सेक्स सिम्बल से दूर जॉन अब्राहम

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बॉलीवुड में जॉन अब्राहम की पहचान एक सेक्स सिम्बल वाले कलाकार के रूप में ही होती रही है पर अब उनका मानना है कि उनकी यह ईमेज खत्म हो चुकी है। वह कहते हैं-‘‘कलाकार अपने आपको किसी इमेज में इसलिए बांधता है, जिससे वह एक खास तरह के किरदार में सफलता पूर्वक अपने आपको बांध सकें। ‘दोस्ताना’ या ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्मों में एक खास ईमेज वाला जान अब्राहम दर्शकों ने देखा, लेकिन हमें कुछ भी अलग करना चाहिए। फिल्म ‘मद्रास कैफे’ में काम करने के लिए मुझे अपने आपको, अपने शरीर को नए सिरे से रचना पड़ा था। उस वक्त फिल्म के निर्देशक शुजीत सरकार ने भी मुझसे कहा कि, ‘कलाकार के लिए महत्व की बात यह होती है कि वह चरित्र के अनुरूप अपने शेरीर की बनावट को ढाल सके। कलाकार की असली सफलता यह है कि फिल्म में वह पात्र ही नजर आए। ’लेकिन हमारे यहां कोई भी कलाकार रिस्क नहीं लेना चाहता। मैंने भी निशिकांत कामत के साथ ‘फोर्स’, करण जौहर के साथ ‘दोस्ताना’ जैसी फिल्में की हैं। मगर मैं वह फिल्में भी करना चाहता हूं, जहां मैं एक कलाकार के तौर पर रिस्क उठाऊं। मुझे ‘मद्रास कैफे’ जैसी फिल्में करने में इंज्वॉयमेंट मिलता है। मेरे लिए फिल्म की सफलता या असफलता एक समान ही है। यदि मेरी फिल्म ‘विकी डोनर’ को लेकर कोई कहता है कि इससे अलग तरह की फिल्म बन सकती थी, तो मैं कहता हूं कि हां बन सकती है पर जरूरी है कि हम कुछ अलग काम करने की कोशिश तो करें। दर्शक अच्छा कंटेंट देखना चाहता है तो दूसरी तरफ मैं स्वयं भी प्रपोजल मेकर नहीं बनना चाहता। मेरा मकसद हमेशा कुछ नया करने का प्रयास करते रहना रहा है। पुरस्कार पाना मेरा मकसद कभी नहीं रहा। मेरा दावा है कि मैं अच्छी फिल्म बनाने का प्रयास करता रहूँगा।’’


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Mayapuri

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