निर्देशक जोगेन्द्र की नियत ठीक नही

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मायापुरी अंक 42,1975

‘बिन्दिया और बंदूक’ और ‘रंगा खुश’ जैसी कामयाब पिक्चरें बनाने के बाद भी लगता है जोगेन्द्र की नीयत ठीक नही हुई है। वह अपने यूनिट में बहुत ही बदनाम हैं। वह पैसा कमाने के बाद भी किसी को कुछ नही देना चाहते। चाहे उसके लिए उन्हें कितना ही झूठ बोलना पड़े इस बात का उद्देश्य नीचे पढ़िये।

एक मि. विलास हैं जो ‘बिन्दिया और बंदूक’ के बनते समय जोगेन्द्र के सहायक निर्देशक थे। जोगेन्द्र क्योंकि यह पहली पिक्चर बना रहे थे, इसलिए मि.विलास ने उनकी मदद की। यहां तक कि पैसे तक भी नही लिए। जोगेन्द्र ने वायदा किया जैसे ही फिल्म का बिजनेस होता है, वह मि. विलास को पैसे देंगे।

लेकिन समय आने पर जोगेन्द्र की नीयत बदल गई और टाल गये। मजबूर होकर मि. विलास ने पैसे वसूल करने की खातिर फैडरेशन में शिकायत की।

फैडरेशन ने दोनों को बुलाया लेकिन जोगेन्द्र ने साफ इंकार कर दिया उन्होंने कह दिया वे पैसा दे चुके हैं, और सबूत के तौर पर दो वाउचर (रसीदें) पेश कि और कहां इस पर मि. विलास के साईन हैं। मि. विलास के इंकार करने पर फैडरेशन ने वह रसीदें एक एक्सपर्ट के पास भेजी तो वहां से जवाब आया कि वह दस्तखत जाली किये गए हैं।

अब फैडरेशन ने जोगेन्द्र से यह पूछने के लिए बुलाया है उन्होंने इतना बड़ा झूठ क्यों बोला?

फैसला कुछ भी हो जब लेकिन मैं समझता हूं कि निर्माताओं का सब बहिष्कार करें और वह निर्माता कम से कम दो साल पिक्चर न देख सके, किसी गरीब वर्कर के पैसा मारने की कोशिश करे।


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Mayapuri

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