INTERVIEW: जया भादुड़ी – कहानी को अपने कंधों पर उठाने वाली अभिनेत्री

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मायापुरी अंक, 58, 1975

जया भादुड़ी इस दौर की अकेली अभिनेत्री हैं, जो मीना कुमारी, नूतन, नरगिस की तरह पूरी फिल्म की कहानी अपने कंधों पर उठाकर चलने की योग्यता रखती हैं, ‘गुड्डी’ दूसरी सीता, कोरा कागज, अनामिका आदि इसके जीवित प्रमाण हैं। लेकिन इधर शादी के बाद जया की लगभग जितनी फिल्में आ रही हैं। उनमें जया की हैसियत किसी जूनियर आर्टिस्ट से ज्यादा नही है डॉक्टर बाबू के सेट पर उससे भेंट होने पर हमने पहला प्रश्न यही किया।

जया जी, क्या आप यह बात जानती हैं कि आज कल आपकी फिल्में देखकर आपके प्रशंसकों को बड़ी निराशा होती है। क्यों कि आप उनमें नाम-मात्र ही दिखाई देती हैं। आखिर ऐसा क्यों है?

दरअसल बड़ी फिल्म में रोल की लम्बाई नहीं कलाकार की कला परखी जाती है। और इसीलिए मैं घटिया किस्म की घिसी पिटी कहानी में बड़ा रोल करने को छोटे मगर महत्वपूर्ण पात्र पर प्राथमिकता देती हू्ं। इसीलिए मैंने जंजीर में काम किया था और शोले करने का भी यही कारण था दोनों फिल्मों मे रोल छोटे होते हुए भी मुझे बहुत पसंद आए थे। जया भादुड़ी ने स्पष्ट किया।

हमने सुना है कि आप अपनी मर्जी से फिल्में स्वीकार नहीं करतीं बल्कि अमिताभ जी जो करने के लिये कहते हैं, वही करती हैं और वह तभी कहते हैं जबकि वह उसमें काम कर रहे हों ? हमने कहा।

नहीं नहीं, यह बात बिल्कुल गलत है। मैं चाहूं तो आज अन्य लोगों की तरह फिल्मों का ढ़ेर लगा सकती हूं कितने ही। कितने ही निर्माता हम दोनों को साथ लेकर फिल्म शुरू करने का ऑफर लेकर आते रहते हैं। किंतु मैं ही करना नहीं चाहती क्योंकि मुझे अपनी पारिवारिक दायित्वों का हर समय ध्यान रहता है। मैं अपना अधिक से अधिक समय अपने छोटे से परिवार के साथ बिताना चाहती हूं। इसीलिए मैं अभी तक ऐसा निर्णय नहीं ले सकी फिल्मों में काम किस सीमा तक जारी रखूं जया भादुड़ी ने बताया।

सुना है ज़ीनत अमान के कारण आपके घर का सुख चैन नष्ट हो गया है। क्या यह सही है? मैंने पूछा।

यह कोरी अफवाह है। पहले भी लोगों ने मेरी जिंदगी में जहर घोलने की कोशिश की थी। मेरे सास ससुर के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की थी किंतु असफल हुए। अब फिर से वे आग लगाने की कोशिश कर रहे हैं और वे इस बार नाकाम ही होंगे। जयाभादुड़ी ने अफवाहों का खंडन करते हुए कहा।

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Mayapuri