे चौदह बार,सर्वश्रेष्ठ गीत के लिए और सर्वश्रेष्ठ पटकथा के लिए “एक लड़की को देखा …” 1942-ए लव स्टोरी में, “घर से निकलते  हाय …” पापा कहते हैं के लिए, “संदेसे आते हैं ….” बॉर्डर के लिए, “पंछी नदियां  पवन के झोंके  …” रिफ्यूजी के लिए, लगान के लिए “राधा कैसे ना जले,” कल हो ना हो के लिए “कल हो ना हो”, “तेरे लिए …” वीर-जारा और जोधा अकबर के लिए “जश्न ए Bahara” के लिए.सात बार,फिल्मफेयर पुरस्कार दिया गया. अख्तर 4 अक्टूबर 1964 को मुंबई में पहुंचे । मुंबई में रहने वाले अपने प्रारंभिक वर्षों में उन्होंने रुपये के लिए एक छोटी सी फिल्म के लिए संवाद लिखने में कामयाब रहे 100 से उन्हें पटकथा लेखक के रूप में एक नौकरी मिल गई । उन्होने फिल्म इंडस्ट्रीस के बड़े बड़े डाइरेकट्रो के साथ कम किया. अंदाज़, सीता और गीता, शोले और डॉन जैसी सफल फिल्मों उन्होने की और ये अभी भी कई फिल्मो में गीत लिख रहे हैं।

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Mayapuri