मूवी रिव्यू: एक सीधी सादी संगीतमय त्रिकोणीय प्रेम कहानी है – ‘जुगनी’

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रेटिंग**

वो कहते न कि संगीत में ईश्वर है इसीलिये सुफियाना म्यूजिक जानने वाले सूफी संगीत के सदके हमेशा ईश्वर के नजदीक बने रहते हैं। निर्देशिका शेफाली भूषण की फिल्म ‘जुगनी’ ऐसा ही कुछ कहती है।

कहानी

सुगंधा गर्ग बॉलीवुड में बतौर म्यूजिक डायरेक्टर संघर्ष कर रही हैं। वो अपनी  पहली फिल्म के लिये कुछ ऐसा नया करना चाहती हैं जिसे सुनते ही लगे कि कुछ बात है। इसके लिये वो पंजाब में एक लोकल सूफी सिंगर साधना सिंह को तलाश करती हुई उसके गांव पहुंच जाती हैं लेकिन साधना से पहले उसका बेटा सिद्धांत बहल मिलता है जो अपनी मां की तरह ही बहुत सुरीला गायक है। दोनों मां बेटे छोटे मोटे शो करके अपनी जीविका चलाते हैं। सुंगधा दोनों मां बेटे को सुनते ही सोच लेती है कि बस उसकी तलाश यहीं तक थी। बाद में वो दोनो मां बेटे की आवाज में कुछ गीत रिकॉर्ड करती है लेकिन इस बीच सिद्धांत और उसके बीच शारिरिक संबन्ध बन जाते हैं इस बात को लेकर सिंद्धात काफी गिल्टी महसूस करता है इसीलिये वो अपनी प्रेमिका अनुरिता झा से भी दूर दूर रहने लगता है। इधर सुगंधा चूंकि एक आधुनिक लड़की होने के बावजूद वो भी अपने ब्वॉयफ्रेंड  सिद्धांत बहल को फेवर नहीं करती। सुगंधा की फिल्म का म्यूजिक सुपर हिट हो जाता है। यंहा तक उसे बतौर म्यूजिक डायरेक्टर अवॉर्ड भी हासिल हो जाता है। इसे देखते हुये सिद्धांत अपना भाग्य आजमाने मुबंई आ जाता हैं लेकिन निराश हो जल्दी ही उसे वापस लौटना पड़ता है। इधर सुंगधा अपने दोस्त से अलग रहने लगती है। लेकिन चूंकि अब वह सफल म्यूजिक डायरेक्टर बन चूकी हैं और सिद्धांत बहल को सिंगिंग के बाहर से ऑफर आने शुरू हो जाते हैं।

डायरेक्शन

शेफाली भूषण की ये पहली फिल्म है और अपनी पहली फिल्म के लिये ही उसने एक ऐसा विषय चुना जो बाद में एक अधूरी ट्रांयगल लवस्टोरी बन कर रह जाती है। जिसे नतीजा निकाले बिना ही अधूरा छोड़ दिया जाता है। शेफाली ने संगीत पर आधारित त्रिकोणीय प्रेम प्यार वाली कहानी को बिल्कुल सीधे सादे तरीके से फिल्माया है। फिल्म में पंजाबी माहौल तथा किरदारों के लुक पर काफी ध्यान दिया गया है। कहानी कई जगह क्लियर नहीं हो पाती बावजूद इसके शेफाली का प्रयास अच्छा रहा।

अभिनय

सुगंधा गर्ग इससे पहले एक दो फिल्मों में आ चुकी हैं आगे भी उनकी फिल्म मस्तीजादे आ रही है। एक जिज्ञासु म्यूजिक डायरेक्ट और दो लोगों के प्यार में फंसी म्यूजिशियन के चरित्र को उसने कुशलता से निभाया है। सिद्धांत बहल एक देसी गायक की भूमिका में आश्चर्य जनक तौर पर प्रभावित करते हैं। साधना सिंह ने एक बदहाल सूफी सिंगर की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से जीया है। इनके अलावा स्पोर्टिंग एक्टर्स के तौर पर समीर शर्मा, चंदन गिल तथा कार्तिक सीताराम का भी अच्छा सहयोग रहा।

संगीत

फिल्म में क्लासिकल म्यूजिक का सदुपयोग किया गया है जो कहानी के बीच बीच में सुनते हुये कानों को भला लगता है।

क्यों देखें

एक सीधी सादी संगीतमय लव स्टोरी वाली ये फिल्म एक बार देखी जा सकती है

 

 


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Mayapuri

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